देवउठनी एकादशी पर यह 20 उपाय करें, खुल जाएंगे भाग्य के बंद दरवाजें

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देवउठनी एकादशी पर यह 20 उपाय करें, खुल जाएंगे भाग्य के बंद दरवाजे । Do these 20 remedies on Devauthani Ekadashi, the doors of fate will open

हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी का महत्व जीवन के समान है. हर कोई पूरे वर्ष देवउठनी ग्यारस का इंतजार करता है. एकादशी को वास्तु और ज्योतिष के अनुसार बेहद ही खास माना जाता है. इस दिन विधि विधान से पूजन करने पर भाग्य का उदय होता है. आसान भाषा में कहा जाएं तो यहीं एक दिन होता है, जब हम सभी अपनी किस्मत की लकीरों को बदल सकते हैं. लेख के माध्यम से हम आपके लिए 20 उपाए लेकर आएं है. जिनका प्रयोग कर आप अपनी किस्मत को एक नया माैका दे सकते हैं.

देवउठनी एकादशी पर यह 20 उपाय करें, खुल जाएंगे भाग्य के बंद दरवाजे । Do these 20 remedies on Devauthani Ekadashi, the doors of fate will open
 
  1. तुलसी के पौधे के चारों तरफ स्तंभ या खंबे बनाएं।
  2. जिसके बाद उस पर तोरण सजाएं।
  3. रंगोली से अष्टदल कमल की सजावट करें।
  4. शंख,चक्र और गाय के पैर बनाएं।
  5. तुलसी के साथ आंवले का गमला लगाएं।
  6. तुलसी का पंचोपचार सर्वांग पूजा करें।
  7. दशाक्षरी मंत्र से तुलसी का आवाहन करें।
  8. तुलसी का दशाक्षरी मंत्र-श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वृन्दावन्यै स्वाहा।
  9. घी का दीप और धूप दिखाएं।
  10. सिंदूर,रोली,चंदन और नैवेद्य चढ़ाएं।
  11. तुलसी को वस्त्र अंलकार से सुशोभित करें।
  12. जिसके बाद लक्ष्मी अष्टोत्र या दामोदर अष्टोत्र पढ़ें।
  13. तुलसी के चारों ओर दीपदान करें।
  14. एकादशी के दिन श्रीहरि को तुलसी चढ़ाने का फल दस हज़ार गोदान के बराबर है।
  15. जिन दंपत्तियों के यहां संतान न हो वो तुलसी नामाष्टक पढ़ें
  16. तुलसी नामाष्टक के पाठ से न सिर्फ शीघ्र विवाह होता है बल्कि बिछुड़े संबंधी भी करीब आते हैं।
  17. नए घर में तुलसी का पौधा, श्रीहरि नारायण का चित्र या प्रतिमा और जल भरा कलश लेकर प्रवेश करने से नए घर में संपत्ति की कमी नहीं होती।
  18. कारोबार में सफलता के लिए गुरुवार को श्यामा तुलसी का पौधा पीले कपड़े में बांधकर, ऑफिस या दुकान में रखें. नौकरी में बड़ा प्रमोशन होगा।
  19. तुलसी मंत्र का जाप करें
 
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः । नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये ।।
 
ॐ श्री तुलस्यै विद्महे।
विष्णु प्रियायै धीमहि।
तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।
 
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।
 
20 – 11 बार तुलसी माता की परिक्रमा करें।

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हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी, तुलसी विवाह या प्रबोधिनी एकादशी का त्यौहार मनाया जाता हैं. साल 2020 में देवउठनी ग्यारस और तुलसी विवाह 25 नवंबर बुधवार को है.

तारीख (Date) 25 नवंबर 2020
वार (Day) बुधवार
एकादशी तिथि प्रारम्भ (Ekadashi Started) 06:53 पूर्वाह्नन 25 नवंबर 2020
एकादशी तिथि समाप्त (Ekadashi Ended) 12:24 अपराह्न 26 नवंबर 2020
पारण (व्रत तोड़ने का) समय (Parana Time) 25 नवंबर (द्वादशी) को 06:53 पूर्वाह्न से 09:30 पूर्वाह्न शुभ मुहूर्त

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