इंश्योरेंस क्लेम कैसे करते है? Insurance Claim Process In Hindi

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इंश्योरेंस क्लेम कैसे करते है? Insurance Claim Process In Hindi

भविष्य में आने वाले जोखिम या क्षति का सुनियोजित प्रबंधन करना बीमा या इंश्योरेंस कहलाता है. बीमा या इंश्योरेंस वित्तीय नुकसान से सुरक्षित होने का एक साधन है जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से एक आकस्मिक या अनिश्चित नुकसान के जोखिम के खिलाफ बचाव के लिए होता है. दोस्तों पोस्ट के जरिए हम जानेंगे Insurance claim process की पूरी जानकरी विस्तार पूर्वक और साथ ही हम Insurance के बारे में कुछ हद तक पढ़ेगे-

इंश्योरेंस क्लेम क्या होता है?

इंश्योरेंस का क्लेम बीमा पॉलिसी की शर्तों के तहत मुआवजे के लिए किया गया एक आवेदन होता है. जब भी कोई पॉलिसीधारक अपने किसी नुकसान के लिए बीमा कंपनी को मुआवज़ा के लिए आवेदन पत्र के ज़रिए एक औपचारिक अनुरोध करता है, उसे Insurance Claim कहते है. इस पूरी प्रक्रिया को Insurance claim process के नाम से जाना जाता है. आवेदन के बाद बीमा कंपनी दावे को मान्य करती है और बीमा क्लेम आवेदन के अनुमोदित होने पर यानी अप्रूव होने पर, बीमा कंपनी भुगतान जारी करती है.

इंश्योरेंस क्लेम कैसे करते है?

बहुत ही कम लोग जानते होंगे कि, बीमा पॉलिसी की राशि के लिए किस प्रकार आवेदन या क्लेम किया जाता है. अज्ञानता के कारण उनकी बीमा क्लेम की राशि काफ़ी समय तक उन्हें नहीं मिल पाती हैं या फिर ग़लत जानकारी आवेदन में भरने के कारण भी बीमा क्लेम रद्द हो जाता है.

इस कारण बेहद ही सावधानी पूर्वक और सही तरीके से Insurance claim process करना होता है, जिससे क्लेम की धन राशि समय से बिना किसी समस्या के मिल जाए. पोस्ट के जरिए हमारे द्वारा क्रमबद्ध तरीके से कौन कौन से बीमा का क्लेम कैसे करे, यह बताया गया है.

जीवन बीमा क्लेम (Life Insurance Claim) –

जीवन बीमा क्लेम मुख्य रूप से दो तरह के मामलों में किया जाता है, एक जब बीमा पॉलिसी होल्डर या बीमित व्यक्ति की मौत हो जाती है और दूसरा मामला जब पॉलिसी परिपक्व हो जाती है जिसे पॉलिसी का मेच्यूर होना भी कहते है.

पहले मामले में,  बीमा क्लेम आवेदन फॉर्म भरें और साथ में बीमित व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र, नॉमिनी का प्रमाणपत्र और पॉलिसी से जुड़े सभी दस्तावेज संलग्न करें फॉर्म में ये जानकारिया भरे जैसे की बीमा का पॉलिसी नंबर, बीमित व्यक्ति की मौत की तारीख,मौत का स्थान व मौत की वजह दर्ज करे और दुर्घटना वस होने वाली मौत के मामले में पुलिस एफआईआर की प्रतिलिपि तथा पोस्टमार्टम की रिपोर्ट की प्रतिलिपि भी संलग्न करें. सही तरह से आवेदन होने के बाद लगभग 30 दीनो में बीमा कंपनी बीमा पॉलिसी की रकम को जारी करती है.

दूसरे मामले में, बीमा कंपनी बीमित व्यक्ति को एक डिस्चार्ज वाउचर भेजती है जिस पर बीमा लेने वाले व्यक्ति को अपना हस्ताक्षर करके वापस बीमा कंपनी को भेजना होता है. डिस्चार्ज वाउचर मिलने के बाद बीमा कंपनी बीमा पॉलिसी की रकम को जारी करती है.

स्वास्थ्य बीमा क्लेम (Health Insurance Claim) –

स्वास्थ्य बीमा के मामले में बीमा कंपनी दो तरह से क्लेम का समझौता करती हैं, एक विकल्प होता है कैशलेश उपचार जिसमे अस्पताल बीमा कंपनी से इलाज के खर्च की राशि वसूलता है.

बीमा कंपनी द्वारा मान्य अस्पताल में आपको अपने इलाज के लिए भर्ती होना होता है और भर्ती होने से पहले या फिर भर्ती होने के बाद आवश्यक प्राधिकरण पत्र (ऑथराइजेशन फॉर्म) भरना पड़ता है.

बीमा कंपनियां कई अस्पतालों को ऐसी सुविधा प्रदान करने की अनुमति देती है जहां स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी से सम्बंधित दस्तावेज पहले से इन अस्पतालों के पास होते है. इन चिकित्सालयों से बीमित व्यक्ति अपने इलाज के लिए health insurance के ज़रिए सुविधा का लाभ उठा सकता है.

दूसरा विकल्प होता है जिसमे रोगी को अपने इलाज में होने वाले खर्च का भुगतान स्वयं करना पड़ता है, बाद में, बीमा कंपनी बीमारी के इलाज के दौरान होने वाले खर्च की राशि का भुगतान कर देती है.

अस्पताल में इलाज के दौरान हुए खर्च की अदायगी या प्रतिपूर्ति के लिए सही तरीके से ज़रूरी क्लेम फॉर्म में पूरा विवरण भरे और साथ में सभी सहायक दस्तावेज जैसे बिल रसीद, टेस्ट रिपोर्ट, अस्पताल का विमुक्ति पत्र (डिस्चार्ज सर्टिफिकेट) इत्यादि सब संलग्न करके, बीमा कंपनी से आवेदन करें.

मोटर बीमा क्लेम (Motor Insurance Claim) –

सड़क दुर्घटना होने पर या अन्य किसी कारण से मोटर गाड़ी को होने वाले नुकसान का किसी डीलर या किसी सर्विस सेंटर द्वारा अनुमानित विवरण निकालें. इसके बाद नुकसान के एवज़ में बीमा राशि के लिए क्लेम, नीचे दिए गये निर्देशों का का पालन करते हुए, करें.

  • सबसे पहले बीमा क्लेम के लिए आवेदन फॉर्म भर कर उसके साथ अपनी गाड़ी का पंजीकरण सर्टिफिकेट (आर सी) , ड्राइविंग लाइसेंस व दुर्घटना की पुलिस रिपोर्ट दर्ज करें.
  • आवेदन फॉर्म में पूरी जानकारी जैसे दुर्घटना की तारीख व समय, दुर्घटना का कारण, दुर्घटना में शामिल गाड़ियों के नाम, गाडियो के मॉडल, गाडियो के नंबर इत्यादि सब विवरण दर्ज करें.
  • थर्ड पार्टी क्लेम के लिए आपको एफआईआर की एक प्रतिलिपि संलग्न करके दस्तावेजों को मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) के पास भेजना पड़ता है.
  • कार डकैती के मामले में बीमा क्लेम आवेदन फॉर्म में डकैती से सम्बंधित विवरण भरे और साथ में रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आर सी), ड्राइविंग लाइसेंस की प्रतिलिपि, एफआईआर की प्रतिलिपि और आरटीओ ट्रांसफर पेपर्स संलग्न करें.

कुछ दुर्घटना बीमा क्लेम के मामलों में आपको गवाहों का नाम व फोन नंबर भी देना पड़ता है, किसी तरह का विवाद होने पर बीमा कंपनी फॉर्म में दी गई जानकारी की जांच पड़ताल कर सकें.

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इंश्योरेंस के पैसे का क्लेम करते वक्त कुछ जरूरी बातों का ध्यान अवश्य रखे, जैसे कि इंश्योरेंस क्लेम घटना होते ही करे, जल्द से जल्द क्लेम करना बेहतर होता है और आवेदन के लिए सही जानकारी दे, यदि कोई जानकारी छुपाई जाती है तो क्लेम की रकम में कटौती की जा सकती है.

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