‘छठ’ का प्रसाद और सेहत का बेजोड़ कनेक्शन, जानें यहां पर ?

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प्रतिकात्मक तस्वीर : सोर्स गूगल

पूर्वांचलवासियों का महापर्व छठ पर्व चार दिनों तक चलता है. आस्था का महापर्व ‘छठ’ (Chhath Puja) का सनातन धर्म में बेहद ही अधिक महत्व है. हिंदू धर्म में यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें ना केवल उदयाचल सूर्य की पूजा की जाती है बल्कि अस्ताचलगामी सूर्य को भी पूजा जाता है. इस बार यह त्योहार 08 नवंबर 2021, सोमवार से नहाय-खाय के साथ शुरू होकर 11 नवंबर 2021 तक चलेगा. पोस्ट के जरिए जानते हैं कि ‘छठ’ का प्रसाद और सेहत का बेजोड़ कनेक्शन क्या होता है.

छठ कार्तिक महीने की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक यानि चार दिनों का त्योहार है. इसकी मुख्य पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष (छठे दिन) की जाती है. छठ पर्व को पहले सिर्फ बिहार में ही मनाया जाता था लेकिन अब इस पर्व को पूरे देश में मनाया जाता है.

8 नवंबर 2021 को नहाय खाय, 9 नवंबर को खरना और 10 नवंबर 2021 को सूर्य षष्ठी का मुख्य पर्व होगा, इस दिन उपवास रखने वाले लोग डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे. पर्व का समापन 11 नवंबर 2021 को उदय होते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा. इसे बाद इसी दिन पारण किया जाएगा.

हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यता है कि छठ (Chhath Puja) देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की अराधना की जाती है. मनोवांछित फल देने वाले इस पर्व को पुरुष और महिला समान रूप से मनाते हैं. लेकिन आम तौर पर व्रत करने वालों में बहुतायत में महिलाएं होती है.

प्रतिकात्मक तस्वीर : सोर्स गूगल

महाभारत काल से ही मनाया जाता है छठ –

हिंदू धर्म में किवंदति है कि, इस अनुपम महापर्व को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं. छठ व्रत का प्रारंभ महाभारत काल के समय से देखा जा सकता है. छठव्रती मां गंगा, यमुना या किसी नदी या जलाशयों के किनारे अराधना करती हैं.

चार दिनों तक चलने वाले इस त्योहार (Chhath Puja) के दौरान बहुत सारे नियमों का पालन करना होता है. इस पर्व को पूरे बिहार सहित झारखंड, मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है. पूजा के लिए विभिन्न तरह के पकवान बनाए जाते हैं और फल मंगाया जाता है.

जिसे सूर्य देव को अर्पण किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूजा की सूप में रखे जाने वाले फल, ठेकुआ समेत तमाम पकवानों का सेहत के साथ भी संबंध होता है. यानी छठ पर्व का प्रसाद सेहत के लि लाभदायक होता है. तो आईए जानते हैं कि छठ का प्रसाद सेहत के लिए किस तरह लाभकारी है.

ठेकुआ – Chhath Puja

छठ पर्व के प्रसाद में सबसे अहम ठेकुआ होता है. यह गुड़ व आटे से बनाया जाता है. वैज्ञानिकों की मानें तो छठ (Chhath Puja) पूजा के साथ ही ठंड का मौसम शुरू हो जाता है. ठंड से बचने व सेहत को अच्छा बनाए रखने के लिए गुड़ बहुत ही फायदेमंद माना जाता है.

गन्ना –

छठ पर्व में भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूजा की सामग्रियों में गन्ना होना बहुत ही जरूरी होता है. कहा जाता है कि छठी मैय्या को गन्ना बहुत पसंद है. सिर्फ यही नहीं सूर्य की कृपा से फसल का उत्पादन होता है इसलिए उन्हें यह फल प्रसाद के तौर पर चढ़ाया जाता है. वहीं गन्ना खाने से यह शरीर के इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत कर बीमारियों में लड़ने में मदद करता है.

नींबू – Chhath Puja

इस पर्व में साधारण नींबू की जगह डाभ नींबू का इस्तेमाल किया जाता है. यह नींबू बाहर से पीला व अंदर से लाल होता है. यह नींबू कई तरह के रोगों को दूर करने में मदद करता है और हमारे स्वास्थ्य को दुरूस्त रखता है.

चावल का लड्डू –

छठ पूजा में चावल के लड्डू भी चढ़ाए जाते हैं. इन लड्डूओं को विशेष चावल से बनाया जाता है. इसमें इस्तेमाल होने वाले चावल धान की कई परतों से तैयार होते हैं. आपको बता दें कि इस दौरान चावलों की भी नई फसल होती है. इसलिए माना जाता है कि छठ (Chhath Puja) में सूर्य को सबसे पहले नई फसल का प्रसाद अर्पण किया जाना चाहिए. इसलिए छठ में चावल के लड्डू को भी प्रसाद में शामिल करने की परंपरा है.

इसे भी पढ़ें: छठ पूजा का मुहूर्त, महत्व व इससे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं

केला –

छठ पूजा को लेकर मान्यता है कि इसे बच्चों के लिए मनाया जाता है. छठ जो कि सर्दियों के मौसम का त्योहार है और सर्दी में बच्चों में गैस की समस्या बहुत रहती है. ऐसे में छठ के प्रसाद में शामिल केला बच्चों के साथ बड़ों की भी गैस की समस्या को दूर करता है.

नारियल – Chhath Puja

इस त्योहार में नारियल भी मुख्य प्रसाद के रूप में ही शामिल होता है. नारियल में पाए जाने वाले कई तरह के पौष्टिक तत्व इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर विभिन्न तरह की बीमारियों से लड़ने में बेहद ही सहायक होता है.

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