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Onam 2025: केरल में ओणम कब है? जानें 10 दिनों के त्योहार की सही तारीख और महत्व

Onam 2025: केरल में ओणम कब है? जानें राजा महाबली के स्वागत के इस 10 दिवसीय महापर्व की पूरी कहानी

When is Onam festival in 2025 in Kerala? (केरल में ओणम 2025 कब है?) यह सवाल चिंगम महीने के आते ही हर उस व्यक्ति के मन में उमंग भर देता है जो केरल की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा है। ओणम सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि यह केरल की आत्मा का उत्सव है। यह खेतों में लहलहाती सुनहरी फसल, फूलों की रंगोली (पूकलम) की मनमोहक सुगंध, स्वादिष्ट व्यंजनों से सजी ओणम सद्या और राजा महाबली के अपनी प्रजा से मिलने आने की खुशी का प्रतीक है।

यह 10 दिनों तक चलने वाला एक ऐसा भव्य आयोजन है जो धर्म, जाति और समुदाय की सीमाओं से परे, सभी को एकजुटता और प्रेम के धागे में पिरोता है। लेकिन साल 2025 में ओणम की शुरुआत कब हो रही है? इसका सबसे महत्वपूर्ण दिन, थिरुवोनम, किस तारीख को है? और इस त्योहार के हर दिन का क्या विशेष महत्व है? आइए, इस लेख में हम ओणम 2025 से जुड़ी हर जानकारी को विस्तार से जानते हैं।

Onam 2025 Date and Time: ओणम 2025 की सही तिथियां

ओणम का त्योहार मलयालम कैलेंडर के पहले महीने ‘चिंगम’ में मनाया जाता है। यह त्योहार हस्त नक्षत्र से शुरू होता है और श्रवण नक्षत्र तक चलता है।

  • ओणम उत्सव का प्रारंभ (अथम): 27 अगस्त 2025, बुधवार
  • थिरुवोनम (मुख्य ओणम): 5 सितंबर 2025, शुक्रवार
  • ओणम उत्सव का समापन (चथिरा): 8 सितंबर 2025, सोमवार

सबसे महत्वपूर्ण दिन थिरुवोनम होता है, जो 5 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा। इसी दिन राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने पृथ्वी पर आते हैं। ओणम भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसकी जानकारी आप हमारे भारतीय त्योहारों और व्रतों के कैलेंडर में भी देख सकते हैं।

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ओणम के 10 दिनों का महत्व (10 Days of Onam Festival Name)

ओणम का हर दिन खास होता है और प्रत्येक दिन की अपनी एक अलग परंपरा और महत्व है।

  1. अथम (Atham – 27 अगस्त): इस दिन से उत्सव की शुरुआत होती है। लोग अपने घरों को साफ करते हैं और आंगन में फूलों की रंगोली ‘पूकलम’ बनाना शुरू करते हैं, जो हर दिन एक नई परत के साथ बड़ी होती जाती है।
  2. चिथिरा (Chithira – 28 अगस्त): पूकलम में फूलों की एक और परत जोड़ी जाती है।
  3. चोड़ी (Chodi – 29 अगस्त): इस दिन लोग नए कपड़े खरीदते हैं, जिसे ‘ओणक्कोडी’ कहा जाता है।
  4. विशाकम (Vishakam – 30 अगस्त): यह दिन ओणम सद्या की तैयारी की शुरुआत का प्रतीक है। बाजारों में रौनक बढ़ जाती है।
  5. अनिझम (Anizham – 31 अगस्त): इस दिन केरल की प्रसिद्ध नौका दौड़ ‘वल्लम काली’ की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो जाती हैं।
  6. थ्रिकेता (Thriketa – 1 सितंबर): परिवार के सभी सदस्य अपने पुश्तैनी घरों में इकट्ठा होने लगते हैं।
  7. मूलम (Moolam – 2 सितंबर): मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है।
  8. पूरादम (Pooradam – 3 सितंबर): इस दिन मिट्टी से ‘ओनाथप्पन’ (राजा महाबली और वामन का प्रतीक) की छोटी मूर्तियाँ बनाकर पूकलम के केंद्र में स्थापित की जाती हैं।
  9. उथ्रादम (Uthradam – 4 सितंबर): इसे ‘पहला ओणम’ कहा जाता है। इस दिन राजा महाबली के आगमन की अंतिम तैयारियां की जाती हैं।
  10. थिरुवोनम (Thiruvonam – 5 सितंबर): यह ओणम का सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम दिन है। माना जाता है कि इसी दिन राजा महाबली अपनी प्रजा के घर पधारते हैं। लोग सुबह जल्दी उठकर, नए कपड़े पहनकर पूजा करते हैं और भव्य ‘ओणम सद्या’ का आयोजन करते हैं।

ओणम के पीछे की पौराणिक कथा (Story behind Onam festival Mahabali)

ओणम का त्योहार असुर राजा महाबली की कथा से जुड़ा है, जो एक अत्यंत पराक्रमी, दानी और प्रजावत्सल राजा थे।

  • महाबली का राज्य: उनके शासन में प्रजा बहुत सुखी और समृद्ध थी। उनके प्रताप से देवराज इंद्र भी भयभीत हो गए। देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी।
  • वामन अवतार: तब भगवान विष्णु ने एक बौने ब्राह्मण ‘वामन‘ का अवतार लिया और राजा महाबली के पास पहुंचे, जो एक यज्ञ कर रहे थे। वामन ने महाबली से दान में केवल तीन पग भूमि मांगी।
  • तीन पग भूमि: दानी महाबली तुरंत सहमत हो गए। वामन ने अपना विराट रूप धारण किया और पहले पग में पूरी पृथ्वी, दूसरे पग में पूरा आकाश नाप लिया। जब तीसरे पग के लिए कोई स्थान नहीं बचा, तो राजा महाबली ने अपना वचन पूरा करने के लिए अपना सिर वामन के चरणों में रख दिया।
  • पाताल लोक का वरदान: भगवान विष्णु महाबली की इस भक्ति और त्याग से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया। साथ ही, उन्होंने महाबली को यह वरदान भी दिया कि वे साल में एक बार अपनी प्रिय प्रजा से मिलने पृथ्वी पर आ सकेंगे। यही दिन केरल में ‘ओणम’ के रूप में मनाया जाता है। यह कथा हमें हिंदू धर्म की गहरी मान्यताओं की याद दिलाती है, जिनके बारे में आप हिंदू वेद और पुराणों से और जान सकते हैं।

How-To: ओणम का त्योहार पारंपरिक रूप से कैसे मनाएं?

चरण 1: पूकलम बनाना (How to make Pookalam design for Onam)

  • घर के आंगन को साफ करें।
  • विभिन्न प्रकार के ताजे फूलों (गेंदा, गुलाब, चमेली) की पंखुड़ियों को अलग-अलग कर लें।
  • एक गोलाकार डिजाइन से शुरू करें और हर दिन उसमें फूलों की एक नई परत जोड़ते जाएं।

चरण 2: ओणम सद्या की तैयारी (Preparing Onam Sadhya)

  • ओणम सद्या केले के पत्ते पर परोसी जाने वाली एक भव्य दावत है। इसमें 26 से भी अधिक शाकाहारी व्यंजन होते हैं।
  • प्रमुख व्यंजनों में सांभर, रसम, अवियल, थोरन, ओलन, कालान, पचड़ी, खिचड़ी, पायसम और केले के चिप्स शामिल हैं।

चरण 3: पारंपरिक वेशभूषा पहनना (Onam Festival Dress Code)

  • महिलाएं पारंपरिक रूप से सफेद या ऑफ-व्हाइट रंग की साड़ी पहनती हैं जिस पर सुनहरा बॉर्डर होता है, इसे ‘कसावु साड़ी’ कहते हैं।
  • पुरुष ‘मुंडू’ पहनते हैं, जो कमर के चारों ओर पहनी जाने वाली एक धोती होती है।

चरण 4: पारंपरिक नृत्य और खेल

  • महिलाएं पूकलम के चारों ओर ‘थिरुवाथिरा कली’ नामक पारंपरिक नृत्य करती हैं।
  • पुरुष ‘पुलीकली’ (बाघ नृत्य) और अन्य पारंपरिक खेलों में भाग लेते हैं।

ओणम से जुड़े कुछ और महत्वपूर्ण लेख –


तुलनात्मक सारणी: ओणम बनाम पोंगल

ये दोनों ही दक्षिण भारत के प्रमुख फसल उत्सव हैं, लेकिन इनमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं।

विशेषताओणम (Onam)पोंगल (Pongal)
राज्यमुख्य रूप से केरल में मनाया जाता है।मुख्य रूप से तमिलनाडु में मनाया जाता है।
समयमलयालम कैलेंडर के चिंगम माह (अगस्त-सितंबर) में।तमिल कैलेंडर के थाई माह (जनवरी) में।
अवधि10 दिनों का उत्सव।4 दिनों का उत्सव।
प्रमुख देवता/कहानीराजा महाबली के स्वागत और भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ा है।सूर्य देव और मवेशियों को धन्यवाद देने का त्योहार है।
मुख्य व्यंजनओणम सद्या (केले के पत्ते पर 26+ व्यंजन)।पोंगल (चावल, दाल और दूध से बना मीठा और नमकीन व्यंजन)।
प्रमुख आकर्षणपूकलम (फूलों की रंगोली), वल्लम काली (नौका दौड़)।जल्लीकट्टू (बैल को काबू करने का खेल), कोलम (चावल के आटे की रंगोली)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: When is Onam festival in 2025 in Kerala?
उत्तर: ओणम उत्सव 2025 में 27 अगस्त से शुरू होगा, और इसका मुख्य दिन, थिरुवोनम, 5 सितंबर 2025, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

प्रश्न 2: ओणम में पूकलम क्यों बनाया जाता है?
उत्तर: पूकलम (फूलों की रंगोली) राजा महाबली के स्वागत के लिए बनाई जाती है। माना जाता है कि इसकी सुंदरता और सुगंध से आकर्षित होकर राजा महाबली हर घर में पधारते हैं।

प्रश्न 3: ओणम सद्या में कितने व्यंजन होते हैं?
उत्तर: एक पारंपरिक ओणम सद्या में 26 से भी अधिक प्रकार के शाकाहारी व्यंजन होते हैं, जिन्हें केले के पत्ते पर एक विशेष क्रम में परोसा जाता है।

प्रश्न 4: वल्लम काली क्या है?
उत्तर: वल्लम काली ओणम के दौरान आयोजित होने वाली एक पारंपरिक सर्प-नौका दौड़ है। यह केरल की संस्कृति का एक बहुत ही रोमांचक और महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रश्न 5: ओणम का त्योहार कौन मना सकता है?
उत्तर: ओणम एक धर्मनिरपेक्ष त्योहार है। यह किसी विशेष धर्म से नहीं, बल्कि फसल और संस्कृति से जुड़ा है, इसलिए इसे केरल में सभी धर्मों के लोग बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं।

निष्कर्ष

ओणम केवल एक छुट्टी या उत्सव नहीं है; यह केरल की विरासत, एकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का एक जीवंत प्रमाण है। when is Onam festival in 2025 in Kerala का उत्तर जानने के बाद, आप भी इस भव्य उत्सव की तैयारी शुरू कर सकते हैं। यह त्योहार हमें सिखाता है कि दान, त्याग और प्रजा के प्रति प्रेम का स्थान सर्वोच्च होता है, और इसी भावना का सम्मान करने के लिए स्वयं भगवान भी नतमस्तक हो जाते हैं।

एलावरक्कम एंते ह्रुदयं निरंजा ओणाശംसകൾ! (आप सभी को मेरे हृदय से ओणम की शुभकामनाएं!)

(Disclaimer: यह लेख पंचांग और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है। तिथियों में मामूली भिन्नता हो सकती है।)

KAMLESH VERMA

दैनिक भास्कर और पत्रिका जैसे राष्ट्रीय अखबार में बतौर रिपोर्टर सात वर्ष का अनुभव रखने वाले कमलेश वर्मा बिहार से ताल्लुक रखते हैं. बातें करने और लिखने के शौक़ीन कमलेश ने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से अपना ग्रेजुएशन और दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है. कमलेश वर्तमान में साऊदी अरब से लौटे हैं। खाड़ी देश से संबंधित मदद के लिए इनसे संपर्क किया जा सकता हैं।

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