Close Menu
News MugNews Mug
  • Home
  • About Us
  • contact us
  • News
    • बड़ी खबर
    • देशी News
    • पड़ताल
      • क्राईम
    • खबर दस्त
  • Madhya Pradesh
    • Nagda
    • Ujjain
  • Uttar Pradesh
    • भैंरट
    • Bihar News
  • हिंदी लोक
    • धर्म
    • निबंध
  • आत्मनिर्भर भारत
    • देशी लोग
    • रोजगार
    • स्वदेशी
  • सेहत
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest YouTube Telegram
Facebook Instagram Pinterest YouTube
News Mug
  • Home
  • About Us
  • contact us
  • News
    • बड़ी खबर
    • देशी News
    • पड़ताल
      • क्राईम
    • खबर दस्त
  • Madhya Pradesh
    • Nagda
    • Ujjain
  • Uttar Pradesh
    • भैंरट
    • Bihar News
  • हिंदी लोक
    • धर्म
    • निबंध
  • आत्मनिर्भर भारत
    • देशी लोग
    • रोजगार
    • स्वदेशी
  • सेहत
News MugNews Mug
Home - News - थावे मंदिर का इतिहास । Thawe Mandir Bihar । थावे मंदिर गोपालगंज बिहार
News KAMLESH VERMABy KAMLESH VERMA

थावे मंदिर का इतिहास । Thawe Mandir Bihar । थावे मंदिर गोपालगंज बिहार

Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Telegram
thawe-mandir-bihar-थावे-मंदिर-का-इतिहास

Table of Contents

Toggle
  • थावे मंदिर कहा स्थित है ?
    • राजा मनन सिंह किला
  • किन नामों से जानी जाती है माँ थावेवाली
  • थावे मंदिर के दर्शन करने के उत्तम दिन
  • थावे मंदिर का इतिहास
    • मां थावेवाली के परम भक्त रहषु
  • कैसे पहुंचे ? थावे मंदिर
    • रेल मार्ग से :
    • सड़क मार्ग से :
    • हवाई मार्ग से :

थावे मंदिर का इतिहास । Thawe Mandir Bihar । थावे मंदिर गोपालगंज बिहार । थावे मंदिर कहा स्थित है ? थावे मंदिर कैसे पहुंचे

Thawe Mandir Bihar : पूरे विश्व को पहला विश्वविद्यालय देने वाले बिहार राज्य में असंख्य धार्मिक स्थल है. जहां जाकर आपके आत्मा को संतृप्ति मिलती है, उनमें से ही एक है मां थावे वाली भवानी का थावे मंदिर. आइए पोस्ट के जरिए थावे भवानी के इतिहास को पलटकर देखते हैं.

thawe-mandir-bihar-थावे-मंदिर-का-इतिहास

थावे मंदिर कहा स्थित है ?

माता थावेवाली का मंदिर बिहार राज्य के गोपालगंज जिले के थावे में स्थित है. यह गोपालगंज-सीवान राष्ट्रीय राजमार्ग पर गोपालगंज जिले से महज 6 किलो मीटर दूरी पर स्थित है. दक्षिण दिशा में जिला मुख्यालय से 6 किमी की दूरी पर एक गाँव स्थित है, जहाँ मसरख-थावे खंड के पूर्वोत्तर रेलवे और सिवान-गोरखपुर लूप-लाइन का एक जंक्शन स्टेशन “थावे” है.

राजा मनन सिंह किला

thawe-mandir-bihar-थावे-मंदिर-का-इतिहास

मां दुर्गा मंदिर के ठीक सामने एक सालों पुराना किला है लेकिन किले का इतिहास अस्पष्ट है. हथुआ के राजा का वहाँ एक महल था, लेकिन अब यह खंडर अवस्था में है. इसी मंदिर के पास आज भी मनन सिंह के भवनों का खंडहर भी मौजूद है. हथुआ राजा के निवास के पास एक पुराना मंदिर है जो देवी दुर्गा को समर्पित है.

मंदिर के बाड़े के भीतर एक अजीबोगरीब पेड़ है, जिसका वानस्पतिक परिवार अभी तक पहचाना नहीं गया है. मूर्ति और वृक्ष के संबंध में स्थानीय लोगों के बीच विभिन्न किवदंतिया प्रचलित हैं.

किन नामों से जानी जाती है माँ थावेवाली

मां थावेवाली को सिंहासिनी भवानी, थावे भवानी और रहषु भवानी के नाम से भी भक्तजन पुकारते हैं. ऐसे तो साल भर यहा मां के भक्त आते हैं, परंतु शारदीय नवरात्र और चैत्र नवारात्र के समय यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है। यहां मां के भक्त प्रसाद के रूप में नारियल, पेड़ा और चुनरी चढ़ाते है.

मां ने अपने प्रत्येक भक्त को वह दिया है जो वे पाने के योग्य हैं. मां को हमसे महंगी कोई तैयारी की जरूरत नहीं है. उसे कुछ सस्ती और आम चीजें चाहिए. माँ को भक्तों (भक्ति), पवित्रता (पवित्राता), और प्रेम जैसी कुछ चीजों को छोड़कर कुछ भी नहीं चाहिए.

थावे मंदिर के दर्शन करने के उत्तम दिन

सप्ताह में दो दिन, सोमवार और शुक्रवार, माँ को प्रसन्न करने के लिए पूजा करने के लिए खास माना जाता है.  इन दिनों भक्त अन्य दिनों की तुलना में बड़ी संख्या में माँ की पूजा करते हैं. “चैत्र” (मार्च) और “अश्विन” (अक्टूबर) के माह में “नवरात्र” के अवसर पर साल में दो बार विशेष मेले का आयोजन किया जाता है.

thawe-mandir-bihar-थावे-मंदिर-का-इतिहास

थावे मंदिर का गर्भ गृह काफी पुराना है. तीन तरफ से जंगलों से घिरे इस मंदिर में आज तक कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है. नवरात्र के सप्तमी को मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन मंदिर में भक्त भारी संख्या में पहुंचते है. चैत्र (मार्च-अप्रैल) के महीने में एक बड़ा मेला प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है.

थावे मंदिर का इतिहास

पौराणिक मान्यता है कि यहां मां अपने परम भक्त रहषु के बुलावे पर असम के कमाख्या स्थान से चलकर यहां पहुंची थीं. किवदंति है कि मां कमाख्या से चलकर कोलकाता (काली के रूप में दक्षिणेश्वरमें प्रतिष्ठित), पटना (यहां मां पटन देवी के नाम से जानी गई), आमी (छपरा जिला में मां दुर्गा का एक प्रसिद्ध स्थान) होते हुए थावे पहुंची थीं, और रहषु के मस्तक (सिर) को विभाजित (फाड़कर) करते हुए साक्षात दर्शन दिए थे. देश की 52 शक्तिपीठोंमें से एक थावे मंदिर के पीछे एक प्राचीन कहानी है.

जनश्रुतियों के मुताबिक राजा मनन सिंह हथुआ के राजा थे. वह अपने आपको मां दुर्गा का सबसे बड़ा और परम भक्त मानते थे. गर्व होने के कारण अपने सामने वे किसी को भी मां का भक्त नहीं मानते थे. एक समय राज्य में अकाल पड़ गया और लोग खाने को तरसने लगे.

मां थावेवाली के परम भक्त रहषु

thawe-mandir-bihar-थावे-मंदिर-का-इतिहास

थावे में कमाख्या देवी मां का एक सच्चा भक्त रहषु रहता था. पौराणिक कथा के अनुसार रहषु मां की कृपा से दिन में घास काटता और रात को उसी से अन्न निकल जाता था, जिस कारण वहां के लोगों को अन्न मिलने लगा, परंतु राजा को विश्वास नहीं हुआ.

राजा ने रहषु को ढोंगी बताते हुए मां को बुलाने को कहा. रहषु ने कई बार राजा से प्रार्थना की कि अगर मां यहां आएंगी तो राज्य बर्बाद हो जाएगा, परंतु राजा नहीं मानें. रहषु की प्रार्थना पर मां कोलकता, पटना और आमी होते हुए यहां पहुंची राजा के सभी भवन गिर गए और राजा की मौत हो गई.

मां ने जहां दर्शन दिए, वहां एक भव्य मंदिर है तथा कुछ ही दूरी पर रहषु भगत का भी मंदिर है. स्थानीय लोगों के बीच मान्यता है कि जो लोग मां के दर्शन के लिए आते हैं वे रहषु भगत के मंदिर में भी जरूर जाते हैं नहीं तो उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है.

प्रतिवर्ष अष्टमी को यहां बलि का विधान है, जिसे हथुआ राजपरिवार की ओर से संपन्न कराया जाता है. यह स्थान हथुआराज के ही अधीन था. मंदिर की पूरी देखरेख पहले हथुआराज प्रशासन द्वारा ही की जाती थी. अब यह बिहार पर्यटन के नक्शे में आ गया है.

कैसे पहुंचे ? थावे मंदिर

रेल मार्ग से :

एक रेलवे नेटवर्क है जो थावे को राज्य के विभिन्न हिस्सों और देश के अन्य शहरों से जोड़ता है. निकटतम रेलवे स्टेशन थावे रेलवे जंक्शन है जो सिवान, यानी गोरखपुर और पटना के माध्यम से भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है.

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से, लखनऊ-मुगलसराय और कानपुर-वाराणसी, लखनऊ-गोरखपुर के माध्यम से पटना और सीवान तक पहुंचने के लिए कई एक्सप्रेस और सुपर फास्ट ट्रेनें उपलब्ध हैं.

पटना या सीवान पहुंचने के बाद ट्रेन या बस द्वारा थावे मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है. इतना ही नहीं अलावा पटना, सीवान, गोपालगंज, छपरा और गोरखपुर से पूरे दिन के लिए टैक्सी सेवा उपलब्ध है.

सड़क मार्ग से :

राज्य में एक अच्छा सड़क नेटवर्क है जो देश के अन्य हिस्सों के साथ राज्य के भीतर विभिन्न स्थानों को जोड़ता है. कई राष्ट्रीय राजमार्ग राज्य से होकर गुजरते हैं, निकटतम राजमार्ग को NH-28 (थावे मंदिर से 05 किमी दूर) के रूप में जाना जाता है, जो लखनऊ-गोरखपुर-मुजफ्फरपुर के माध्यम से जिला गोपालगंज को जोड़ता है.

बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों (गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी आदि) से नियमित बस और टैक्सी सेवाएं पूरे दिन उपलब्ध हैं.

हवाई मार्ग से :

बिहार की राजधानी पटना (PAT), फ्लाइट के जरिए देश के विभिन्न शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. पटना से माँ के मंदिर तक पहुँचने के लिए बहुत अच्छी रेल और सड़क परिवहन सुविधा उपलब्ध है. इसके अलावा महायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (GOP), गोरखपुर के माध्यम से पहुंच सकते हैं.

इसे भी पढ़े :

  • मुज्जफरनगर में स्थित शुक्रताल धाम का रोचक इतिहास | Shukratal Temple History in hindi
  • मैरवा धाम : हरिराम बाबा का इतिहास ( श्री हरिराम ब्रह्म स्थान)। Mairwa Dham Siwan
  • मैरवा धाम : हरिराम बाबा का इतिहास ( श्री हरिराम ब्रह्म स्थान)। Mairwa Dham Siwan
  • रामकोला धर्मसमधा दुर्गा मंदिर की पूरी कहानी, जानें क्या है इतिहास
  • हथुआ राज का इतिहास, अपशगुनी गिद्ध के कारण राजपरिवार को छाेड़ना पड़ा था महल

NewsMug Logo
असली कहानियों का सबसे बड़ा मंच
Education • Desi News • Viral Stories
VISIT NOW 🚀
JOIN THE FAMILY
Stay updated with NewsMug
🌐
Main Portal
Visit Website
➔
💬
WhatsApp Group
Fastest Updates
➔
✈️
Telegram Channel
PDFs & Notes
➔
📰
Google News
Follow Us
➔
bihar ka thawe mandir bihar thawe mandir image thawe durga mandir thawe bihar thawe mandir bihar thawe mandir bihar gopalganj thawe temple bihar थावे के भवानी थावे धाम की कहानी थावे मंदिर थावे मंदिर इतिहास थावे मंदिर का इतिहास थावे मंदिर गोपालगंज बिहार
Follow on Google News Follow on Flipboard
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Telegram
KAMLESH VERMA
  • Website
  • Facebook
  • X (Twitter)
  • Instagram
  • LinkedIn

दैनिक भास्कर और पत्रिका जैसे राष्ट्रीय अखबार में बतौर रिपोर्टर सात वर्ष का अनुभव रखने वाले कमलेश वर्मा बिहार से ताल्लुक रखते हैं. बातें करने और लिखने के शौक़ीन कमलेश ने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से अपना ग्रेजुएशन और दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है. कमलेश वर्तमान में साऊदी अरब से लौटे हैं। खाड़ी देश से संबंधित मदद के लिए इनसे संपर्क किया जा सकता हैं।

Related Posts

Friendship Day 2026 Date in India
Hindi 5 Views

Friendship Day 2026 Date in India: शानदार! जानें सही तारीख, इतिहास और दोस्तों के लिए 101 दिल छू लेने वाली विशेस

August School Holidays 2026 List India
Education 6 Views

August School Holidays 2026 List India: (खुशखबरी) अगस्त में छुट्टियों की भरमार! देखें स्कूलों और बैंकों की पूरी सूची

गौरी व्रत 2026
धर्म 3 Views

 गौरी व्रत 2026: (25 जुलाई) शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और माँ पार्वती की अटूट भक्ति का रहस्य

शीतला सातम 2026
कथाएँ 4 Views

शीतला सातम 2026: (सावधान) रंधन छठ और सातम की सही तारीख, मुहूर्त और बासी भोजन का वैज्ञानिक सच

देवशयनी एकादशी 2026
त्योहारों और परंपराओं 44,358 Views

देवशयनी एकादशी 2026: (25 जुलाई) शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और चातुर्मास के 101 नियम

Inspirational Hindi Quotes for Life
News 7 Views

Inspirational Hindi Quotes for Life: 1001+ अनमोल विचार जो आपकी ज़िंदगी बदल देंगे (2026)

Leave A Reply Cancel Reply

You must be logged in to post a comment.

रामेश्वरम की यात्रा: मंदिर, धनुष्कोडि, पंबन ब्रिज और पूरी जानकारी

रामेश्वरम की यात्रा: मंदिर, धनुष्कोडि, पंबन ब्रिज और पूरी जानकारी

02/08/2026
चीकू खरगोश और बोलता हुआ पेड़: बच्चों की रोचक जंगल कहानी

चीकू खरगोश और बोलता हुआ पेड़: बच्चों की रोचक जंगल कहानी

02/08/2026
तारों की रानी का अनमोल मुकुट . बच्चों के लिए सुंदर परी-कथा

तारों की रानी का अनमोल मुकुट . बच्चों के लिए सुंदर परी-कथा

02/08/2026
सियार की शामत :-बच्चों के लिए मजेदार और सीख देने वाली जंगल कहानी

सियार की शामत :-बच्चों के लिए मजेदार और सीख देने वाली जंगल कहानी

02/08/2026
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस: जानिए क्यों ज़रूरी है पर्यावरण सुरक्षा!

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस: जानिए क्यों ज़रूरी है पर्यावरण सुरक्षा!

02/08/2026
गुरु पूर्णिमा: जानिए क्यों और कैसे मनाया जाता है यह पावन पर्व!

गुरु पूर्णिमा: जानिए क्यों और कैसे मनाया जाता है यह पावन पर्व!

02/08/2026
गुरु पूर्णिमा पर बाल कविता: जानिए गुरु के ज्ञान का अनमोल उजाला!

गुरु पूर्णिमा पर बाल कविता: जानिए गुरु के ज्ञान का अनमोल उजाला!

01/08/2026
गुरु-शिष्य परंपरा: जानिए बालक आरुणि की अद्भुत गुरुभक्ति!

गुरु-शिष्य परंपरा: जानिए बालक आरुणि की अद्भुत गुरुभक्ति!

01/08/2026
एकलव्य की गुरुभक्ति: जानिए निष्ठा और लगन की यह अमर कहानी!

एकलव्य की गुरुभक्ति: जानिए निष्ठा और लगन की यह अमर कहानी!

01/08/2026
असली गुरु: जानिए सुंदरबन के जानवरों की यह प्रेरणादायक कहानी!

असली गुरु: जानिए सुंदरबन के जानवरों की यह प्रेरणादायक कहानी!

01/08/2026
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस: जानिए जंगल के राजा को बचाना क्यों है ज़रूरी!

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस: जानिए जंगल के राजा को बचाना क्यों है ज़रूरी!

01/08/2026
मोनू बंदर और गायब हुआ चाँद: जानिए सुंदरबन का यह रोचक रहस्य!

मोनू बंदर और गायब हुआ चाँद: जानिए सुंदरबन का यह रोचक रहस्य!

01/08/2026
Must Read
सपने में बाढ़ देखना

सपने में बाढ़ देखना क्या संकेत देता है? जानें शुभ या अशुभ अर्थ

23/07/2026
गोब्लिन शार्क क्यों कहलाती है Living Fossil

गोब्लिन शार्क क्यों कहलाती है Living Fossil? जानें रहस्य

22/07/2026
PM Kisan 19th Installment Release Date 2026

PM Kisan 19th Installment Release Date 2026: (जारी हुई) 19वीं किस्त की तारीख और बेनिफिशियरी लिस्ट यहाँ देखें

22/07/2026
देवशयनी एकादशी 2026

देवशयनी एकादशी 2026: (25 जुलाई) शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और चातुर्मास के 101 नियम

23/07/2026
सपने में मछली खाना

सपने में मछली खाना (Sapne me Machli Khana) – शुभ-अशुभ संकेत और धार्मिक व्याख्या

22/07/2026
India Post GDS 3rd Merit List 2026

India Post GDS 3rd Merit List 2026: (जारी हुई) ग्रामीण डाक सेवक तीसरी मेरिट लिस्ट, यहाँ से PDF डाउनलोड करें

14/05/2026
राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस 2026

राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस 2026: (ऐतिहासिक गौरव) तिरंगे का इतिहास, अर्थ और फ्लैग कोड के नए नियम

22/07/2026
Duniya ka wo shahar jahan raat nahi hoti

 इस शहर में अगले 84 दिनों तक नहीं डूबेगा सूरज! जानिए क्या है ‘Midnight Sun’ की अनोखी घटना

13/05/2026
Facebook Pinterest Telegram YouTube WhatsApp
  • Home
  • About Us
  • contact us
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
© 2026 NewsMug. Designed by NewsMug.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.