Newsधर्म

हिमाचल के मंदिर | Himachal Ke Mandir

हिमाचल के मंदिर | Himachal Ke Mandir

हिमाचल के मंदिर | Himachal Ke Mandir

देव भूमि का दर्जा प्राप्त हिमाचल प्रदेश से पूरा विश्व परिचित है। हिमाचल को देवभूमि का दर्जा इतनी आसानी से नहीं मिला है। अपितु सच में इस प्रदेश में हर हिन्दू देवी और देवताओं के चमत्कारी मंदिर मौजूद है। जिनकी महिमा से हर हिंदू इंसान परिचित है। पूरे हिमाचल की वादियों में विशेष हिंदू मंदिर मौजूद है, जो हर साल इस प्रकृति के स्वर्ग में आने वाले पर्यटकों की नज़र में धार्मिक और भावनात्मक मूल्य रखते हैं।

हम हमेशा से सुनते आए हैं कि, “देव भूमि” के रूप में वर्णित – (देवताओं का निवास), हिमाचल प्रदेश में अनेकों हिंदू मंदिर मौजूद है। यहां के हजारों मंदिरों और मठों के साथ-साथ कई अन्य धार्मिक केंद्र लोगों की आस्था के केंद्र हैं। यह वह स्थान है जहां तीर्थयात्रा और शुद्ध प्रकृति सौंदर्य दोनों पूर्ण सामंजस्य देखते ही बनता हैं।

राजसी हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों, ग्लेशियरों और शानदार पर्वतमालाओं से घिरा, हिमाचल देवताओं का प्राकृतिक घर मालूम पड़ता है। हिमाचल में 2000 या उससे अधिक मंदिर होने का दावा हिमाचली लोगों द्वारा किया जाता है।

चंबा, कांगड़ा, मणिकरण, धर्मशाला, पांवटा साहिब, शिमला, बिलासपुर और कुल्लू, देश और विदेश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिवर्ष लाखों पर्यटक को आकर्षित करने वाले लोकप्रिय तीर्थ स्थान हैं।

देव भूमि हिमाचल को भगवान शिव के ससुराल के नाम से भी जाना जाता है, कारण आदि शंकर शिव ने राजा हिमाचल की बेटी पार्वती से विवाह किया था। आइये पोस्ट के जरिए हम आपकों हिमाचल में कुछ प्रमुख मंदिरो के बारे में बताते है जिनके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए :-

 

नैना देवी मंदिर Naina Devi Mandir Bilaspur

हिमाचल के बिलासपुर जिले में मौजूद यह मंदिर प्रतिवर्ष लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। कारण लोक किवदंति हैं कि, यह उन स्थानों में से एक है जहां देवी सती का एक शरीर का अंग गिरा था और उस अंग का नाम उनके नयन थे। इसलिए इस शक्तिपीठ को नयना देवी मंदिर के नाम से महत्वता मिली है।

ज्वालामुखी मंदिर Jwaladevi mandir Kangra

जैसा कि नाम से विधित है कि,  इस मंदिर में किसी देवी की मूर्ति की पूजा नहीं होती है। वरन, चट्टान से ज्वाला निकलती है, उसे देवी ज्वालाजी की उपमा दी गई है, उनकी पूजा की जाती है। ज्वालामुखी मंदिर काली धार नामक एक पहाड़ी पर मौजूद है, जो कांगड़ा से काफी नजदीक हैं।

चामुंडा मंदिर Chamunda Devi mandir

‘चामुंडा’ नाम चण्ड और मुंड नामक राक्षश का वध करने वाली देवी को समर्पित है। ऊँची धौलाधार पर्वतमाला के समक्ष, यह मनमोहक स्थान बाण गंगा नदी के किनारे पर 1000 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। मंदिर परिसर में एक पवित्र कुंड मौजूद जहां देवी भक्त पवित्र डुबकी यानी की स्नान करते हैं।

इसी के चलते माता दुर्गा का एक रूप चामुंडेश्वरी को समर्पित है, इस स्थान के धार्मिक महत्व को किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है। यहाँ आने वाले भक्त इस तीर्थ स्थल में गहन आस्था रखते है और नवरात्रों में यहाँ विशेष अनुष्ठान किए जाते है। नवरात्री के दौरान यहां पहुंचने वाले भक्तों की संख्या 10 लाख के पार हो जाती है।

बैजनाथ मंदिर

आदि देव महादेव का यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, इसलिए महाशिवरात्रि के दौरान यहां पर लाखों की तादाद में शिव भक्त पहुंचते है। मंदिर की भीतरी दीवारों पर शिलालेख के रूप में साक्ष्य बताते हैं कि कांगड़ा घाटी में मंदिर 13 वीं शताब्दी में बनाया गया था। लोक मान्यता है कि, इस मंदिर के अन्दर रखा हुआ शिवलिंग रावण द्वारा लाया गया है।

बजरेश्वरी देवी Kangra Devi Mandir

हिमाचल प्रदेश का एक और मंदिर जो शक्तिपीठों में प्रमुख स्थान पर है, यह मंदिर कांगड़ा शहर के बीचो बीच स्थित हैं और इसलिए हर साल पर्यटकों की अधिकतम संख्या को आकर्षित करता है।

एक लोक कथा के अनुसार देवी सती ने अपने पिता के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान करने पर अपनी देह का अंत यज्ञ में कुदकर किया था। भगवान शिव ने माता सती के शरीर को अपने कंधे पर उठा लिया और तांडव शुरू किया था और लोक परलोक में घूमने लगे।

भगवान शिव को इस वियोग से बहार लेन के लिए और दुनिया को नष्ट करने से रोकने के लिए भगवान विष्णु ने सती के शरीर को अपने चक्र से 51 भागों में विभाजित किया। इस स्थान पर सती का बायां स्तन गिरा, जिससे यह शक्तिपीठ बन गया।

मूल मंदिर महाभारत के समय पांडवों द्वारा बनाया गया था। कथा यह भी है कि एक दिन पांडवों ने अपने सपने में देवी दुर्गा को देखा जिसमें उन्होंने उन्हें बताया कि वह नगरकोट गांव में स्थित हैं और यदि वे खुद को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो उन्हें उस क्षेत्र में उनके लिए एक मंदिर बनाना चाहिए अन्यथा वे नष्ट हो जाएंगे।

उसी रात उन्होंने नगरकोट गांव में उसके लिए एक भव्य मंदिर बनाया गया था। इस मंदिर को मुस्लिम आक्रमणकारियों ने कई बार लूटा था।

मोहम्मद गजनवी ने इस मंदिर को कम से कम 5 बार लूटा, लूटने से पूर्व इस मंदिर में कई टन सोना और शुद्ध चांदी से बने कई घंटे होते थे जिसको लूट लिया गया था। 1905 में एक शक्तिशाली भूकंप से मंदिर नष्ट हो गया था और बाद में सरकार द्वारा इसका पुनर्निर्माण किया गया था। इसी मंदिर को काँगड़ा देवी मंदिर भी कहा जाता है

हिडिम्बा मंदिर मनाली Hidimba Mandir Manali

यदि आपने महाभारत नहीं पढ़ी तो आपकों बता दूं कि, हडिम्बा भीम की पत्नी थी और मान्यता है कि, उन दोनों ने अपने विवाह के एक का एक वर्ष ढुंगरी में बिताया था। बाद में, अपने बेटे को पालने के बाद, हडिम्बा ने यहाँ बसने और ध्यान करने का फैसला किया। शिवालय शैली का मंदिर जो अब उस स्थान पर खड़ा है, 16वीं सदी का माना जाता है। मनाली आने वाले पर्यटकों के लिए यह मंदिर आस्था का केंद्र है। देवदारों के पेड़ों के बीच बसा यह मंदिर आज भी महाभारत काल का वर्णन करता है।

लक्ष्मी नारायण मंदिर Lakshmi Narayan Mandir Chamba

माना जाता है कि यह मंदिर 10 वीं शताब्दी में बनाया गया था, यह भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित है। चंबा में हर साल कई तीर्थयात्री आते हैं जो इस मंदिर में पूजा करना चाहते हैं।

जाखू मंदिर Jakhu Mandir Shimla

झाकू मंदिर का यह नाम इसलिए पड़ा कारण यह राजधानी शिमला से 2 किलोमीटर दूर झाकू पहाड़ी के शिखर पर मौजूद है। मंदिर को ऋषि याकू ने भगवान हनुमान को सम्मानित करने के लिए बनवाया था। हिमालय पर संजीवनी बूटी लेने जाते हुए हनुमान जी यहाँ कुछ पल ठहरे थे और उनकी भेट ऋषि जाखू से हुई थी।

तारा देवी मंदिर Tara Devi mandir Shimla

तारा देवी मंदिर शिमला से कालका को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर शिमला से 10 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। मंदिर एक पहाड़ी के शिखर यानी चोटी पर मौजूद है। जिसे 250 साल पहले सेन राजवंश के राजा भूपेंद्र सेन द्वारा निर्मित करवाया गया था।  देवी तारा के देवता को उस समय पश्चिम बंगाल से लाया गया था।

चिंतपूर्णी मंदिर Chintpurni Mandir Una Himachal

‘चिंतपूर्णी’ शब्द का मूल अर्थ है कि, यदि कोई भक्त सच्ची श्रद्धा और पूरे दिल से प्रार्थना करता है, तो उसकी सारी चिंताएं स्वत: ही समाप्त हो जाएगी। जिले के इस मंदिर की गिनती 51 शक्तिपीठों में भी होती है।

हिमाचल प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक चिंतपूर्णी मंदिर है। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में इसी नाम के एक गांव में 940 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, मंदिर माता चिंतपूर्णी देवी को समर्पित है- देवी जो चिंता को ख़तम करती है और देवी जो सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं। देवी को भगवती छिन्नमस्तिका (बिना सिर वाली देवी) के नाम से भी जाना जाता है।

माता चिंतपूर्णी का मंदिर हिंदू किंवदंतियों के मिथकों से जुड़ा है। ऐसा माना जाता है कि कालिया सारस्वत ब्राह्मण पंडित माई दास ने कई सदियों पहले छपरोह गांव में इस मंदिर की स्थापना की थी। समय के साथ, मंदिर को चिंतपूर्णी के नाम से जाना जाने लगा। ऐसा माना जाता है कि ब्राह्मण के वंशज अभी भी शहर में रह रहे हैं और मंदिर के आधिकारिक पुजारी हैं।

940 मीटर की ऊंचाई पर, मंदिर सोलह सिंघी धार की सबसे ऊंची चोटियों में से एक पर स्थित है। एक घुमावदार सड़क जिसके किनारों पर दुकानें हैं मंदिर तक जाती हैं। भक्त देवी के दर्शन के लिए कतार में खड़े रहते हैं जिनकी मूर्ति मंदिर के गर्भ गृह में पिंडी (एक गोल पवित्र पत्थर) के रूप में स्थापित है।

यह देवी मंदिर भारत में 7 प्रमुख और कुल 51 शक्तिपीठों में से एक है (जहां सती के शरीर के कुछ हिस्से गिरे थे) और पूरे साल देश भर से हजारों भक्तों को आकर्षित करते हैं। माना जाता है कि सती के पैर चिंतपूर्णी में गिरे थे। देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त सदियों से इस शक्तिपीठ में अपनी प्रार्थना और प्रसाद चढ़ाने और देवी से आशीर्वाद लेने के लिए आते रहे हैं।

अगस्त में “शुक्लपक्ष” के 10 दिवसीय मेले के अलावा, जुलाई, अक्टूबर और मार्च-अप्रैल में नवरात्र मेले के साथ-साथ संक्रांति, पूर्णिमा और अष्टमी के दिन भी भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं, जो इन दिनों इस पवित्र स्थान पर आते हैं देवी का आशीर्वाद लेने के लिए , माँ उनकी मनोकामना पुराण होने का आशीर्वाद देती हैं।

मणिकरण मंदिर Manikaran Kullu

पार्वती नदी के तट पर विशाल मंदिर से उठने वाली भाप के साथ, मणिकरण अपने गर्म झरनों के लिए प्रसिद्ध है और सिखों और हिंदुओं के लिए एक साँझा महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान है। मणिकरण शब्द का अर्थ है ‘कान का कुण्डल’ – स्थानीय जनश्रुतियों की मानें तो,  एक विशालकाय सांप ने स्नान करते समय पार्वती से बालियां चुरा लीं, जिसके बाद बालियों को धरती में गाड़ दिया था।

मणिकरण में गरम पानी के छोटे छोटे तालाब है। पानी इतना गर्म होता है की जमीन से निकलने वाला पानी चावल उबालने के लिए पर्याप्त गर्म होता है (94 डिग्री सेंटीग्रेड तक) और इसे नहाने के लिए नदी के पानी से ठंडा करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह गठिया से लेकर ब्रोंकाइटिस तक जैसे असाध्य रोगों को ठीक करने की क्षमता रखता है।

गुरुद्वारे में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग सुविधाओं के साथ स्नानागार हैं, जिसमें पानी को सहन करने योग्य तापमान तक ठंडा किया जाता है। मणिकरण में कई मंदिर भी हैं, जिनमें पत्थर की झोपड़ी-शैली रघुनाथ मंदिर, और अलंकृत लकड़ी के नैनी देवी मंदिर शामिल हैं। गुरुद्वारे में आप लंगर में खाना खाने की व्यवस्था इसी गरम पानी से त्यार होता है जो अद्भुत है।

पांवटा साहिब गुरुद्वारा Paonta Sahib Gurdwara

यह हिमाचल प्रदेश का सबसे प्रसिद्ध और आस्थावान तीर्थ में से एक है।  पांवटा साहिब में एक विशाल गुरुद्वारा हिमाचल में बनाया गया है । ऐसा माना जाता है कि दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह यहां चार साल से अधिक समय तक रहे थे।

भागसू नाग मंदिर Bhagsu Nag Mandir Mcleodganj

मैक्लोडगंज टाउन से सिर्फ 3 किमी दूर एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल, भागशु नाग, एक शिव मंदिर है जो शिव भक्तों के आस्था का केंद्र है। प्रतिवर्ष सावन माह में यहाँ लाखों श्रद्धालु आते है। धर्मशाला से 8 किमी की ऊँचाई पर स्थित एक मठ बौद्ध धर्म और दलाई लामा के अनुयायियों के लिए हिमाचल में प्रसिद्ध तीर्थ स्थानों में से एक है।

बिजली महादेव मंदिर Bijli Mahadev Mandir Kullu

हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में 2,438 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, बिजली महादेव न केवल इस क्षेत्र में बल्कि भारत में भी सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है और भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर कुल्लू से लगभग 11 किमी की दूरी पर है और भक्तों को मंदिर तक चढ़ने के लिए मंसारी गांव से तीन किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। पहाड़ी की चोटी पर मंदिर स्थल से, नीचे कुल्लू और पार्वती घाटियों के शानदार मनोरम दृश्य का आनंद लिया जा सकता है।

मंदिर अपने 60 फीट ऊंचे फ्लैगपोल के लिए जाना जाता है जो कुल्लू शहर से भी दिखाई देता है। यह ऊंची संरचना कभी-कभी इसे अपनी ओर खींचती है और ऐसा कहा जाता है कि आकाशीय बिजली शिवलिंग को हर बार टकराकर टुकड़े-टुकड़े कर देती है। हालांकि, हर बार हल्का होने के बाद पुजारी इसे मक्खन और नमक (भुने हुए चने और गेहूं के पाउडर का मिश्रण) की मदद से फिर से मिलाते हैं। इस घटना के कारण ही मंदिर का नाम बिजली (बिजली) महादेव (भगवान शिव) रखा गया है।

मंदिर के बहार नंदी बैल (भगवान शिव का वाहन) की दो मूर्तियाँ बिजली महादेव मंदिर के प्रवेश द्वार को सुशोभित करती हैं। मंदिर के चौखटों को प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया है। मंदिर के अंदर एक पत्थर का शिव-लिंग है जहां भक्त पूजा करते हैं और इसी शिवलिंग को बिजली महादेव कहते है

बाबा बालक नाथ मंदिर Baba balaknath Mandir Deotsidh

बाबा बालक नाथ मंदिर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के धौलागिरी पहाड़ियों में ‘दियोटसिद्ध ‘ नामक पहाड़ी की चोटी पर एक गुफा मंदिर है। मंदिर, जिसे स्वयं दियोटसिद्ध के नाम से जाना जाता है, यह मंदिर एक हिंदू गुरु बाबा बालक नाथ जी को समर्पित है, जिन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। बाबा बालक नाथ जी को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त है कि वे हमेशा 13 वर्ष के रहेंगे। इसलिए देवता को बाबाजी के नाम से जाना जाता है।

मंदिर की प्राकृतिक नक्काशीदार गुफा को बाबा का निवास माना जाता है। महिलाओं को गुफा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। इसके बजाय वे गुफा के ठीक सामने एक ऊंचे चबूतरे से बाबाजी की मूर्ति को देख सकते हैं।

इस प्रसिद्ध तीर्थ स्थान पर साल भर भारत और विदेशों से लाखों तीर्थयात्री आते हैं। बाबाजी की व्यापक रूप से उत्तरी भारतीय राज्यों में पूजा की जाती है, विशेष रूप से पंजाब और हिमाचल प्रदेश में, और आम तौर पर पूरे भारत और विदेशों में भी।

भक्त इस पवित्र स्थान पर विशेष रूप से नवरात्रों के दौरान बाबा जी का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं, जिनकी मूर्ति प्राकृतिक गुफा में स्थित है। वे बाबाजी की वेदी पर ‘रोट’ (मीठी मोटी रोटी) चढ़ाते हैं, जो गेहूं के आटे और गुड़ (गुड़) से तैयार की जाती है। भक्त जिनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, वे देवता को बकरे की बलि चढ़ाते हैं, लेकिन बलि के रूप में नहीं बल्कि धन्यवाद के भाव ( बकरे को मारा नहीं जाता बल्कि खुला छोड़ दिया जाता है ) के रूप में। संक्रांति और रविवार को मंदिर में भक्तों की एक अलग संख्या देखी जा सकती है।

मंदिर से सिर्फ चार किलोमीटर आगे, शाहतलाई नामक एक छोटा सा गांब स्थित है जहाँ बाबा जी “माता रत्नो” की गायों को चराने के साथ-साथ ध्यान का अभ्यास करते थे।


KAMLESH VERMA

दैनिक भास्कर और पत्रिका जैसे राष्ट्रीय अखबार में बतौर रिपोर्टर सात वर्ष का अनुभव रखने वाले कमलेश वर्मा बिहार से ताल्लुक रखते हैं. बातें करने और लिखने के शौक़ीन कमलेश ने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से अपना ग्रेजुएशन और दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है. कमलेश वर्तमान में साऊदी अरब से लौटे हैं। खाड़ी देश से संबंधित मदद के लिए इनसे संपर्क किया जा सकता हैं।

Related Articles

DMCA.com Protection Status
चुनाव पर सुविचार | Election Quotes in Hindi स्टार्टअप पर सुविचार | Startup Quotes in Hindi पान का इतिहास | History of Paan महा शिवरात्रि शायरी स्टेटस | Maha Shivratri Shayari सवाल जवाब शायरी- पढ़िए सीकर की पायल ने जीता बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड सफल लोगों की अच्छी आदतें, जानें आलस क्यों आता हैं, जानिएं इसका कारण आम खाने के जबरदस्त फायदे Best Aansoo Shayari – पढ़िए शायरी