
Urdu Islamic Hijri Calendar 2026: Digital Hub
🌙 हिजरी पंचांग
चाँद की गणना पर आधारित यह कैलेंडर इबादत और मजहबी तारीखों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शुभ तिथियों के लिए: Paush Purnima 2026 Guide।
🕌 मुख्य त्यौहार
२०२६ में रमजान, ईद-उल-फितर और ईद-उल-जुहा की सटिक तारीखें यहाँ उपलब्ध हैं।
पंचांग २०२६: Mahalaxmi Calendar 2026।
💹 आर्थिक नियोजन
बरकत और बचत का मेल। २०२६ के बजट और सैलरी अपडेट का सटिक कैलकुलेटर यहाँ देखें:

चित्र: उर्दू इस्लामिक कैलेंडर २०२६—हिजरी १४४७-४८ का रूहानी प्रतिबिंब।
Islamic Succession & Ritual Map (TOC)
- इस्लामिक हिजरी कैलेंडर २०२६: एक रूहानी परिचय
- हिजरी सन १४४७-४८ की महत्वपूर्ण तारीखें और महीने
- रमजान २०२६ (Ramadan): रोजे और इबादत का शुभ समय
- ईद-उल-फितर और ईद-उल-जुहा २०२६ की सटिक गणना
- सपनों का रहस्य: चाँद और सितारों का स्वप्न शास्त्र फल
- बुजुर्गों की दुआ: नानी माँ की श्रद्धांजलि और पारिवारिक एकता
- २०२६ का राशिफल: क्या कहता है आपका सितारों का हाल?
- आर्थिक सुरक्षा: यूपी पेंशन और २०२६ का सरकारी बजट
- FAQ: हिजरी कैलेंडर से जुड़े ३० बड़े सवालों के जवाब
Urdu Islamic Hijri Calendar 2026: इबादत और सटिक गणना का संगम
21 जनवरी 2026—इस्लामी संस्कृति में समय की गणना चाँद (Moon Phases) के सटिक चक्र पर आधारित है। **Urdu Islamic Hijri Calendar 2026** (हिजरी संवत १४४७-४८) न केवल तारीखें बताता है, बल्कि यह हर मोमिन के लिए इबादत, जकात और रोजों की एक रूहानी मार्गदर्शिका है। २०२६ का यह वर्ष कई मायनों में ऐतिहासिक है, जहाँ रमजान और ईदों के शुभ संयोग बन रहे हैं। न्यूज़मग की इस विस्तृत गाइड में हम आपको हिजरी महीनों के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व (देखें: Rashifal 2026 Predictions) से अवगत कराएंगे।
आज की सटिक तिथि और शुभ मुहूर्त की गणना के लिए Lala Ramswaroop 2026 पंचांग का सटिक विश्लेषण किया गया है। गुरु कृपा (देखें: Shiva Mantra Power) और रूहानी दुआओं का मेल ही जीवन में बरकत लाता है।
1. २०२६ की प्रमुख इस्लामिक तारीखें (Hijri 1447-1448)
चाँद दिखने के आधार पर २०२६ में मुख्य त्यौहारों की संभावित तारीखें निम्नलिखित हैं। सटिक मुहूर्त के लिए Thakur Prasad 2026 का भी अध्ययन करें:
| त्यौहार (Festival) | हिजरी दिनांक | अंग्रेजी दिनांक २०२६ |
|---|---|---|
| रमजान प्रारंभ | १ रमजान १४४७ | १८ फरवरी २०२६ (संभावित) |
| ईद-उल-फितर | १ शव्वाल १४४७ | २० मार्च २०२६ |
| हज (अरफा का दिन) | ९ जिलहिज्ज १४४७ | २६ मई २०२६ |
| ईद-उल-जुहा (बकरीद) | १० जिलहिज्ज १४४७ | २७ मई २०२६ |
| इस्लामी नया साल | १ मुहर्रम १४४८ | १६ जून २०२६ |
| आशूरा | १० मुहर्रम १४४८ | २५ जून २०२६ |
2. सपनों का रहस्य: चाँद और रूहानियत (Dream Science)
इस्लामिक संस्कृति में सपनों (Khwab) को रूहानी पैगाम माना गया है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आप सपने में नया चाँद या सांपों का मिलन देखते हैं (देखें: Snake Dream Meaning), तो यह आपके जीवन में किसी बड़े बदलाव और खुदा की रहमत का संकेत है।
3. बुजुर्गों की सेवा और वंशावली संस्कार
कबीर पंथ की वंशावली (देखें: Vansh Guru Gaddi) और नानी माँ की श्रद्धांजलि (देखें: Nani Ji Shradhanjali) हमें सिखाती है कि बड़ों की दुआ से ही तक़दीर बदलती है। बुजुर्गों के लिए UP Pension 2026 जैसी योजनाओं की जानकारी देना एक नेक कार्य है। अकेलेपन को दूर करने के लिए पालतू तोता पालना भी रूह को सुकून देता है।
4. स्वास्थ्य, सुरक्षा और बजट २०२६
इबादत के लिए सेहत जरूरी है। नशे (जैसे: Tadi Impact या Ganja Warning) से दूर रहकर शरीर को पाक रखें। जैसे घर में जहर (देखें: Rat Poison Warning) से हिफाजत जरूरी है, वैसे ही रूह को गुनाहों से बचाना चाहिए। २०२६ के बजट (देखें: Budget 2026 News) के समय अपनी वित्तीय स्थिति का सटिक जायजा लें। नए घर में प्रवेश के लिए Griha Pravesh 2026 मुहूर्त सटिक हैं।
📥 Urdu Islamic Calendar 2026 PDF Download Link
आप नीचे दिए गए चमकीले बटन पर क्लिक करके २०२६ का आधिकारिक उर्दू इस्लामिक हिजरी कैलेंडर और महत्वपूर्ण तारीखों की PDF मुफ़्त में डाउनलोड कर सकते हैं।
Download Islamic Calendar 2026 ➔FAQ: हिजरी कैलेंडर २०२६ सवाल-जवाब
उत्तर: इस्लामिक नया साल (१ मुहर्रम १४४८) जून २०२६ के मध्य में चाँद दिखने के अनुसार शुरू होने की संभावना है।
उत्तर: शब-ए-बारात (१५ शाबान १४४७) फरवरी २०२६ के पहले सप्ताह में होने की उम्मीद है। सटिक जानकारी के लिए पीडीएफ देखें।
यह ऐतिहासिक लेख **Urdu Islamic Hijri Calendar 2026** उपलब्ध खगोलीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इस्लामिक तारीखें पूरी तरह से चाँद के दिखने (Moon Sighting) पर निर्भर करती हैं, इसलिए वास्तविक तारीखों में १-२ दिन का अंतर हो सकता है। न्यूज़मग किसी भी धार्मिक विसंगति के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। किसी भी विशेष इबादत या त्यौहार के लिए अपने स्थानीय इमाम या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।
