क्या कोरोना के खतरे में बच्चों को इस समय स्कूल भेजा जाना चाहिए?

0
13

क्या कोरोना के खतरे में बच्चों को इस समय स्कूल भेजा जाना चाहिए? covid19 should children go to school in hindi

भारत के साथ-साथ कोविड-19 का प्रकोप पूरे विश्व में भयावह रूप से पांव पसार रहा है. देश में इसके दिनों दिन बढ़ते घातक प्रसार को रोकने के लिए लॉक डाउन – 1 की शुरुआत से  मार्च, 2020 से पूरे देश के स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए थे, लेकिन साल 2021 में कम क्षमता के साथ बच्चों के स्कूलों को खोलने की राज्य सरकारों ने अनुमति दे दी.

इन परिस्थितियों में  विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन शिक्षण एक संभावित कारगर विकल्प के रूप में उभरा है. वर्तमान में देश के शहरी इलाकों में स्कूली बच्चे अपने स्कूलों द्वारा आयोजित ऑन लाइन क्लास अटेंड कर रहे हैं, लेकिन हमारे  ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों का एक बड़ा प्रतिशत इंटरनेट कनेक्टिविटी के अभाव और गरीबी की वजह से स्मार्टफोन की अनुप्लब्धता  के कारण घर बैठे स्कूलों द्वारा आयोजित ऑनलाइन क्लास अटेंड नहीं कर पा रहे. इस वजह से देश के विद्यार्थियों का एक बड़ा वर्ग इस वर्ष अपनी अपनी क्लास का निर्धारित सिलेबस पूरा करने में असमर्थ है. ऐसी स्थिति में यह विकल्प अपना उद्देश्य पूरा करने में असमर्थ साबित हो रहा है.

covid19-should-children-go-to-school

साल 2021 के शैक्षणिक सत्र को लेकर भारत सरकार ने गाइडलाइंस जारी की है. जिसके अंतर्गत 21 जनवरी 2021 के बाद शिक्षकों और अशैक्षणिक स्टाफ के लिए विशेष परिस्थितियों में स्कूल खोले जा चुके हैं. लॉकडाउन खुलने के बाद से देश में कोविड-19 के प्रसार की रफ्तार बढ़ती ही जा रही है, जिसके थमने के कोई हालिया आसार नज़र नहीं आ रहे. देश का कोई कोना इस बीमारी के कहर से नहीं बचा है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि, क्या अभिभावकों को अपने बच्चों को नए शैक्षणिक सत्र 20210-2022 में स्कूल खुलने पर स्कूल भेजना चाहिए?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मसले पर लोकल सर्किल्स  द्वारा देश के 252 जिलों में 25,000 अभिभावकों एवं ग्रैंड पेरेंट्स पर सर्वे किया गया. पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि लोकल सर्किल्स  भारतीय नागरिकों के लिए पहला कम्युनिटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से हम नागरिक अपनी स्थानीय सरकार के साथ स्थानीय समुदाय आधारित और राष्ट्रीय मुद्दों पर साझेदारी निभा सकते हैं.

लोकल सर्किल्स  द्वारा आयोजित हालिया सर्वे से यह बात स्पष्ट हुई  है कि देश में कोविड-19 के भयावह  प्रसार के संदर्भ में अभिभावक गण सरकार के 30 सितंबर 2020 के बाद स्कूलों को खोलने के विचार के विरुद्ध हैं.

अभिभावक गण अपने बच्चों के लिए  दिनोंदिन फैलती इस  बीमारी का कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहते. पूरे विश्व के वैज्ञानिक अभी तक कोविड-19 के विषय में संपूर्ण जानकारी देने में  असमर्थ हैं। अतः लोकल सर्किल्स द्वारा आयोजित सर्वे में 13% अभिभावकों ने कहा कि वे कोविड-19 के प्रसार के संदर्भ में संपूर्ण विश्वसनीय  वैज्ञानिक जानकारी के अभाव में बच्चों को घर के बाहर भेज बीमारी को न्योता देने का खतरा मोल नहीं ले सकते.

58  प्रतिशत  अभिभावक अप्रैल, 2021 के बाद स्कूलों को खोलने के पक्ष में नहीं हैं. मात्र 33% अभिभावकों के अनुसार क्लास सिक्स से  क्लास ट्वेल्फ़्थ  के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोलने की सरकार की योजना से सहमत हैं.

9 प्रतिशत  अभिभावकों के अनुसार स्कूलों में इस खतरनाक बीमारी से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना संभव नहीं होगा.

5% अभिभावकों का मत था कि यदि स्कूल खोले गए तो कोविड-19 के प्रसार की गति बढ़ जाएगी.

1% अभिभावकों के मतानुसार यदि किसी परिवार में एक भी बच्चा स्कूल जाने के परिणामस्वरुप संक्रमित हो जाता है तो परिवार के बुजुर्गों का बीमारी पकड़ने का खतरा बहुत बढ़ सकता है.

मात्र 2% अभिभावकों ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऑनलाइन शिक्षण बेहतरीन विकल्प है.

आज के परिदृश्य में पूरी दुनिया में भारत में कोविड के दैनिक केसों की संख्या उच्चतम है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की गाइड लाइन्स  के अनुसार बच्चे उच्च जोखिम की श्रेणी में आते हैं.

covid19-should-children-go-to-school

इसे भी पढ़े :