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Home - News - नवरात्रि में कितने वर्ष की कन्याओं का किया जाता है कन्या भोजन | Kanya Pujan In Navratri
News KAMLESH VERMABy KAMLESH VERMA

नवरात्रि में कितने वर्ष की कन्याओं का किया जाता है कन्या भोजन | Kanya Pujan In Navratri

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Table of Contents

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  • इस विधि से करें कन्या पूजन :
  • कितने वर्ष की कन्याओं के पूजन का है विधान :
  • कन्या पूजन क्यों किया जाता है :
  • कन्या पूजन किस दिन करें :

नवरात्रि में कितने वर्ष की कन्याओं का किया जाता है कन्या भोजन | Kanya Pujan In Navratri

हिंदू समुदाय द्वारा मनाए जाने वाले नवरात्रि के दिनों में क्रमशः शैलपुत्री माता, ब्रह्मचारिणी माता, चंद्रघंटा माता, कूष्मांडा माता, स्कंदमाता, कात्यायनी माता, कालरात्रि माता, महागौरी और सिद्धिदात्री माता का पूजन किया जाता है. नवमी तिथि पर माता सिद्धिदात्री के पूजन के साथ कन्या भोज कराने के बाद नवरात्रि के व्रत का पारण किया जाता. यानी व्रत का समापन किया जाता है. शारदीय नवरात्रि (Shardiya navratri 2022) 26 सितंबर से शुरू होकर 04 अक्टूबर 2022 को समाप्त होगी. 

हिंदू धर्म में नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. इन कन्याओं या कंजकों को माता दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतिक मानकर पूजा जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार कन्या पूजन में कन्याओं की आयु का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए. तो चलिए जानते हैं कि कितने वर्ष से लेकर कितने वर्ष की कन्याओं का किया जाता है पूजन और क्या है महत्व.

इस विधि से करें कन्या पूजन :

  • नवरात्रि पर कन्याओं को निमतंत्रण देकर आमंत्रित करना बेहद ही आवश्यक होता है इसलिए एक दिन पहले ही नौ कन्याओं और एक लड़के को आमंत्रित कर लें.
  • नवरात्रि में नौ कन्याओं के साथ एक लड़कों का भी पूजन किए जाने की परंपरा है, कारण लड़के के बटुक भैरव का स्वरूप मानकर पूजा जाता है.
  • सभी नौ कन्याओं और यानि लड़के के पैर स्वच्छ जल से धोकर उन्हें आसन पर बिठाएं.
  • जिसके बाद कन्याओं का रोली या कुमकुम और अक्षत से तिलक करें.
  • अब आप गाय के उपले को जलाकर उसकी अंगार पर लौंग, कर्पूर और घी डालकर अग्नि प्रज्वलित करें.
  • जिसके बाद कन्याओं के लिए बनाए गए भोजन में से थोड़ा सा भोजन पूजा स्थान पर अर्पित करें.
  • अब सभी कन्याओं और लांगुरिया के लिए भोजन परोसे.
  • जब कन्याएं भोजन कर लें जिसके बाद उन्हें प्रसाद के रूप में फल, सामर्थ्यानुसार दक्षिणा अथवा उनके उपयोग की वस्तुएं प्रदान करें.
  • जिसके बाद कन्याओं के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें.
  • अब कन्याओं को विदा करने से पहले उनके मार्ग पर जल के छींटें दें और सम्मान पूर्वक विदा करें.

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कितने वर्ष की कन्याओं के पूजन का है विधान :

नवरात्र के सभी दिन एक कन्या की पूजा की जाती है. जबकि अष्टमी और नवमी पर नौ कन्याओं का पूजन किया जाता है. कंजक पूजन के लिए 02 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को आमंत्रित करना चाहिए.  इसके साथ ही एक बालक को भी निमतंत्रण भेजकर आमंत्रित करें. इन नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरुप और बालक को बटुक भैरव का स्वरूप मानकर पूजन किया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक आयु की कन्या के मां के स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करती है.

  • दो वर्ष की कन्या को कुंवारी कहा जाता है. दो वर्ष की कन्या का पूजन करने से घर में दुख और दरिद्रता दूर हो जाती है.
  • वहीं तीन वर्ष आयु की कन्या त्रिमूर्ति का रूप मानी गई हैं. त्रिमूर्ति के पूजन से घर में धन-धान्‍य की भरमार रहती है, वहीं परिवार में सुख और समृद्धि जरूर रहती है.
  • चार साल की कन्या को कल्याणी का प्रतिक माना जाता है. इनका पूजन करने से परिवार का कल्याण होता है। इनकी पूजन करने से राज्यपद की प्राप्ति होती है.
  • पांच वर्ष की कन्या रोहिणी होती हैं. रोहिणी का पूजन करने से परिवार के लोग रोगमुक्त रहता है.
  • छह साल की कन्या को कालिका रूप माना गया है. कालिका स्वरूप को पूजने से विजय, विद्या और राजयोग मिलता है.
  • सात साल की कन्या चंडिका होती है. चंडिका स्वरूप को पूजने से घर में ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.
  • आठ वर्ष की कन्याएं शाम्‍भवी कहलाती हैं. इनको पूजने से सारे विवाद में विजयी मिलती है और संपदा की प्राप्ति होती है.
  • नौ साल की कन्या माँ दुर्गा का स्वरुप हैं इन कन्याओं का पूजन करने से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है.
  • दस साल की कन्या सुभद्रा कहलाती हैं. सुभद्रा अपने भक्तों के सारे मनोरथ पूरा करती हैं.

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कन्या पूजन क्यों किया जाता है :

हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यतानुसार, एक बार माता वैष्णो देवी ने अपने परम भक्त पंडित श्रीधर की भक्ति से प्रसन्न होकर उसकी न सिर्फ लाज बचाई और पूरी सृष्टि को अपने अस्तित्व का प्रमाण भी दे दिया. वर्तमान के जम्मू-कश्मीर के कटरा कस्बे से 2 किमी की दूरी पर स्थित हंसाली गांव में माता के भक्त श्रीधर रहते थे. वे नि:संतान थे एवं दुखी थे। एक दिन उन्होंने नवरात्र पूजन के लिए कुँवारी कन्याओं को अपने घर आमतंत्रित किया. माता वैष्णो कन्या के रूप में उन्हीं के बीच आकर बैठ गई। पूजन के बाद सभी कन्याएं लौट गईं, लेकिन माता नहीं गईं.

बालरूप में आई देवी पं. श्रीधर से बोलीं- सबको भंडारे का न्यौता दे आओ. श्रीधर ने उस दिव्य कन्या की बात मान ली और आस–पास के गांवों में भंडारे का आमतंत्रण भिजवा दिया. भंडारे में तमाम लोग आए. अनेकों कन्याएं भी आई. जिसके बाद श्रीधर के घर संतान की उत्पत्ति हुई. तब से आज तक कन्या पूजन और कन्या भोजन करा कर लोग माता से आशीर्वाद मांगते हैं.

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कन्या पूजन किस दिन करें :

अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि, कन्या पूजन की शुरुआत वैसे तो नवरात्रि के सातवें दिन यानि कि सप्‍तमी से ही शुरु हो जाती है. लेकिन जो लोग पूरे नौ दिन का व्रत करते हैं उन्हें तिथि के अनुसार नौवें दिन यानी नवमी और दशमी को कन्या पूजन करने के बाद ही प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण करना चाहिए. हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार दुर्गाष्‍टमी के दिन कन्‍या पूजन या कन्या खिलाने का प्रावधान सबसे शुभ माना गया है. इस दिन कन्या पूजन करने से परिवार के दुखों का निवारण होता है और घर पर मां दुर्गा की कृपा बरसती है.

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दैनिक भास्कर और पत्रिका जैसे राष्ट्रीय अखबार में बतौर रिपोर्टर सात वर्ष का अनुभव रखने वाले कमलेश वर्मा बिहार से ताल्लुक रखते हैं. बातें करने और लिखने के शौक़ीन कमलेश ने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से अपना ग्रेजुएशन और दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है. कमलेश वर्तमान में साऊदी अरब से लौटे हैं। खाड़ी देश से संबंधित मदद के लिए इनसे संपर्क किया जा सकता हैं।

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