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Chaudhry Aslam Khan: वो ‘दबंग’ पुलिसवाला जिसने रहमान डकैत को मारा, और खुद बम धमाके में उड़ा दिया गया (Real Story)

Chaudhry Aslam Khan: वो ‘दबंग’ पुलिसवाला जिसने रहमान डकैत को मारा, और खुद बम धमाके में उड़ा दिया गया (Real Story)

SSP Chaudhry Aslam Khan Biography: अगर आपने फिल्म धुरंधर‘ (Dhurandhar) देखी है या रहमान डकैत की खौफनाक कहानी पढ़ी है, तो आपके मन में एक सवाल जरूर आया होगा—आखिर उस हैवान को मारा किसने? वह कौन था जिसके नाम से कराची का अंडरवर्ल्ड कांपता था?

उसका नाम था—एसएसपी चौधरी असलम खान (SSP Chaudhry Aslam Khan)

सफेद शलवार-कमीज, हाथ में हमेशा जलती हुई सिगरेट, और चेहरे पर ऐसी बेफिक्री जैसे मौत उनकी जेब में रखी हो। लल्लनटॉप की भाषा में कहें तो वो कराची पुलिस के ‘सिंघम’ थे। आज NewsMug आपको उस असली ‘दबंग’ की कहानी बताने जा रहा है, जिसने कसम खाई थी कि वह आतंकवादियों और गैंगस्टर्स की नस्लें मिटा देगा, और अंत में एक बम धमाके में शहीद हो गया।


1. कौन थे चौधरी असलम खान? (The Encounter Specialist)

चौधरी असलम का जन्म पाकिस्तान के मानसेहरा (Mansehra) में हुआ था। वे 1984 में एक एएसआई (ASI) के रूप में पुलिस में भर्ती हुए और अपनी निडरता के दम पर एसएसपी (SSP) के पद तक पहुंचे।

कराची का ल्यारी (Lyari) इलाका, जहां पुलिस जाने से भी डरती थी, वहां चौधरी असलम अपनी बिना नंबर प्लेट वाली बख्तरबंद गाड़ी में खुलेआम घूमते थे।

  • पहचान: उन्हें “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” कहा जाता था।
  • रिकॉर्ड: अपने करियर में उन्होंने 100 से ज्यादा आतंकवादियों और गैंगस्टर्स को एनकाउंटर में मार गिराया था।

2. रहमान डकैत का अंत: वो रात जिसने इतिहास बदल दिया

यह चौधरी असलम के करियर का सबसे बड़ा केस था। रहमान डकैत, जिसने अपनी माँ की हत्या की थी और ल्यारी में समानांतर सरकार चलाता था, पुलिस की पकड़ से बाहर था।

9 अगस्त 2009 की रात, चौधरी असलम को खबर मिली कि रहमान स्टील टाउन इलाके से गुजर रहा है।

  • एनकाउंटर: चौधरी असलम की टीम ने उसे घेर लिया। दोनों तरफ से गोलियां चलीं। जब धुआं हटा, तो जमीन पर रहमान डकैत और उसके तीन साथियों की लाशें पड़ी थीं।
  • बयान: एनकाउंटर के बाद चौधरी असलम ने मीडिया के सामने अपनी सिगरेट सुलगाते हुए कहा था—“मैंने शहर को एक नासूर से मुक्ति दिला दी है।”

इस कहानी का पहला भाग पढ़ें (Must Read on NewsMug):


3. तालिबान को खुली चुनौती: “मैं उन्हें उनकी मांद में घुसकर मारूंगा”

रहमान डकैत के खात्मे के बाद, चौधरी असलम का अगला निशाना तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) बन गया। उन्होंने कई तालिबानी आतंकियों को गिरफ्तार किया और मारा।

मौत को चुनौती:
2011 में तालिबान ने उनके घर पर एक आत्मघाती हमला (Suicide Attack) किया। उनका घर पूरी तरह तबाह हो गया, लेकिन चौधरी असलम मलबे से झाड़ते हुए बाहर निकले और टीवी कैमरों के सामने कहा:

“मैं इन बुजदिलों से डरने वाला नहीं हूँ। मैं अपनी पीढ़ियों को भी इनसे लड़ना सिखाऊंगा। मैं उन्हें कब्र तक छोडूंगा नहीं।”

यह वीडियो आज भी इंटरनेट पर उनकी बहादुरी की मिसाल है।


4. शेर का शिकार: 9 जनवरी 2014 का वो काला दिन

दुश्मन जानते थे कि चौधरी असलम को आमने-सामने की लड़ाई में नहीं हराया जा सकता। इसलिए उन्होंने धोखे का सहारा लिया।

9 जनवरी 2014 की शाम, चौधरी असलम अपनी बुलेटप्रूफ गाड़ी के काफिले के साथ ल्यारी एक्सप्रेसवे से गुजर रहे थे। आतंकवादियों ने एक पिकअप वैन में 200 किलो विस्फोटक भर रखा था। जैसे ही असलम की गाड़ी उस वैन के पास से गुजरी, एक जोरदार धमाका हुआ।

धमाका इतना तेज था कि उनकी बुलेटप्रूफ गाड़ी हवा में उछलकर दूसरे ट्रैक पर जा गिरी। इस हमले में ‘कराची का शेर’ हमेशा के लिए खामोश हो गया। तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था, “हमने अपने सबसे बड़े दुश्मन को मार दिया।”


चौधरी असलम: एक नजर में (Quick Facts Table)

विवरण (Details)जानकारी (Info)
पूरा नामचौधरी असलम खान
रैंकएसएसपी (SSP), सीआईडी (CID)
प्रसिद्धिएनकाउंटर स्पेशलिस्ट, ‘कराची का शेर’
सबसे बड़ा शिकाररहमान डकैत (2009)
मृत्यु9 जनवरी 2014 (बम धमाका)
सम्मानतमगा-ए-शुजात (मरणोपरांत)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: चौधरी असलम ने रहमान डकैत को क्यों मारा?
Ans: रहमान डकैत कराची में आतंक का पर्याय बन चुका था। उस पर सैकड़ों हत्याओं (जिसमें उसकी माँ भी शामिल थी) और ड्रग्स तस्करी के आरोप थे। उसे रोकने के लिए चौधरी असलम ने एनकाउंटर किया।

Q2: क्या फिल्म ‘धुरंधर’ में चौधरी असलम का किरदार है?
Ans: रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म में पुलिस अधिकारी का किरदार चौधरी असलम के व्यक्तित्व से प्रेरित है, जो निडर होकर सिस्टम और अपराधियों से लड़ता है।

Q3: चौधरी असलम की मृत्यु कैसे हुई?
Ans: उनकी मृत्यु 2014 में एक तालिबानी आत्मघाती कार बम धमाके में हुई थी।


निष्कर्ष:
चौधरी असलम खान का तरीका भले ही विवादित रहा हो, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि वे एक निडर योद्धा थे। उन्होंने उस दौर में अपराधियों की आंखों में आंखें डालीं, जब लोग उनसे नजरें चुराते थे। रहमान डकैत अगर ‘अंधेरा’ था, तो चौधरी असलम वह ‘मशाल’ थे जो अंत में खुद जलकर बुझ गई।

ऐसी ही रोंगटे खड़े कर देने वाली असली कहानियों (Real Stories) के लिए NewsMug.in के साथ बने रहें।

KAMLESH VERMA

दैनिक भास्कर और पत्रिका जैसे राष्ट्रीय अखबार में बतौर रिपोर्टर सात वर्ष का अनुभव रखने वाले कमलेश वर्मा बिहार से ताल्लुक रखते हैं. बातें करने और लिखने के शौक़ीन कमलेश ने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से अपना ग्रेजुएशन और दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है. कमलेश वर्तमान में साऊदी अरब से लौटे हैं। खाड़ी देश से संबंधित मदद के लिए इनसे संपर्क किया जा सकता हैं।

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