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Purab Paschim Uttar Dakshin: दिशाओं के नाम, महत्व और वास्तु नियम 2026

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Purab Paschim Uttar Dakshin Direction in Hindi: दिशाओं का सम्पूर्ण ज्ञान और वास्तु नियम

NewsMug की इस विस्तृत गाइड में जानें ४ मुख्य दिशाएं, ८ उप-दिशाएं और वास्तु शास्त्र के अनुसार उनका आपके जीवन पर प्रभाव।

Purab Paschim Uttar Dakshin Direction in Hindi: दिशाओं का ज्ञान मानव सभ्यता के लिए हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। चाहे वह समुद्र में रास्ता खोजना हो या घर का निर्माण करना हो, दिशाओं के बिना हम अधूरे हैं। हिंदू धर्म में दिशाओं को देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। इस लेख में हम भौगोलिक (Geographical) और वास्तु (Vastu) दोनों दृष्टिकोणों से दिशाओं का विश्लेषण करेंगे।

1. ४ मुख्य दिशाएं: पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण

ये आधारभूत दिशाएं हैं जो सूर्य की स्थिति के अनुसार निर्धारित की जाती हैं।

हिंदी नाम (Hindi Name)अंग्रेजी नाम (English)विशेषता (Significance)
पूर्व (Purab)Eastसूर्य उदय की दिशा, सकारात्मक ऊर्जा
पश्चिम (Paschim)Westसूर्य अस्त की दिशा, स्थिरता
उत्तर (Uttar)Northकुबेर की दिशा, सफलता का केंद्र
दक्षिण (Dakshin)Southयम की दिशा, भारी सामान रखने हेतु उत्तम

📚 NewsMug ज्ञान कोश: दिशा और जीवन का संबंध (Indexing Hub)

सही दिशा में कदम बढ़ाना ही सफलता की कुंजी है। इसी प्रकार, सही जानकारी प्राप्त करना जीवन में समृद्धि लाता है। नीचे दी गई कड़ियों के माध्यम से अपने ज्ञान को और बढ़ाएं:

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2. ८ उप-दिशाएं और उनके संस्कृत नाम

वास्तु शास्त्र में ४ मुख्य दिशाओं के कोनों (Corners) को ‘विदिशा’ या उप-दिशा कहा जाता है।

  • ईशान (North-East): उत्तर और पूर्व के बीच का कोना। यह देवताओं का स्थान है।
  • आग्नेय (South-East): दक्षिण और पूर्व के बीच का कोना। यह अग्नि का स्थान है।
  • नैऋत्य (South-West): दक्षिण और पश्चिम के बीच का कोना। यह पितरों का स्थान है।
  • वायव्य (North-West): उत्तर और पश्चिम के बीच का कोना। यह वायु का स्थान है।

3. दिशाएं पहचानने के ३ सबसे आसान तरीके

प्राचीन काल से ही दिशा पहचानने के कई तरीके रहे हैं, जो आज भी उतने ही सटिक हैं:

  1. सूर्य द्वारा: सुबह उगते सूर्य की ओर मुँह करके खड़े हों। आपके सामने पूर्व (East), पीछे पश्चिम (West), बाईं ओर उत्तर (North) और दाईं ओर दक्षिण (South) होगा।
  2. कंपास (Compass): चुंबकीय सुई हमेशा उत्तर दिशा की ओर संकेत करती है।
  3. ध्रुव तारा (Pole Star): रात के समय ध्रुव तारा हमेशा उत्तर दिशा में चमकता है।

4. वास्तु शास्त्र और दिशाओं का गहरा संबंध

वास्तु के अनुसार हर दिशा का अपना तत्व होता है। यदि आप नया घर बना रहे हैं या Griha Pravesh 2026 की योजना बना रहे हैं, तो दिशाओं का ध्यान रखें। घर की सुख-शांति के लिए 1000 रोचक तथ्य की तरह वास्तु के फैक्ट्स भी जानना जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. पूर्व दिशा को सबसे शुभ क्यों माना जाता है?
क्योंकि यहाँ से सूर्य का उदय होता है, जो ऊर्जा और जीवन का मुख्य स्रोत है।

Q2. क्या गूगल मैप्स से दिशा का सटिक पता चलता है?
हाँ, आधुनिक स्मार्टफोन में लगे जायरोस्कोप और जीपीएस की मदद से दिशाएं बहुत सटिकता से पहचानी जा सकती हैं।

Q3. वास्तु दोष दूर करने के लिए कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
मानसिक शांति और दोष निवारण के लिए आप श्री शिवाय नमस्तुभ्यं का जाप कर सकते हैं।

⚠️ महत्वपूर्ण सूचना एवं डिस्क्लेमर

यह लेख भौगोलिक और वास्तु मान्यताओं पर आधारित है। घर के निर्माण या वास्तु उपायों के लिए विशेषज्ञ वास्तु शास्त्री से परामर्श लें। NewsMug.in केवल शैक्षिक जानकारी साझा करता है। सभी इमेजेस और लिंक्स के अधिकार उनके मूल स्वामियों के पास सुरक्षित हैं।

KAMLESH VERMA

दैनिक भास्कर और पत्रिका जैसे राष्ट्रीय अखबार में बतौर रिपोर्टर सात वर्ष का अनुभव रखने वाले कमलेश वर्मा बिहार से ताल्लुक रखते हैं. बातें करने और लिखने के शौक़ीन कमलेश ने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से अपना ग्रेजुएशन और दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है. कमलेश वर्तमान में साऊदी अरब से लौटे हैं। खाड़ी देश से संबंधित मदद के लिए इनसे संपर्क किया जा सकता हैं।

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