देव उठनी एकादशी पर क्या करना चाहिए?

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 देव उठनी एकादशी पर क्या करना चाहिए? dev uthani ekadashi par kya karna chahiye

कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहते हैं. साल 2021 में यह एकादशी 15 नवंबर, 2021 सोमवार की है. इस दिन भगवान विष्णु  चार माह की नींद से देव जागेंगे और मंगल कार्यों के शुरु किए जाने की अनुमति जारी करेंगे. इस तिथि के दिन भगवान विष्णु और महा लक्ष्मी के साथ ही तुलसी की भी विशेष पूजा की जाती है. इस दिन से शादी विवाह कार्यों के लिए जाने वाले निर्णयों की शुरुआत हो जाती है. इस दिन भगवान विष्णु जी का आशीर्वाद पाने के लिए ये उपाय जरूर करने चाहिए.

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देव उठनी एकादशी पर क्या करना चाहिए? dev uthani ekadashi par kya karna chahiye

  • ग्यारस के दिन तुलसी के पौधे के चारों तरफ स्तंभ बनाएं.
  • जिसके बाद उस पर तोरण सजाएं.
  • रंगोली से अष्टदल कमल बनाएं.
  • शंख,चक्र और गाय के पैर बनाएं.
  • तुलसी के साथ आंवले का गमला लगाएं.
  • तुलसी का पंचोपचार सर्वांग पूजन करें.
  • दशाक्षरी मंत्र से तुलसी का आवाहन करें.
  • तुलसी का दशाक्षरी मंत्र-श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वृन्दावन्यै स्वाहा।
  • घी का दीप और धूप दिखाएं.
  • सिंदूर,रोली,चंदन और नैवेद्य चढ़ाएं.
  • तुलसी को वस्त्र अंलकार से सुशोभित करें.
  • फिर लक्ष्मी अष्टोत्र या दामोदर अष्टोत्र पढ़ें.
  • तुलसी के चारों ओर दीपदान करें.
  • एकादशी के दिन श्रीहरि को तुलसी चढ़ाने का फल दस हज़ार गोदान के समतुल्य माना जाता है.
जिन दंपत्तियों के यहां संतान न हो वो तुलसी नामाष्टक पढ़ें.
तुलसी नामाष्टक का पाठ नित्य करने से न सिर्फ शीघ्र विवाह होता है बल्कि बिछुड़े संबंधी भी करीब आते हैं.
नए घर में तुलसी का पौधा, श्रीहरि नारायण का चित्र या प्रतिमा और जल भरा कलश लेकर प्रवेश करने से नए घर में संपत्ति की कमी नहीं होती.  नौकरी पाने, कारोबार बढ़ाने के लिये गुरुवार को श्यामा तुलसी का पौधा पीले कपड़े में बांधकर, ऑफिस या दुकान में रखें. यह उपाय करने से व्यापार बढ़ेगा और रोजगार में प्रमोशन होगा.
दिव्य तुलसी मंत्र : 
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः । नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये ।।
ॐ श्री तुलस्यै विद्महे। 
विष्णु प्रियायै धीमहि। 
तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।। 
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी। 
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।। 
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्। 
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।
बार तुलसी जी की परिक्रमा करें.
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