
Shiv Sadhna : शिव साधना से पाएं असाध्य रोगों और कष्टों से मुक्ति
आदि शंकर शिव की महिमा से हर व्यक्ति परिचित है। शिव ही शक्ति है, सनातन धर्म के 64 करोड़ देवाताओं में शिव का अंश विराजमान है। शिव की महिमा का बखान शब्दों में कर पाना बेहद ही मुश्किल है। लेकिन यदि आप सच्चे मन से भगवान शिव की साधना करते हैं, तो आप असाध्य रोगों से मुक्ति पा सकते है। कारण वर्तमान समय में मानव भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में अपने स्वास्थय की उपेक्षा कर रहा है। अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हम अक्सर स्वास्थ्य को नजर अंदाज कर देते हैं। कई बार हम छोटी-मोटी बीमारियों को गंभीरता से नहीं लेते जिससे कि आगे चलकर वह बड़ी तथा गंभीर बीमारियों में बदल जाती हैं। आधुनिक युग में शायद ही कोई व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वस्थ्य हो। हमारे जीवन में कुल तीन तरह के दुःख होते हैं दैहिक, दैविक तथा भौतिक। मानव जीवन इन्हीं दुःखों से होकर गुजरता है।
इस रोचक पोस्ट के जरिए हम आपकों बतायेंगे कि भगवान शिव की साधना कर हम किस प्रकार अपनी बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं। साथ ही इन इन उपायों को करने से भगवान शिवजी की असीम कृपा से हमारे सारे दुःख दूर हो जाते हैं। तो आइये भगवान शंकर का स्मरण करते हुए शिव साधना पोस्ट की शुरूआत करते हैं।

Shiv Sadhna : साधारण रोग-मुक्ति के लिये :-
दूर्वा सत मतलब कि, देशी घास जो हमारे आस-पास में बगीचों या उद्यान में उगी होती है। इसे पहचान कर अपने घर ले आएं। जिसके बाद करीब 2 लीटर पानी में अच्छे से कम-से-कम 5 मिनट तक धीमी आंच पर उबालें। जब दूर्वा अच्छे से उबल जाए और पानी का रंग हरा हो जाए तो उसे ठंडा कर छानकर किसी बर्तन में रख लें।
छने हुए जल को सुबह रोगी का हाथ लगवाकर समीप के मंदिर में जाकर शिव पिण्डी पर चढ़ाए। जिसके बाद गंगा जल से पिण्डी को स्नान कराए। धूप-दीप अर्पित करके शिव जी से रोगमुक्ति के लिए निवेदन करें। यह क्रिया 11 दिन करें शिवजी की कृपा से अवश्य लाभ होगा।
Shiv Sadhna : बुखार के लिये :-
वायरल, बुखार हर मौसम में होना आम बीमारी है। यदि आपके परिवार में भी कोई वायरल बुखार से पीड़ित है, तो आपकों गिलोय का सत मतलब कि, गिलोय तरल रूप में बनाना होगा। इन दिनों बाजार में गिलोय का रस आसानी से उपलब्ध हो जाता है। तीन ढक्कन या तीन बड़ें चम्मच गिलोय का रस एक-डेढ़ लीटर में मिला लें। सुबह-सुबह रोगी का हाथ लगवाकर उसे शिव पिण्डी पर चढ़ा दें। जब पिण्डी पर गिलोय का रस अर्पित कर रहे हों तो उस समय महामृत्युंजय मंत्र –
“ऊं त्रयंबकम यजामहे सुगन्धिम पुष्टिवर्धनम् उर्वारूकमिव बन्धनान् मृर्त्योमुक्षीय मामृतात्।”
का सच्चे मन से जाप करें। इस उपाय को 11 दिन तक लगातार करें अवश्य ही लाभ होगा।
Shiv Sadhna : कैंसर से निदान के लिये :-
कैंसर एक लाइलाज बीमारी है। इस रोग से निदान पाने के लिए आपकों, गुलाब की पंखुड़ियां पांच अंजुलि ( अंजुलि मतलब जिससे हम भगवान को पुष्प आदि अर्पित करते हैं) के भरकर लें। या एक मुठ्ठी ज्यादा नहीं थोड़ी-थोड़ी ही लें लें। शाम के समय भगवान शिव मन्दिर में जाकर एक माला त्रयंबकम मंत्र की जाप करें। जिसके बाद एक अंजलि भरकर शिवलिंग पर पुष्प अर्पित करें।
जिसके बाद दोबारा एक माला करें। फिर गुलाब के पुष्प अर्पित करें। इस तरह कुल 5 माला करनी हैं। साथ ही 5 अंजलि पुष्प शिव पिण्डी पर अर्पित करना होगा। यह बेहद ही चमत्कारी तथा सिद्ध उपाय है। एक कटोरी में जल भर लें उसमें थोड़ा सा गंगा जल मिला लें। रूद्राक्ष की माला लेकर पांच माला महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। जिसके बाद उस कटोरी में भर जल को देखते हुये 21 बार इसी मंत्र का जाप करें तथा रोगी को पिला दें ऐसा लगातार 21 दिन तक करें। वे लोग जो छोटी-छोटी बीमारियों से पीड़ित हैं किन्तु लंबे समय से परेशान हैं। वे भगवान शिव पर एक लोटा जल चढ़ायें तथा एक मंत्र पढ़े। मंत्र इस प्रकार है –
दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, राम राज नहीं काहुहि व्यापा।
दोस्तों उपरोक्त उपायों से हम अपनी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त जो भी आप मेडिकल ट्रीटमेंट ले रहे हैं उनको भी लेते रहिए। दोस्तों! भक्ति हमारे जीवन में हर्ष, उल्लास तो लाती ही है इसके अतिरिक्त हमें मानसिक शान्ति भी प्रदान करती है। आपने देखा होगा कि कभी-कभी डॉक्टर भी कहते हैं कि इन्हें दवाओं की नहीं दुआओं की जरूरत है क्योंकि हमारी मेडिकल साइंस भी अध्यात्म को नहीं नकारती ।
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