नमस्ते करने का सही तरीका, अर्थ और फायदे

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नमस्ते करने का सही तरीका, अर्थ और फायदे । what is namaste meaning in hindi

What is Namaste Meaning:- नमस्ते “नमस्कार” भारतीय संस्कृति का प्राचीन प्रतीक है, जो पूरे विश्व में भारत की पहचान बन चूका है. कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए विदेशो में नमस्कार करने का चलन साल 2020 के बाद के तेजी से बढ़ता जा रहा है. आइए जानिये नमस्ते करने का सही तरीका, अर्थ और फायदे.

Namaste Meaning

नमस्ते करने का वैज्ञानिक कारण (Scientific reason to do Namaste)

पश्चिम देशों की सभ्यता के प्रभाव से भारत में हाथ मिलाने (Hand-shake) का प्रचलन बढ़ता जा रहा है.

दूसरे शब्दों में विज्ञान के अनुसार यह उचित नहीं है क्योकि हाथ में अनेक प्रकार की संक्रामक बीमारियों के वायरस अथवा बैक्टेरिया जैसे (Corona-virus) हो सकते हैं जो हाथ मिलाने से आदान-प्रदान हो जाते हैं.

नमस्ते करने का सांस्कृतिक कारण

भारतीय आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार हाथ मिलाने से अपने शरीर की संचित शक्ति दूसरे में प्रवेश कर जाती है. जिसके कारण से शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती है. आदिम काल से ही गुरुजन अपने शिष्यों के सिर पर हाथ रखकर ‘शक्तिपात’ करते आ रहे है अर्थात् बिना बताये उन्हें शक्ति प्रदान करते है.

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Meaning of Namaste

नमस्ते संस्कृत भाषा का शब्द है
जो की ‘नमः’ और ‘ते’ शब्दों को मिला के बनता है।
नमः + ते = नमस्ते
“नमः’ का अर्थ होता है
(संज्ञा) noun= धनुष, पालन, ‘आराधना’।
(क्रिया) verb=झुकना, प्रणाम या नमस्कार करना, मानना।
और
‘ते’ का अर्थ है ‘आप’।
अर्थात्

नमस्ते = में आपको झुक कर सम्मान करता हूं।

नमस्ते करने का सही तरीका

हथेलियों को जोड़ते हुए + सिर झुकाकर + “नमस्कार” कह कर सम्बोधित करना सम्मान देने का एक सही  और उचित तरीका है.

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What is the difference between “Pranaam” and “Namaste”? प्रणाम और नमस्ते में क्या अंतर है?

नमस्ते अभिवादन करने का एक सामान्य भारतीय सनातनी तरीका है, लेकिन जब आप अपनी पूरी श्रद्धा, समर्पण के साथ किसी को सम्मान देते हैं तो हम उसे प्रणाम करना कहेंगे. हालांकि दोनों ही तरीको में मुद्रा(posture) सामान ही रहेगी. यह असंख्य शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता हैं, तो आइए जानते है कि आखिर क्या-क्या लाभ मिलता हैं?

  • अंजलि मुद्रा क्रोध नियंत्रण में मदद करती है.
  • यह घबराहट से राहत देता है और मन की शांति लाता है.
  • यह अनुभूति और एकाग्रता को बढ़ाता है.
  • कलाई और बांह के जोड़ों में लचीलापन प्रदान करता है.
  • शरीर के चक्रों को उत्तेजित करता है.
  • तनाव दूर करता है.
  • आंतरिक जागरूकता को बढ़ावा देता है.
  • मस्तिष्क के गोलार्धों को जोड़ता है और मस्तिष्क के कार्यों और समन्वय का अनुकूलन करता है.

निष्कर्ष के तौर पर हम यह कह सकते हे की नमस्ते “नमस्कार” करना वैज्ञानिक द्रस्टी के साथ लोगो से आदर एवं सम्मान पूर्वक मिलने का एक सही तरीका हैं.

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