दिवाली 2026 में कब है: 8 या 9 नवंबर? जानें शास्त्रसम्मत सही तारीख, लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त व संपूर्ण पंचांग
📌 मुख्य बिंदु संक्षेप में (Key Highlights 2026):
- दिवाली 2026 महापर्व की सही तारीख: 08 नवंबर 2026, रविवार (कार्तिक कृष्ण अमावस्या)।
- महालक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: शाम 05:48 बजे से 07:44 बजे तक (प्रदोष काल + स्थिर वृषभ लग्न)।
- महानिशिता काल मुहूर्त (व्यापारी व तंत्र साधना): रात्रि 11:39 बजे से 12:31 बजे तक।
- धनतेरस 2026: 06 नवंबर 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी।
- गोवर्धन पूजा व भाई दूज: गोवर्धन पूजा 09 नवंबर एवं भाई दूज 10 नवंबर 2026 को होगी।
सनातन धर्म के महापर्वों में सर्वश्रेष्ठ और प्रकाश, समृद्धि एवं सौहार्द का द्योतक दीपावली (Diwali) हर वर्ष कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। जब भी हिंदू पंचांग के आगामी वर्षों की गणना की जाती है, तो करोड़ों सनातनियों के मन में सबसे बड़ा जिज्ञासापूर्ण प्रश्न यही होता है कि दिवाली 2026 में कब है? क्या 2026 में दीपावली 8 नवंबर को मनाई जाएगी अथवा 9 नवंबर को?
भारतीय ज्योतिष शास्त्र, निर्णयसिंधु, धर्मसिंधु तथा प्रमुख पंचांगों जैसे महालक्ष्मी कैलेंडर 2026 पंचांग एवं ठाकुर प्रसाद कैलेंडर नवंबर 2026 की गणितीय गणना के अनुसार वर्ष 2026 में दीपावली का मुख्य पर्व रविवार, 8 नवंबर 2026 को पूरे विश्व में श्रद्धा, उल्लास और वैदिक विधि-विधान से मनाया जाएगा।
दीपावली केवल दीप जलाने का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन से अज्ञान, दरिद्रता और नकारात्मकता के अंधकार को मिटाकर मां महालक्ष्मी, विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश और धन के अधिपति कुबेर देव के दिव्य आशीर्वाद को आत्मसात करने का पावन सुअवसर है। 2026 भारतीय त्योहार कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष कार्तिक मास में ग्रहों की युति भी व्यापार और समृद्धि के लिए अत्यंत दुर्लभ और फलदायी संयोग बना रही है।
📑 इस विस्तृत लेख में आप जानेंगे:
- 8 नवंबर या 9 नवंबर: दिवाली 2026 की तारीख पर पंचांगीय विश्लेषण
- दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त: प्रदोष काल, वृषभ लग्न व निशिता काल
- देश के प्रमुख महानगरों में लक्ष्मी पूजा का सटीक समय (City-wise Muhurat)
- दीपावली 2026 दिन और रात का चौघड़िया मुहूर्त (बही-खाता व दुकान पूजन)
- 5 दिवसीय दीपोत्सव पंचांग: धनतेरस से लेकर भाई दूज तक की तिथियां
- शास्त्रोक्त महालक्ष्मी-गणेश पूजन विधि और आवश्यक सामग्री सूची
- दिवाली 2026 पर बन रहे दुर्लभ ग्रह योग एवं वास्तु उपाय
- दीपावली का वैज्ञानिक व पर्यावरणीय महत्व: मिट्टी के दीप और सरसों तेल
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
8 नवंबर या 9 नवंबर: दिवाली 2026 में कब है? जानें सटीक पंचांग मत
जब भी कोई बड़ा पर्व आता है, तिथियों के आरंभ और समापन समय को लेकर कई बार भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ठीक इसी प्रकार, वर्ष 2026 में भी कई श्रद्धालु संशय में हैं कि दिवाली 2026 में कब है – 8 नवंबर को या 9 नवंबर को?
इस संदर्भ में वैदिक ज्योतिष और स्मृति ग्रंथों का सिद्धांत एकदम स्पष्ट है। शास्त्र कहता है:
“कार्तिके प्रदोष समयेऽमावस्यां दीपदानं कुर्यात्। पूर्वविद्धा ग्राह्या निशीथव्यापिनी यदि।।”
अर्थात: कार्तिक मास की अमावस्या जिस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के उपरांत 2 घंटे 24 मिनट की अवधि) और अर्धरात्रि (निशीथ काल) में व्याप्त हो, उसी दिन दीपावली और महालक्ष्मी पूजन शास्त्रसम्मत माना जाता है।
📅 कार्तिक अमावस्या तिथि 2026 की काल गणना:
- कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि प्रारंभ: 08 नवंबर 2026, दोपहर 01:28 बजे से।
- कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि समाप्त: 09 नवंबर 2026, दोपहर 03:45 बजे तक।
चूंकि 08 नवंबर 2026 की शाम को सूर्यास्त के समय अमावस्या तिथि पूर्ण रूप से विद्यमान रहेगी और संपूर्ण रात्रि निशिता काल तक व्याप्त रहेगी, इसलिए 8 नवंबर 2026 (रविवार) को ही पूरे देश में मुख्य दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। 9 नवंबर को अमावस्या तिथि दोपहर 03:45 बजे ही समाप्त हो जाएगी और शाम को प्रदोष काल में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि आ जाएगी। इसलिए 9 नवंबर की शाम को लक्ष्मी पूजन शास्त्रों के अनुसार वर्जित है।
इस निर्णय की पुष्टि कालनिर्णय नवंबर 2026 पंचांग तथा ठाकुर प्रसाद पंचांग दोनों में प्रामाणिक रूप से की गई है।
दिवाली 2026 महालक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त: प्रदोष काल व स्थिर वृषभ लग्न
दीपावली के दिन माता महालक्ष्मी की आराधना केवल समय पर ही नहीं, बल्कि स्थिर लग्न (Fixed Ascendant) में करना परम कल्याणकारी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, जब स्थिर लग्न चल रहा होता है, तब की गई पूजा से लक्ष्मी जी साधक के घर में स्थायी रूप से वास करती हैं और चंचला लक्ष्मी कभी घर छोड़कर नहीं जातीं।
💡 आचार्य पं. विद्यासागर शास्त्री का ज्योतिषीय परामर्श:
“गृहस्थ साधकों को सदैव स्थिर वृषभ लग्न में ही महालक्ष्मी पूजन संपन्न करना चाहिए। यदि आप इस अवधि में संपूर्ण श्री सूक्त का 16 पाठ अथवा कनकधारा स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो वर्ष भर आर्थिक अभाव नहीं रहता। पूजा के समय उत्तर अथवा ईशान कोण (North-East) की ओर मुख करके बैठना सबसे फलदायी माना गया है।” घर में बरकत बनाए रखने के लिए वास्तु शास्त्र टिप्स 2026 का अनुपालन अवश्य करें।
देश के प्रमुख शहरों में लक्ष्मी पूजा का सटीक समय (City-Wise Shubh Muhurat 2026)
भारत के विभिन्न राज्यों और शहरों में सूर्यास्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर होता है, जिसके कारण प्रदोष काल और वृषभ लग्न का समय भी थोड़ा भिन्न होता है। नीचे भारत के प्रमुख नगरों का प्रामाणिक समय दिया गया है:
| शहर (City) | राज्य (State) | लक्ष्मी पूजन मुहूर्त (वृषभ लग्न) | प्रदोष काल समय |
|---|---|---|---|
| नई दिल्ली / गुरुग्राम / नोएडा | दिल्ली-NCR | 05:48 PM से 07:44 PM | 05:32 PM से 08:09 PM |
| मुंबई / ठाणे / नवी मुंबई | महाराष्ट्र | 06:12 PM से 08:08 PM | 06:01 PM से 08:34 PM |
| कोलकाता / हावड़ा | पश्चिम बंगाल | 05:08 PM से 07:04 PM | 04:54 PM से 07:29 PM |
| चेन्नई | तमिलनाडु | 05:56 PM से 07:51 PM | 05:45 PM से 08:18 PM |
| जयपुर / जोधपुर | राजस्थान | 05:54 PM से 07:50 PM | 05:38 PM से 08:15 PM |
| लखनऊ / कानपुर / वाराणसी | उत्तर प्रदेश | 05:36 PM से 07:32 PM | 05:21 PM से 07:58 PM |
| अहमदाबाद / सूरत / वडोदरा | गुजरात | 06:08 PM से 08:04 PM | 05:57 PM से 08:32 PM |
| बेंगलुरु | कर्नाटक | 06:07 PM से 08:02 PM | 05:56 PM से 08:29 PM |
| भोपाल / इंदौर / उज्जैन / नागदा | मध्य प्रदेश | 05:51 PM से 07:47 PM | 05:39 PM से 08:14 PM |
| पटना / गया / मुजफ्फरपुर | बिहार | 05:18 PM से 07:14 PM | 05:04 PM से 07:41 PM |
दीपावली 2026 चौघड़िया मुहूर्त: बही-खाता, दुकान व कार्यालय पूजन
व्यापारी बंधुओं, कॉर्पोरेट कार्यालयों और कारखानों में दिन के समय भी बही-खाता पूजन, कलम-दवात पूजन और नए वित्तीय खातों की शुरुआत करने की परंपरा है। इसके लिए शुभ, लाभ और अमृत चौघड़िया का विचार किया जाता है:
शुभ चौघड़िया (Shubh)
प्रातः 08:04 से 09:26 तक
दुकानों के शटर खोलने, दीप प्रज्वलन व प्रारंभिक पूजा हेतु श्रेष्ठ।
लाभ व अमृत चौघड़िया
दोपहर 12:10 से 02:54 तक
नए खातों का श्रीगणेश, कुबेर पूजन और व्यवसाय में धन आगमन हेतु उत्तम।
शुभ चौघड़िया (प्रदोष काल)
शाम 05:38 से 07:16 तक
गृहस्थों द्वारा माता लक्ष्मी, श्रीगणेश और सरस्वती पूजन का समय।
5 दिवसीय दीपोत्सव 2026: धनतेरस से भाई दूज तक की संपूर्ण तिथियां
दीपावली केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह सनातन परंपरा का पांच दिवसीय प्रकाश पर्व है। हमारे आलेख दीपावली के पांचों पर्व कैसे और क्यों मनाए जाते हैं में भी वर्णित है कि यह पर्व धन, आरोग्य, सौंदर्य, प्रकाश और भाई-बहन के अटूट स्नेह का संगम है। वर्ष 2026 का 5 दिवसीय पर्व चक्र इस प्रकार रहेगा:
1. धनतेरस (धनत्रयोदशी) – 06 नवंबर 2026 (शुक्रवार)
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस दिन सोना, चांदी, पीतल के बर्तन और झाड़ू खरीदना अत्यंत शुभ होता है। सोना खरीदने से पूर्व सोने का ताजा भाव (Gold Rate Today) अवश्य जांच लें। धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त दक्षिण दिशा में ‘यम दीपम’ प्रज्वलित करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: धनतेरस का आध्यात्मिक व वैज्ञानिक महत्व।
2. नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली / रूप चौदस) – 07 नवंबर 2026 (शनिवार)
इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने 16,100 कन्याओं को नरकासुर के बंधन से मुक्त कराया था। मान्यता है कि सूर्योदय से पूर्व उबटन लगाकर स्नान (अभ्यंग स्नान) करने से रूप, तेज और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इस रात्रि 14 दीपक जलाकर घर के विभिन्न कोनों में रखे जाते हैं।
3. मुख्य दीपावली एवं महालक्ष्मी पूजन – 08 नवंबर 2026 (रविवार)
यह 5 दिवसीय महापर्व का मुख्य दिन है। 14 वर्ष के वनवास और लंका विजय के उपरांत भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के अयोध्या आगमन पर पूरी अयोध्या नगरी को दीपों से सजाया गया था। इस दिन समुद्र मंथन से प्रकट हुईं माता लक्ष्मी जी का स्वागत किया जाता है। महिलाएं इस दिन विशेष रूप से दिवाली स्पेशल मेहंदी डिजाइन्स लगाती हैं और घर को दीपों से आलोकित करती हैं।
4. गोवर्धन पूजा (अन्नकूट महोत्सव) – 09 नवंबर 2026 (सोमवार)
इंद्र के अहंकार को चूर करने और गोकुलवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्री कृष्ण ने कनिष्ठिका उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किया था। इस दिन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजन किया जाता है और 56 प्रकार के पकवानों का अन्नकूट भोग लगाया जाता है। पूजा में गोवर्धन पूजा मंत्र का जाप अवश्य करें। गुजरात में इस दिन से नव वर्ष (बेस्तू वरस) का शुभारंभ होता है।
5. भाई दूज (यम द्वितीया) – 10 नवंबर 2026 (मंगलवार)
पांच दिवसीय दीपोत्सव का समापन भाई दूज के साथ होता है। इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे। जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर प्रेमपूर्वक भोजन ग्रहण करते हैं और बहन से तिलक लगवाते हैं, उन्हें अकाल मृत्यु और यमदूतों का भय नहीं रहता।
शास्त्रोक्त महालक्ष्मी पूजन विधि 2026: चरणबद्ध गाइड व वैदिक मंत्र
दिवाली की शाम को की जाने वाली पूजा पूर्ण श्रद्धा और नियमपूर्वक होनी चाहिए। हमारे विस्तृत मार्गदर्शक दीपावली पूजन विधि व सामग्री सूची के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
🪔 चरणबद्ध पूजन प्रक्रिया (Step-by-Step Vidhi):
- शुद्धिकरण व पवित्रीकरण: उत्तर या पूर्व दिशा में एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें। उस पर लाल या पीला रेशमी वस्त्र बिछाएं। गंगाजल छिड़ककर स्वयं को और पूजा स्थल को पवित्र करें: “ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।।”
- प्रतिमा स्थापना: चौकी पर माता लक्ष्मी को दाईं ओर और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश जी को बाईं ओर स्थापित करें। उनके समीप देवी सरस्वती और कुबेर यंत्र रखें।
- कलश स्थापना: तांबे या पीतल के कलश में शुद्ध जल भरकर उसमें गंगाजल, सुपारी, सिक्का, अक्षत और आम के 5 पत्ते लगाएं। ऊपर एक नारियल पर मौली लपेटकर रखें।
- संकल्प: हाथ में जल, अक्षत, पुष्प और सिक्का लेकर अपना नाम, गोत्र और मनोकामना बोलते हुए संकल्प लें।
- प्रथम गणेश पूजन: भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, लाल सिंदूर और जनेऊ अर्पित करें। मंत्र: “ॐ गं गणपतये नमः”
- महालक्ष्मी षोडशोपचार पूजन: मां लक्ष्मी को पंचामृत से प्रतीकात्मक स्नान कराएं, लाल चुनरी, कमल का पुष्प, कमलगट्टा, कौड़ी, गोमती चक्र और सिंघाड़ा अर्पित करें। खीर या बताशे का भोग लगाएं।
- कुबेर व तिजोरी पूजन: धन के अधिपति कुबेर देव और बही-खाते पर रोली से स्वास्तिक बनाकर धूप-दीप दिखाएं: “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।”
- दीपदान व आरती: मुख्य चौमुखी दीपक में गाय का शुद्ध घी या तिल का तेल डालकर प्रज्वलित करें। फिर 26 या 51 मिट्टी के दीपकों को प्रज्वलित कर माता लक्ष्मी की आरती करें।
✨ महालक्ष्मी का सिद्ध धन-प्राप्ति मंत्र:
“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः”
(कमलगट्टे की माला से दिवाली की रात्रि इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप करने से दरिद्रता का समूल नाश होता है।)
दिवाली 2026: ज्योतिषीय संयोग, कोई ग्रहण नहीं और व्यापारिक महत्व
अक्सर यह देखा गया है कि कुछ वर्षों में दीपावली के आस-पास सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण का संयोग बनता है, जिससे सूतक काल के कारण पूजा के समय को लेकर संशय उत्पन्न होता है। लेकिन सूर्य ग्रहण व चंद्र ग्रहण 2026 लिस्ट के अनुसार वर्ष 2026 में दीपावली के दिन किसी भी प्रकार का ग्रहण नहीं है।
इसके अतिरिक्त, 8 नवंबर 2026 को रविवार होने से सूर्य देव का आधिपत्य रहेगा और अमावस्या तिथि पर स्वाति/विशाखा नक्षत्र का संयोग होने से यह दिन व्यवसायियों, नए निवेश, संपत्ति खरीद और गृह प्रवेश मुहूर्त 2026 की योजनाओं के लिए अत्यंत मंगलकारी सिद्ध होगा। यदि आप इस त्योहारी सीजन में कोई नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो दिवाली सीजन के टॉप 3 बिजनेस आइडियाज पर हमारा शोध अवश्य पढ़ें।
प्राचीन शकुन शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि यदि दीपावली की रात उल्लू, छिपकली या गाय के दर्शन हों, तो यह मां लक्ष्मी के साक्षात आगमन का संकेत माना जाता है। इस विषय में विस्तार से जानने के लिए दिवाली के दिन उल्लू व पक्षी दर्शन का रहस्य पढ़ें।
दीपावली का वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण: मिट्टी के दीये ही क्यों?
हमारे पूर्वजों द्वारा दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने का विधान केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहन वैज्ञानिक और पारिस्थितिकीय (Ecological) कारण मौजूद हैं:
- ऋतु परिवर्तन और कीट-पतंगों का नियंत्रण: वर्षा ऋतु की समाप्ति और शीत ऋतु के आगमन (कार्तिक मास) के समय वायुमंडल में हानिकारक बैक्टीरिया और कीटों की संख्या अत्यधिक बढ़ जाती है। जब लाखों घरों में शुद्ध सरसों के तेल के दीये जलते हैं, तो निकलने वाला प्राकृतिक धुआं और ताप हवा को शुद्ध करता है और प्राकृतिक कीटनाशक का कार्य करता है।
- मिट्टी के दीयों से ऊर्जा संतुलन: मिट्टी पृथ्वी तत्व (Earth element) का प्रतीक है। जब मिट्टी के दीये में अग्नि तत्व प्रज्वलित होता है, तो घर का बायो-एनर्जी फील्ड सकारात्मक तरंगों से भर जाता है।
- स्थानीय कुम्हारों को संबल: मिट्टी के दीये खरीदकर हम वोकल फॉर लोकल (Vocal for Local) के उस प्राचीन आर्थिक चक्र को जीवित रखते हैं, जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े कारीगरों के घर में भी खुशियों के दीप जलाता है।
- पर्यावरण अनुकूल पटाखे: प्रदूषण से बचने के लिए ग्रीन क्रैकर्स (Green Crackers) का ही न्यूनतम उपयोग करें, ताकि पर्यावरण और श्वसन रोगियों का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहे।
अपने प्रियजनों को इस पावन अवसर पर शुभकामनाएं प्रेषित करने के लिए हमारे विशेष संग्रह दिवाली कोट्स व शुभकामना संदेश और दिवाली स्टेटस इन हिंदी का उपयोग करें। साथ ही वर्ष 2026 के अन्य महापर्वों जैसे होली 2026 शुभ मुहूर्त एवं करवा चौथ 2026 व्रत कथा व चंद्रोदय की जानकारी भी NewsMug.in पर अवश्य देखें।
🎯 निष्कर्ष (Editorial Conclusion):
संक्षेप में, यदि आप भी यह योजना बना रहे हैं कि दिवाली 2026 में कब है, तो यह पूर्ण रूप से प्रमाणित है कि रविवार, 08 नवंबर 2026 को ही दीपावली का मुख्य पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। शाम 05:48 से 07:44 के मध्य स्थिर वृषभ लग्न में माता महालक्ष्मी की आराधना करें और अपने घर में सुख, शांति, समृद्धि एवं निरोगी काया की स्थापना करें। NewsMug.in परिवार की ओर से आप सभी सुधी पाठकों को दीपावली 2026 की हार्दिक अग्रिम मंगलकामनाएं!








