थावे की पड़किया का इतिहास, जानें कौन थे गौरीशंकर साह । Thawe Padakiya

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थावे की पड़किया का इतिहास, जानें कौन थे गौरीशंकर साह । Gopalganj Pidakiya । History of Thawe Padakiya । know who was Gaurishankar Sah

यदि आप बिहार के गोपालगंज जिले में घूमने आने वाले हैं, तो दो काम करना कभी नहीं भूले. एक जिला मुख्यालय से तीन किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक थावे दुर्गा मंदिर पहुंच कर रहषु मां थावे भवानी का दर्शन करना और दूसरा थावे की पड़किया (Thawe Padakiya) खरीदना. पड़किया मिठाई थावे वासियों के परिचय का चिह्न है. हर कोई थावे को Thawe Padakiya के नाम से पहचानता है. लेकिन क्या आपकों पता है, पड़किया मिठाई के जनक कौन थे, नहीं ना, तो चलिए हम आपकों बताते हैं. जब भी आप थावे जाएंगे तो आपकों मां भवानी मंदिर के चारों ओर गौरीशंकर पड़किया के नाम से दर्जनाें दुकानें दिखाई देगी. यही गौरीशंकर ने थावे में खाेया की पड़किया बनाने की शुरुआत साल 1947 में की थी. जो आज थावे की दुर्गा माता को प्रमुख प्रसाद के रुप में चढ़ाया जाता है.

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बिहार की राजधानी पटना से लेकर खाड़ी देशों में भी थावे की पड़किया की विशेष मांग हैं. खाड़ी देशों में काम करने वाले जिले के हजारों लोग घर आने पर खाड़ी देशों में रहने वाले अपने मित्रों के लिए थावे की पड़किया भेंट स्वरूप ले जाते हैं.

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फाईल फोटो

सन्यासी की सलाह पर गौरीशंकर साह बनाने लगे पड़किया

असल में पड़किया गुजिया मिठाई का एक स्वरूप है. जिसे बिहार गोपालगंज थावे की आमबोल चाल की भाषा में पड़किया, पेडूकिया के नाम से जाना जाता है. इसमें खोया (शुद्ध दूध से निकलने वाला मावा) और चीनी मिलाकर बनाया जाता है. अब जानते हैं कि, इसकी शुरुआत कैसे हुई.

सिवान जिले के जीरादेई थाना क्षेत्र के नरेंद्रपुर गांव निवासी लक्ष्मी साह के पुत्र गौरीशंकर साह ने साल 1947 में एक संन्यासी के कहने पर पड़किया बनाने का काम शुरू किया था. पिता की मृत्यु के बाद गौरशंकर साह अपने चार भाइयो के साथ थावे के विदेशी टोला निवासी अपने मामा बुनिलाल साह के यहां रखकर मिठाई का कारोबार करने लगे.

शुरुआत में साह गांव-गांव में घूम कर गट्टा मिठाई बेचते थे. साथ ही ये स्टेशन के पास दुकान खोल कर मिठाई बेचते थे. स्वर्गीय गौरशंकर के स्वजन बातते है कि, एक दिन गौरी शंकर साह स्टेशन के पास स्थित अपने दुकान पर बैठे थे. तभी वहां पहुंचे एक संयासी साधु ने मिठाई खाने के लिए मांगा. मिठाई खाने के बाद साधु ने आर्शीवाद देते हुए हमेशा शुद्ध घी मिठाई बनाने की सलाह दिया. इसके बाद गौरीशंकर साह पड़किया बनाने लगे.

शुद्ध घी व खोआ से बनाई जाती है थावे की पड़किया

पौराणिक आस्था का केंद्र थावे दुर्गा मंदिर परिसर के पास थावे गोलंबर पर पहुंचे ही सबसे पहले निगाह सड़क किनारे गौरीशंकर की पड़किया नाम से लाइन से खुले पड़किया की दुकान पर पड़ेगी. स्वर्गीय गौरीशंकर साह के चार भाई थे. सबसे बड़े गौरीशंकर साह, जटा शंकर साह, शिवशंकर साह और विश्वनाथ साह थे.

इन चारों भाई के परिवार से करीब 100 सदस्य हैं. परिवार के लोगों ने बताया कि पड़किया बनाने काम लगभग 1947 से किया जा रहा है. इस परिवार की थावे में 12, गोपालगंज में 2, बड़हरिया में 2, सिवान में एक तथा पटना में पड़किया की एक दुकान है. उन्होंने बताया कि पड़किया शुद्ध खोवा और शुद्ध घी से बनाया जाता है. पड़किया में किसी प्रकार की कोई अन्य मिलावटी साम्रगी नहीं डाली जाती, जिससे उसकी मिठास बनी रहती है.

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