चौधरी चरण सिंह का जीवन परिचय | Chaudhari Charan Singh Biography In Hindi

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चौधरी चरण सिंह का जीवन परिचय
Chaudhari Charan Singh Biography, Wiki, Age, Birth, Award & Achievement, Death, Political Career
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मित्रों आज हम अपने जीवन परिचय सेगमेंट में, भारत के पाँचवे प्रधानमंत्री श्री चौधरी चरण सिंह का जीवन परिचय बताएँगे. प्रधानमंत्री बनने के पूर्व इन्होंने भारत के गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री का भी जिम्मा संभाला. इन्होंने अपने जीवन कार्यकाल में प्रमुख किसान राजनेता के रूप में भी कई कार्य किये है. देश के किसानों की स्थिति सुधारना यह उनका हेतु था. देश की राजनीति एवं किसान सम्बन्धी क्षेत्रों में चरण सिंह जी का बेहद ही उल्लेखनीय योगदान रहा है. भारत स्वतन्त्रता संग्राम में भी उन्होंने सक्रीय सहभाग लिया था. तो आइये श्री चौधरी चरण सिंह का जीवन परिचय विस्तार से जानते एवं समज़ते है –

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चौधरी चरण सिंह का जीवन परिचय | Chaudhari Charan Singh Biography In Hindi

बिंदु (Points) जानकारी (Information)
नाम (Name) श्री चौधरी चरण सिंह
जन्म (Date of Birth) 23/12/ 1902
आयु 70 वर्ष
जन्म स्थान (Birth Place) हापुर, मेरठ, उत्तर प्रदेश
पिता का नाम (Father Name) चौधरी मीर सिंह
माता का नाम (Mother Name) नेतर कौर
पत्नी का नाम (Wife Name) गायत्री देवी
जाति(Cast) जाट
पेशा (Occupation ) पूर्वप्रधान मंत्री
बच्चे (Children) 5 पुत्री, 1 पुत्र
मृत्यु (Death) 29/05/1987
मृत्यु स्थान (Death Place) नई दिल्ली
भाई-बहन (Siblings) एक भाई
अवार्ड (Award) ज्ञात नहीं

चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक जाट परिवार मे हुआ था. पिताजी चौधरी मीर सिंह किसान थे. चरण सिंह ने गरीबी को बहुत ही करीब से देखा था. उनके पिताजी किसान होने के कारण उन्होंने बचपन से किसान की स्तिथि को करीब समझा और जाना था. इस ही संवेदनशील भाव के चलते उन्होंने भविष्य में किसानो के अधिकारों की मांग के लिए अनंत प्रयास किए.

चौधरी चरण सिंह शिक्षा | Chaudhari Charan Singh Education

सिंह ने अपनी परिस्थितियों को शिक्षा के परे कभी भी नहीं आने दिया. हमेशा से ही शिक्षा को प्रथम स्थान दिया. इन्होंने अपनी प्रार्थमिक शिक्षा नूरपुर गांव से पूरी की थी, और मेरठ के सरकारी उच्च विद्यालय से इन्होने मेट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की. साल 1923 में वे विज्ञान में स्नातक हुए. दो साल के बाद उन्होंने 1925 में कला में स्नातक किया. इसके बाद सिंह ने आगरा विश्वविद्यालय से वकील की परीक्षा उत्तीर्ण की और फिर वे गाजियाबाद में वकालत करने लगे. उन्होंने वकालत का कार्य बहुत ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा पूर्वक किया.

चौधरी चरण सिंह निजी ज़िन्दगी | Chaudhari Charan Singh Personal

हरियाणा प्रदेश के एक प्रतिष्ठित जटराणा गोत्र के जाट परिवार में गंगारामजी की पुत्री गायत्री देवी के साथ, 4 जून 1925 को चरण सिंह जी वैवाहिक गठबंधन में बंधे. सिंह और गायत्री देवी को सौभाग्य से पाँच पुत्रियाँ और एक पुत्र की प्राप्ति हुई.

सरस्वती – उनकी सबसे बड़ी पुत्री का विवाह एक विद्वान प्रो० गुरुदत्तसिंह सोलंकी के साथ हुआ

ज्ञानवति – दूसरी पुत्री ज्ञान, जो मेडिकल ग्रेजुएट है, सरकारी नौकरी से त्यागपत्र देकर जेनोआ में अपने पति के पास चली गई. वह आई.पी.एस. अफसर है.

वेदवती – तीसरी पुत्री वेद का विवाह, राम मनोहर लोहिया हस्पताल के एक योग्य डाक्टर जे.पी. सिंह के साथ हुआ.

सरोज – चौथी पुत्री सरोज का विवाह श्री एस.पी. वर्मा के साथ हुआ है जो कि उत्तरप्रदेश में गन्ना विभाग में अफसर है.

शारदा – पाँचवी पुत्री का विवाह वासुदेव सिंह के साथ हुआ.

अजित सिंह – इन्होने यन्त्रशास्त्र विश्वविद्यालय की उपाधि धारण की है. वह अमेरिका में नौकरी करते थे. वहां से त्यागपत्र देकर भारत आ गये और लोकदल के प्रमुख मन्त्री (General Secretary) चुने गये. वे लोकसभा के सदस्य भी हैं.

राजनितिक जीवन | Chaudhari Charan Singh Political Career

साल 1929 में सिंह ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में स्वच्छ भाव से हिस्सा लिया. इसी साल कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य उद्घोष से प्रभावित होकर युवा चरण सिंह ने गाजियाबाद में कांग्रेस कमेटी का गठन किया. वर्ष 1930 में महात्मा गांधी द्वारा आयोजित दांडी यात्रा के चलते, चरण सिंह ने गाजियाबाद की सीमा पर बहने वाली हिण्डन नदी पर नमक बनाया. परिणामतः उन्हें 6 माह की सजा हुई. जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से स्वतन्त्रता संग्राम में समर्पित कर दिया. वह महात्मा गांधी के अहिंसात्मक विचारधारा से प्रभावित थे. वर्ष 1940 में गांधीजी द्वारा किये गए ‘व्यक्तिगत सत्याग्रह’ में भी चरण सिंह को गिरफ्तार किया गया था.

वर्ष 1942 में संपूर्ण भारत देश में असंतोष फैला हुआ था. क्योकि उस समय गांधीजी ने ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन के माध्यम से ‘करो या मरो’ का आह्वान किया था. इस दौरान चरण सिंह ने भूमिगत होकर गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, मवाना, सरथना, बुलन्दशहर आदि के गाँवों में घूम-घूमकर गुप्त क्रांतिकारी संगठन तैयार किये. इस समय भी उन्हें डेढ़ वर्ष केलिए गिरफ्तार किया था. जेल में ही चौधरी चरण सिंह ने “शिष्टाचार” नामक पुस्तक लिखी. यह पुस्तक भारतीय संस्कृति और समाज के शिष्टाचार के नियमों का एक बहुमूल्य दस्तावेज है.

चौधरी चरण सिंह व जवाहर लाल नेहरु के विचारो में काफी मतभेद था. दोनों के बिच काफ़ी बार मतभेद हुए. चरण सिंह नेहरु की आर्थिक नीती के आलोचक थे. इस मतभेद के चलते उन्होंने 1967 में काँग्रेस पार्टी छोड़ दी. उसके बाद उन्होंने राज नारायण और राम मनोहर लोहिया के साथ मिलकर एक नई पार्टी का गठन किया, जिसका चिन्ह ‘हलदार’ था. मोरारजी देसाई जी के कार्यकाल में चरण सिंह “उप-प्रधानमंत्री” एवम “गृहमंत्री रहे. जनता दल पार्टी के शासन काल में ही इनके और मोरारजी देसाई के बीच में मनमुटाव काफ़ी बढ़ गए, परिणाम स्वरूप चरण सिंह जी ने जनता दल पार्टी को भी छोड़ दिया. इस घटना के बाद मोरारजी देसाई की सरकार गिर गई. 28 जुलाई 1979 को इन्हे प्रधानमंत्री पद दिया गया. वे भारत के पाँचवे प्रधानमंत्री बने. वे प्रधानमंत्री पद पर ज्यादा समय नहीं रह सके. किसान नेता के रूप में किये गए कार्य |

भारत कृषि प्रधान देश है. चौधरी चरण सिंह किसानों का काफ़ी सन्मान करते थे. वे किसानो केलिए किसी नेता से कम नहीं थे. उन्होंने उत्तर प्रदेश के किसानों की कई समस्याओं का समाधान किया. हालाँकि, उन्होंने गांधीजी के कांग्रेस पार्टी का साथ छोड़ दिया हो, लेकिन वे हमेशा गांधीवादी विचारधारा से जुड़े रहे. गांधीजी ने भी किसानों के अधिकारों केलिए बहुत प्रयास किये है.

आज़ादी के बाद चरण सिंह ने भी गांधीजी के छूटे हुए कार्यों का अवलोकन किया. सिंह ने सोवियत-पद्धति पर आधारित आर्थिक सुधारों का विरोध किया था. उनका तर्क था कि, सहकारी-पद्धति की खेती भारत में सफल नहीं हो सकती. वे नहीं चाहते थे की किसानों का जमीन पर का मालिकाना हक़ छीना जाए. वे किसान के बेटे होने के कारण वे इस बात को अच्छी तरह से समज़ते थे. उनका मानना था की, किसानों का जमीन पर मालिकाना हक़ होने से ही इस क्षेत्र में प्रगति हो सकती है. वे कहते थे, “देश की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों एवं खलिहानों से होकर गुजरता है”.

किसानों समबन्धित मुख्य विचार

  • देश की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों एवं खलिहानों से होकर गुजरता है.
  • किसान इस देश का मालिक है, परन्तु वह अपनी ताकत को भूल बैठा है.
  • किसानों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होगी तब तक देश की प्रगति संभव नहीं है.
  • किसानों की क्रय शक्ति नहीं बढ़ती तब तक औधोगिक उत्पादों की खपत भी संभव नहीं है.
  • हरिजन लोग, आदिवासी लोग, भूमिहीन लोग, बेरोजगार लोग या जिनके पास कम रोजगार है और अपने देश के 50% फीसदी किसान जिनके पास केवल 1 हैक्टेयर से कम जमीन है … इन सबकी तरफ सरकार विशेष ध्यान होगा.
  • किसानों की दशा सुधरेगी तो देश सुधरेगा.

चरण सिंह द्वारा लिखित पुस्तके | Charan Singh Books

  • शिष्टाचार
  • भूमि सुधार और कुलक वर्ग
  • इकनोमिक नाइटमेयर ऑफ़ इंडिया इट्स कॉज एंड क्योर
  • आबॉलिशन ऑफ जमींदारी
  • लिजेंड प्रोपराटरशिप और इंडियास पॉवर्टी एंड सोल्यूशंस

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