शहीद बादलसिंह के पार्थिव देह को देख बेसुध हुई पत्नी

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शहीद बादलसिंह के पार्थिव देह को देख बेसुध हुई पत्नी । शहीद बादलसिंह चंदेल के शहर में आया आंसुओं का सैलाब, अंतिम दर्शन के उमड़े शहरवासी । कोरोना संक्रमण पर भारी रही देश भक्ति । Nagda News: Wife obsessed with martyr Badal Singh’s body

नागदा। देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले शहर के एक युवा शहीद बादलसिंह चंदेल के अंतिम दर्शन के लिए शहरवासियों का हूजूम उमड़ा। शहीद को तिरंगे में लपटा देख नागदा वासियों की आंखों में आंसू आ गए। शहीद की कॉलोनी रामसहाय मार्ग पर लोगों का सैलाब उमड़ा।  प्रशासन की कोरोना गाइड लाइन व अपिल देश भक्ति पर भारी रही।

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पार्थिव देह के पहुंचने के बाद बेटे के साथ दर्शन करती पत्नी

शहीद की अंतिम यात्रा का शहर में लगभग 30 से अधिक स्थानों पर पुष्प वर्षा कि गई। अंतिम यात्रा लगभग 4 किमी का सफर कर 3 घंटे में मुक्तिधाम पहुंची। शहीद का पार्थिव देह शनिवार सुबह 10 बजे शहर पहुंचा। जैसे ही शहीद का पार्थिव उसके घर पहुंचा तो मां व पत्नी बेसुध हो गए।

शहीद के सम्मान में शहर के व्यापारी संगठनों ने आधे दिन शहर बंद का आहवान भी किया था और वह सफल भी रहा। जब तक शहीद का अंतिम संस्कार नहीं हुआ तब तक शहर में मुख्य मार्ग की दुकानें नहीं खुली। गौरतलब है कि 15 कुमाऊॅ रेजीमेंट के जवान बादल सिक्किम में लगभग 27 हजार फीट उपर ग्लेशियर मे पदस्थ था। 24 मार्च 2021 की रात को बर्फ धंसने से उसे सांस लेने में तकलीफ हुई और वह शहीद हो गया था।

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शहीद के शव को निहारती पत्नी दीपिका चंदेल.

इन मार्गों से निकली अंतिम यात्रा

भारतीय सेना का एक दल सुबह 10 बजे पार्थिव देह लेकर शहर पहुंचा। दल बायपास से महिदपुर रोड, पाड़ल्या रोड, भेरु चौराहा, गुर्जर मोहल्ला होता हुए शहीद के निवास स्थान रामसहाय मार्ग पहुंचा। यहां पर लगभग एक घंटे बाद उसकी अंतिम यात्रा प्रारंभ हुई। इस दौरान उसको गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जो रामहसाय मार्ग, नगर पालिका, पुराना बस स्टैंड, जवाहर मार्ग, अस्तताल चौराहा, कन्याशाला चौराहा, एमजी रोड, थाना चाैराहा, चंबल मार्ग होते हुए में दोपहर को मुक्तिधाम पहुंची। पूरे अंतिम यात्रा मार्ग पर देश भक्ति के गीत बजते रहे।

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शहीद के पार्थिव देह को देखने के लिए उमड़े लोग.

कई राजनेता व गणमान्य नागरिक हुए शामिल

शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए जिला पुलिस लाइन से पुलिस विभाग का एक सूबेदार व 8 पुलिस जवानों का एक दल नागदा पहुुंचा और मुक्तिधाम पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। अंतिम यात्रा में भाजपा, कांग्रेस, आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, हिन्दू जागरण मंच के पदािधकारी व नेता एवं गुर्जर समाज समेत कई सामाजिक संस्था के गणमाान्य नागरिक तथा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

चार वर्ष पूर्व हुई थी शादी

बादल का जन्म 12 जुलाई 2016 को हुआ था। बादल ने भारत कॉमर्स स्कूल में हाई स्कूल तक पढ़ाई की। बादल का बचपन से सेना में जाने का शोक था। उसके लिए वह सुबह 4 बजे उठकर मैदान में दौड़ने भी जाता था। महज 18 वर्ष की उम्र में उसका चयन भारतीय सेना में हो गया था। बादल का विवाह जीवाजी नगर निवासी दीपिका चंदेल से 27 नवंबर 2016 को विवाह हुआ था। वर्ष 2018 में बादल पिता बना था। बादल के पिता ग्रेसिम उद्योग नागदा में ठेका श्रमिक थे। लेकिन लॉकडाउन के कारण उनका कार्य बंद हो गया था। बादल का एक छोटा भाई जयसिंह जो ग्रेसिम उद्योग में ठेका श्रमिक है।

तीसरा जवान शहीद

नागदा शहर के तीन जवान भारतीय सेना में अभी तक शहीद हो गए है। पहला जवान ग्रिजेश गुप्ता 12 अक्टूबर 2002 को जम्मू-कश्मीर के कारगिल में हुआ था। दूसरा जवान कंहैयालाल सिसौदिया 17 अगस्त 2004 उप्र के झांसी के समीप गांव पोखरन में हुआ था। और तीसरे बादलसिंह चंदेल है.

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