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Home - Movies Review - Kaun Tha Rahman Dakait: वह गैंगस्टर जिसने अपनी ही माँ का गला रेंता! ‘धुरंधर’ के विलेन की रोंगटे खड़े करने वाली असली कहानी
Movies Review KAMLESH VERMABy KAMLESH VERMA

Kaun Tha Rahman Dakait: वह गैंगस्टर जिसने अपनी ही माँ का गला रेंता! ‘धुरंधर’ के विलेन की रोंगटे खड़े करने वाली असली कहानी

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Kaun Tha Rahman Dakait
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  • Kaun Tha Rahman Dakait: वह गैंगस्टर जिसने अपनी ही माँ का गला रेंता! ‘धुरंधर’ के विलेन की रोंगटे खड़े करने वाली असली कहानी
    • भाग 1: ल्यारी की गलियां और जुर्म की विरासत (Early Life)
      • बचपन में ही लग गया खून का चस्का
    • भाग 2: वह काली रात, जब बेटा बना माँ का कातिल (The Horrific Crime)
      • शक ने बनाया हैवान
    • भाग 3: ल्यारी गैंगवार और ‘कटे सिरों से फुटबॉल’
      • हैवानियत की हदें पार
    • भाग 4: पीपुल्स अमन कमेटी और ‘रॉबिनहुड’ वाली छवि
      • राजनीति और अपराध का गठजोड़
    • भाग 5: ‘धुरंधर’ पुलिसवाला और एनकाउंटर (The End of Rahman Dakait)
      • 9 अगस्त 2009: आखिरी अध्याय
      • विवाद और जनाजा
    • भाग 6: फिल्म ‘धुरंधर’ और रील vs रियल
    • निष्कर्ष: अपराध का कोई ‘हीरो’ नहीं होता
    • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Kaun Tha Rahman Dakait: वह गैंगस्टर जिसने अपनी ही माँ का गला रेंता! ‘धुरंधर’ के विलेन की रोंगटे खड़े करने वाली असली कहानी

Rahman Dakait Real Story in Hindi: सिनेमा के पर्दे पर जब कोई विलेन आता है और अपनी क्रूरता से नायक की नाक में दम करता है, तो हम अक्सर सोचते हैं कि यह सिर्फ एक कहानी है। लेकिन, इतिहास के पन्नों में कुछ ऐसे नाम दर्ज हैं, जिनकी हकीकत किसी भी हॉरर फिल्म से ज्यादा डरावनी है। ऐसा ही एक नाम है—रहमान डकैत (Rahman Dakait)।

साल 2025 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) में अभिनेता अक्षय खन्ना (Akshaye Khanna) ने जिस किरदार को जीवंत किया है, वह कोई काल्पनिक पात्र नहीं, बल्कि पाकिस्तान के कराची शहर का एक ऐसा गैंगस्टर था, जिसके नाम से कभी पूरा शहर कांपता था। एक ऐसा अपराधी जिसे कुछ लोग ‘भाई’ और ‘सरदार’ कहते थे, तो कुछ उसे साक्षात ‘यमराज’ मानते थे।

आज के इस विस्तृत लेख में, हम NewsMug आपको रहमान डकैत के जीवन के उन पन्नों को पलटकर दिखाएंगे, जिन पर सिर्फ खून के धब्बे हैं। 13 साल की उम्र में पहला कत्ल करने से लेकर अपनी सगी माँ की हत्या करने तक, और फिर पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने तक—यह कहानी आपको अंदर तक झकझोर देगी।


भाग 1: ल्यारी की गलियां और जुर्म की विरासत (Early Life)

रहमान डकैत का असली नाम सरदार अब्दुल रहमान बलोच (Sardar Abdul Rehman Baloch) था। उसका जन्म सन 1980 में कराची, पाकिस्तान के सबसे पुराने और घनी आबादी वाले इलाके ल्यारी (Lyari) में हुआ था।

Kaun Tha Rahman Dakait

ल्यारी को कराची का ‘कोलंबिया’ भी कहा जाता है। संकरी गलियां, गरीबी, बेरोजगारी और ड्रग्स का काला कारोबार—यही ल्यारी की पहचान थी। रहमान का जन्म जिस परिवार में हुआ, वहां अपराध कोई नई बात नहीं थी। उसके पिता और चाचा (दाद मोहम्मद और शेर मोहम्मद) पहले से ही इलाके के कुख्यात ड्रग तस्करों और गैंगस्टर्स के साथ जुड़े हुए थे।

बचपन में ही लग गया खून का चस्का

कहते हैं कि बच्चे के पहले स्कूल उसका घर होता है। रहमान के लिए उसका घर और मोहल्ला ही अपराध की पाठशाला बन गया। जहां दूसरे बच्चे खिलौनों से खेलते थे, वहां रहमान हथियारों और नशीले पदार्थों के बीच बड़ा हो रहा था।

पुलिस रिकॉर्ड्स और स्थानीय जानकारों के मुताबिक, रहमान ने अपना पहला मर्डर महज 13 साल की उम्र में कर दिया था। यह एक मामूली झगड़ा था, लेकिन रहमान ने चाकू मारकर सामने वाले की जान ले ली। यह उसके लिए जुर्म की दुनिया का ‘प्रवेश द्वार’ था। इसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।


भाग 2: वह काली रात, जब बेटा बना माँ का कातिल (The Horrific Crime)

रहमान डकैत के जीवन का सबसे विवादित और रूह कंपा देने वाला किस्सा उसकी माँ, खदीजा बीबी की हत्या का है। यह घटना आज भी ल्यारी की लोककथाओं में एक खौफनाक याद की तरह जिंदा है।

रहमान जब अपराध की दुनिया में अपनी पैठ बना रहा था, तो उसे हर किसी पर शक होने लगा था। उसे लगने लगा था कि पुलिस को उसकी हर पल की खबर मिल रही है। उसका शक अपनी ही माँ पर गया।

शक ने बनाया हैवान

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय गवाहों के अनुसार, रहमान को शक था कि उसकी माँ का संबंध उसके किसी दुश्मन गैंग से है या वह पुलिस की मुखबिर बन गई है। यह शक इतना गहरा गया कि खून के रिश्ते भी फीके पड़ गए।

कहा जाता है कि एक रात रहमान ने अपनी माँ को गोली मार दी। लेकिन उसका गुस्सा यहीं शांत नहीं हुआ। किंवदंतियों के मुताबिक, गोली मारने के बाद उसने अपनी माँ का गला रेत दिया। हालांकि, बाद में इस कहानी को दबाने की कोशिश की गई और पुलिस फाइलों में इसे गैंगवार या पारिवारिक विवाद का नाम दिया गया, लेकिन इस घटना ने अंडरवर्ल्ड में यह संदेश दे दिया कि “जो अपनी माँ का नहीं हुआ, वह किसी का नहीं हो सकता।”



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भाग 3: ल्यारी गैंगवार और ‘कटे सिरों से फुटबॉल’

2000 का दशक आते-आते रहमान डकैत ल्यारी का बेताज बादशाह बनने की होड़ में शामिल हो गया था। लेकिन उसका रास्ता साफ़ नहीं था। उसके सामने था एक और खूंखार गैंगस्टर—अरशद पप्पू (Arshad Pappu)।

रहमान डकैत और अरशद पप्पू के बीच की दुश्मनी को कराची के इतिहास की सबसे खूनी गैंगवार माना जाता है। यह वर्चस्व की लड़ाई थी। ड्रग्स के धंधे पर कब्ज़ा, फिरौती और इलाका—सब कुछ दांव पर था।

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हैवानियत की हदें पार

इस गैंगवार में दोनों तरफ से सैकड़ों लोग मारे गए। लेकिन रहमान का तरीका सबसे अलग और क्रूर था। वह अपने दुश्मनों के दिलों में खौफ पैदा करना जानता था।
एक बहुत प्रचलित और डरावनी घटना यह बताई जाती है कि रहमान डकैत ने अपने विरोधी गैंग के एक सदस्य को पकड़ा, उसका सिर धड़ से अलग किया और फिर उस कटे हुए सिर के साथ उसके गुर्गों ने सड़क पर फुटबॉल खेला।

हालांकि, इस घटना के प्रमाणिक सबूत मिलना मुश्किल हैं, लेकिन उस दौर में कराची के अखबारों की सुर्खियों और लोगों की जुबां पर ऐसी कहानियां आम थीं। फिल्म ‘धुरंधर’ में भी उसकी इसी क्रूरता की झलक दिखाई गई है।


भाग 4: पीपुल्स अमन कमेटी और ‘रॉबिनहुड’ वाली छवि

गैंगस्टर्स का एक ही असूल होता है—अगर लंबे समय तक राज करना है, तो जनता को अपने साथ मिला लो। रहमान डकैत भी यह बात बखूबी जानता था। अपनी क्रूर छवि को संतुलित करने के लिए उसने 2008 में ‘पीपुल्स अमन कमेटी’ (PAC – Peoples Aman Committee) की स्थापना की।

राजनीति और अपराध का गठजोड़

PAC का ऊपरी मकसद था ल्यारी में शांति बनाए रखना और लोगों की समस्याओं को सुलझाना। रहमान ने अपने ड्रग्स और फिरौती के धंधे से कमाए गए पैसों का एक हिस्सा गरीबों में बांटना शुरू कर दिया।

  • वह गरीबों की बेटियों की शादी करवाता।
  • बीमारों के इलाज का खर्च उठाता।
  • बेरोजगारों को काम (अक्सर अपने गैंग में) देता।

देखते ही देखते, वह खूंखार कातिल वहां के स्थानीय लोगों के लिए ‘सरदार’ और ‘भाई’ बन गया। लोग उसके पास पुलिस के बजाय अपनी शिकायतें लेकर जाने लगे। ल्यारी की गलियों में उसे एक ‘रॉबिनहुड’ की तरह देखा जाने लगा। लेकिन हकीकत यह थी कि PAC के जरिए वह अपनी काली कमाई को सफेद कर रहा था और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर रहा था।


भाग 5: ‘धुरंधर’ पुलिसवाला और एनकाउंटर (The End of Rahman Dakait)

हर कहानी का अंत होता है, और अपराधी की कहानी का अंत अक्सर गोली पर ही होता है। रहमान डकैत के पाप का घड़ा भर चुका था। कराची पुलिस और प्रशासन के लिए वह सिरदर्द बन चुका था। ऐसे में एंट्री हुई कराची पुलिस के सबसे निडर और सख्त अधिकारी—एसएसपी चौधरी असलम खान (SSP Chaudhry Aslam Khan) की।

चौधरी असलम को ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ कहा जाता था। उन्होंने कसम खाई थी कि वे ल्यारी को गैंगस्टर्स से मुक्त कराएंगे। रहमान डकैत और चौधरी असलम के बीच चूहे-बिल्ली का खेल लंबा चला। रहमान अक्सर पुलिस को चकमा देकर अपनी सुरक्षित पनाहगाहों (Safe houses) में छिप जाता था, जहां तक पुलिस का पहुंचना नामुमकिन था क्योंकि स्थानीय लोग उसके लिए ‘मानव ढाल’ बन जाते थे।

9 अगस्त 2009: आखिरी अध्याय

आखिरकार, वह दिन आ ही गया। 9 अगस्त 2009 की रात। पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि रहमान डकैत अपने कुछ साथियों के साथ कराची के स्टील टाउन इलाके के पास से गुजरने वाला है।

एसएसपी चौधरी असलम की टीम ने जाल बिछाया। पुलिस के मुताबिक, जब रहमान की गाड़ी को रोकने की कोशिश की गई, तो वहां से गोलीबारी शुरू हो गई। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां बरसाईं।
कुछ ही देर में, ल्यारी का ‘सरदार‘ और अपनी माँ का ‘कातिल’ रहमान डकैत अपने तीन साथियों (नजीर बलोच, औरंगजेब और अकील) के साथ खून से लथपथ पड़ा था।

विवाद और जनाजा

रहमान की मौत के बाद ल्यारी में दंगे भड़क उठे। उसके समर्थकों और परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे पहले गिरफ्तार किया था और बाद में ‘फर्जी एनकाउंटर’ में मार दिया। उसके जनाजे में हजारों की भीड़ उमड़ी थी, जो यह दर्शाती थी कि उसने लोगों के दिलों में (चाहे डर से हो या एहसान से) कितनी गहरी जगह बना ली थी।


भाग 6: फिल्म ‘धुरंधर’ और रील vs रियल

2025 में आई फिल्म ‘धुरंधर’ ने एक बार फिर रहमान डकैत के नाम को जिंदा कर दिया है। फिल्म में अक्षय खन्ना ने विलेन के रूप में जो अभिनय किया है, वह रोंगटे खड़े करने वाला है।

  • समानता: फिल्म में विलेन की सनक, अपनी माँ के प्रति उसका व्यवहार और उसका अंत—ये सब काफी हद तक असली कहानी के करीब रखे गए हैं।
  • अंतर: फिल्मों में अक्सर कहानी को रोचक बनाने के लिए कुछ ‘सिनेमेटिक लिबर्टी’ ली जाती है। असली रहमान डकैत फिल्म से भी ज्यादा जटिल था। वह सिर्फ एक हत्यारा नहीं था, बल्कि एक ऐसा मास्टरमाइंड था जिसने एक समानांतर सरकार (Parallel Government) चला रखी थी।

निष्कर्ष: अपराध का कोई ‘हीरो’ नहीं होता

रहमान डकैत की कहानी हमें सिखाती है कि अपराध की दुनिया का आकर्षण चाहे कितना भी हो, उसका अंजाम हमेशा बुरा होता है। उसने ताकत कमाई, पैसा कमाया, लोगों का समर्थन भी पाया, लेकिन अंत में उसे पुलिस की गोलियों का शिकार होना पड़ा।

उसने अपनी ही माँ का खून (कथित तौर पर) करके यह साबित कर दिया था कि अपराध की दुनिया में संवेदनाओं की कोई जगह नहीं होती। आज वह इतिहास का एक काला पन्ना है, जिसे हम फिल्म के जरिए देख रहे हैं, लेकिन उसकी हकीकत किसी भी स्क्रीन से ज्यादा भयावह थी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: रहमान डकैत का असली नाम क्या था?
Ans: रहमान डकैत का असली नाम सरदार अब्दुल रहमान बलोच था।

Q2: क्या रहमान डकैत ने सच में अपनी माँ को मारा था?
Ans: यह रहमान डकैत के जीवन की सबसे प्रचलित कहानी है। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने शक के आधार पर अपनी माँ की हत्या की थी, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में इसे पूरी तरह साबित नहीं किया जा सका।

Q3: फिल्म ‘धुरंधर’ का विलेन किस पर आधारित है?
Ans: फिल्म ‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना का किरदार रहमान डकैत के जीवन और अपराधों से प्रेरित है।

Q4: रहमान डकैत को किसने मारा?
Ans: रहमान डकैत को कराची के मशहूर पुलिस अधिकारी एसएसपी चौधरी असलम खान ने 2009 में एक एनकाउंटर में मारा था।


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(Disclaimer: यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, पुलिस फाइलों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। NewsMug किसी भी तरह के अपराध या अपराधी का महिमामंडन नहीं करता है।)

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दैनिक भास्कर और पत्रिका जैसे राष्ट्रीय अखबार में बतौर रिपोर्टर सात वर्ष का अनुभव रखने वाले कमलेश वर्मा बिहार से ताल्लुक रखते हैं. बातें करने और लिखने के शौक़ीन कमलेश ने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से अपना ग्रेजुएशन और दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है. कमलेश वर्तमान में साऊदी अरब से लौटे हैं। खाड़ी देश से संबंधित मदद के लिए इनसे संपर्क किया जा सकता हैं।

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