दशहरा 2026: रावण दहन, विजय मुहूर्त व शमी पूजन समय चक्र
⏳ 20 अक्टूबर 2026: दिनभर के प्रमुख शुभ मुहूर्तों की समय तालिका
(काशी पंचांग गणना)| मुहूर्त का नाम | सटीक समय | कुल अवधि | महत्व व शास्त्रोक्त फल |
|---|---|---|---|
| महा-विजय मुहूर्त | दोपहर 01:58 PM – 02:44 PM | 46 मिनट | शस्त्र पूजन, शमी वृक्ष पूजन व नया कार्य प्रारंभ |
| अपराह्न पूजा समय | दोपहर 01:13 PM – 03:30 PM | 2 घंटे 17 मिनट | अपराजिता देवी प्रतिष्ठा व बही-खाता पूजन |
| रावण दहन प्रदोष काल | शाम 05:46 PM – 08:24 PM | 2 घंटे 38 मिनट | रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद पुतला दहन |
| श्रवण नक्षत्र संयोग | प्रातः 07:12 AM से 21 Oct | 23 घंटे 36 मिनट | सोना, वाहन, नई संपत्ति व विजय यात्रा योग |
Dussehra 2026: दशहरा कब है? 20 अक्टूबर रावण दहन का शुभ मुहूर्त, विजय मुहूर्त व शमी पूजन विधि
यदि आपके मन में सवाल है कि Dussehra 2026 kab hai (दशहरा 2026 में कब है), तो सनातन धर्म के वैदिक पंचांग व निर्णयसिंधु अनुसार वर्ष 2026 में दशहरा (विजयादशमी महापर्व) मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को पूरे देश में श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया जाएगा। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को रात्रि 09:30 PM पर शुरू होगी और 20 अक्टूबर 2026 को रात्रि 08:44 PM पर समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार 20 अक्टूबर को ही सूर्योदय कालीन दशमी तिथि मान्य होगी। इस दिन का अत्यंत दुर्लभ विजय मुहूर्त दोपहर 01:58 PM से 02:44 PM (कुल 46 मिनट) रहेगा और रावण दहन का श्रेष्ठ प्रदोष काल मुहूर्त शाम 05:46 PM से रात्रि 08:24 PM तक रहेगा।

चित्र: Dussehra 2026 kab hai – 20 अक्टूबर रावण दहन व विजय मुहूर्त संपूर्ण पंचांग तालिका (NewsMug.in)
📑 इस महा-आलेख की विषय सूची (Table of Contents)
- 1. Dussehra 2026 Kab Hai: तिथि, दिन व पंचांग की सही गणना
- 2. Dussehra 2026 Vijay Muhurat: विजयादशमी पर ‘विजय मुहूर्त’ का समय व महत्व
- 3. Dussehra 2026 Ravan Dahan Shubh Muhurat: 20 अक्टूबर रावण दहन का शुभ मुहूर्त
- 4. श्रवण नक्षत्र और दशमी तिथि का दुर्लभ महासंयोग
- 5. शमी पूजन विधि, महत्व और प्रामाणिक वैदिक मंत्र
- 6. अपराजिता देवी पूजन व विजय तिलक की विधि
- 7. शस्त्र पूजन (Shastra Puja) की प्राचीन सनातन परंपरा व नियम
- 8. वीडियो गाइड: दशहरा पूजन व रावण दहन का शुभ समय
- 9. नीलकंठ पक्षी दर्शन और पान खाने की परंपरा का रहस्य
- 10. 10 बुराइयों के विनाश का पर्व: रावण के 10 सिरों का प्रतीक
- 11. दशहरा 2026 पर अक्सर पूछे जाने वाले 10 प्रश्न (FAQs)
- 12. अंतिम संपादकीय निष्कर्ष: अधर्म पर धर्म की शाश्वत विजय
🚩 1. Dussehra 2026 Kab Hai: तिथि, दिन व पंचांग की सही गणना
सनातन धर्म में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी या दशहरा (Dussehra) कहा जाता है। यह महापर्व नवरात्रि के नौ दिनों के उपवास और माँ दुर्गा की आराधना के तुरंत बाद मनाया जाता है। हर वर्ष लाखों भक्तों के मन में संशय रहता है कि Dussehra 2026 kab hai और किस दिन रावण दहन होगा।
वर्ष 2026 में आश्विन शुक्ल दशमी तिथि का आरंभ सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को रात्रि 09:30 PM पर होगा और यह तिथि मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को रात्रि 08:44 PM पर समाप्त होगी।
शास्त्रों और काशी पंचांग के नियमानुसार, जिस दिन दशमी तिथि का सूर्योदय होता है, उसी दिन विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। चूंकि 20 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय के समय दशमी तिथि विद्यमान रहेगी और अपराह्न काल व प्रदोष काल भी 20 अक्टूबर को ही प्राप्त हो रहा है, अतः Dussehra 2026 kab hai का शास्त्रसम्मत उत्तर 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) है।
नवरात्रि महापर्व के संपूर्ण घटस्थापना और तिथियों के विश्लेषण के लिए आप हमारे विस्तृत शोध आलेख शारदीय नवरात्रि 2026 घटस्थापना शुभ मुहूर्त व 9 दिन 9 शुभ रंग को भी अवश्य पढ़ें।
⏳ 2. Dussehra 2026 Vijay Muhurat: विजयादशमी पर ‘विजय मुहूर्त’ 2026 का समय व महत्व
विजयादशमी के दिन सबसे महत्वपूर्ण काल ‘विजय मुहूर्त’ (Vijay Muhurat) होता है। धर्मसिंधु के अनुसार, दोपहर के समय जब सूर्य आकाश के मध्य में होता है, तब 48 मिनट का ऐसा समय आता है जिसमें किया गया कोई भी संकल्प, नया कार्य, व्यापार आरंभ या यात्रा कभी निष्फल नहीं होती। Dussehra 2026 kab hai की खोज करने वाले पाठकों को विजय मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
20 अक्टूबर 2026: विजय मुहूर्त का सटीक समय
दोपहर 01:58 PM से दोपहर 02:44 PM तक
कुल अवधि: 46 मिनट | इस काल में शमी पूजन और शस्त्र पूजन करना सर्वोत्तम है।
दोपहर 01:13 PM से दोपहर 03:30 PM तक
कुल अवधि: 2 घंटे 17 मिनट | अपराजिता देवी पूजन व विजय यात्रा का समय।
🔥 3. Dussehra 2026 Ravan Dahan Shubh Muhurat: 20 अक्टूबर रावण दहन का शुभ समय (प्रदोष काल)
रावण दहन हमेशा प्रदोष काल (सूर्यास्त के तुरंत बाद का समय) में किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जब दिन और रात का मिलन हो रहा होता है और अंधेरा छाने लगता है, तब अधर्म के प्रतीक रावण के पुतले का दहन करके बुराई पर अच्छाई की विजय का उद्घोष किया जाता है।
दशहरा के ठीक 20 दिन बाद आने वाले दीपों के महापर्व की तिथि व लक्ष्मी पूजन मुहूर्त जानने के लिए आप हमारा विशेष लेख दिवाली 2026 में कब है व लक्ष्मी पूजन मुहूर्त अवश्य पढ़ें।
✨ 4. श्रवण नक्षत्र और दशमी तिथि का दुर्लभ महासंयोग
हिंदू ज्योतिष में दशहरे के दिन श्रवण नक्षत्र (Shravana Nakshatra) का मिलना अत्यंत दुर्लभ और मंगलकारी संयोग माना जाता है। भगवान श्री राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पूर्व श्रवण नक्षत्र और विजय मुहूर्त में ही प्रस्थान किया था।
वर्ष 2026 में 20 अक्टूबर को प्रातः 07:12 AM से श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा, जो अगले दिन 21 अक्टूबर को प्रातः 06:48 AM तक रहेगा। यानी विजयादशमी का पूरा दिन और प्रदोष काल श्रवण नक्षत्र से सुशोभित रहेगा। इस योग में नए व्यवसाय की शुरुआत, वाहन क्रय, गृह प्रवेश या नया निवेश करना अत्यधिक समृद्धि प्रदान करने वाला होता है।
विजयादशमी व रावण वध की संपूर्ण पौराणिक गाथा व शास्त्रीय परंपराओं के लिए आप विजयादशमी का सनातन इतिहास व परंपराएं (विकिपीडिया संदर्भ) और निर्णयसिंधु ग्रंथों का प्रामाणिक संदर्भ भी देख सकते हैं।
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🌿 5. शमी पूजन विधि, महत्व और प्रामाणिक वैदिक मंत्र
विजयादशमी पर शमी वृक्ष (Shami Tree) का पूजन करने की परंपरा युगों पुरानी है। महाभारत में जब पांडवों को 1 वर्ष का अज्ञातवास मिला था, तब उन्होंने अपने सभी दिव्यास्त्र (गांडीव धनुष सहित) शमी के विशाल वृक्ष में छिपाए थे। अज्ञातवास पूरा होने पर दशहरे के दिन उन्होंने शमी वृक्ष की पूजा कर अपने अस्त्र पुनः धारण किए और कौरवों पर विजय प्राप्त की थी।
शमी पूजन का पवित्र श्लोक व मंत्र:
धारिण्यर्जुनबाणानां रामस्य प्रियवादिनी॥
करिष्यमाणयात्राया यथाकालं सुखं मया।
तत्रनिर्विघ्नकर्त्रीत्वं भव श्रीरामपूजिते॥”
शमी पूजन की विधि: दशहरे के दिन विजय मुहूर्त (दोपहर 01:58 से 02:44 PM) में पूर्व या उत्तर दिशा में स्थित शमी वृक्ष के पास जाएं। वृक्ष के मूल में जल अर्पित करें, रोली, अक्षत, धूप, दीप और मिष्ठान्न चढ़ाएं। पूजन के बाद शमी के कुछ पत्ते तोड़कर घर लाएं और अपनी तिजोरी या पूजा स्थल में रखें। इसे ‘सोना पत्ता’ कहा जाता है, जो घर में सालभर बरकत बनाए रखता है।
🌸 6. अपराजिता देवी पूजन व विजय तिलक की विधि
विजयादशमी के दिन अपराह्न काल में माँ अपराजिता (देवी दुर्गा का अजेय स्वरूप) की पूजा का विधान है। मान्यता है कि जो व्यक्ति दशहरे के दिन अपराजिता देवी की पूजा करता है, उसे वर्षभर किसी भी क्षेत्र में पराजय का सामना नहीं करना पड़ता।
- घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में स्वच्छ स्थान पर अष्टदल कमल बनाएं।
- कमल के मध्य में माँ अपराजिता की प्रतिष्ठा करें और “ॐ अपराजितायै नमः” मंत्र से आह्वान करें।
- उन्हें नीले अपराजिता के फूल, चंदन, अक्षत और भोग अर्पित करें।
- परिवार के सभी सदस्यों के माथे पर विजय तिलक (रोली और अक्षत का तिलक) लगाकर लंबी आयु व सफलता की कामना करें।
⚔️ 7. शस्त्र पूजन (Shastra Puja) की प्राचीन सनातन परंपरा व नियम
विजयादशमी क्षत्रियों और राष्ट्र रक्षकों का प्रमुख पर्व है। इस दिन भारतीय सेना, पुलिस बल, और सनातन धर्मी अपने अस्त्र-शस्त्रों की विधि-विधान से पूजा करते हैं। आज के आधुनिक युग में व्यापारी अपने औजारों, किसान अपने हलों, और वाहन चालक अपनी गाड़ियों की पूजा करते हैं।
शस्त्र शुद्धि
शस्त्रों को गंगाजल से शुद्ध कर उन पर हल्दी, कुमकुम और मौली धागा बांधा जाता है।
वाहन पूजन
कार, बाइक व व्यावसायिक वाहनों पर स्वास्तिक बनाकर गेंदे के फूलों की माला पहनाई जाती है।
कलम व बही-खाता
विद्यार्थी अपनी पुस्तकों और व्यापारी अपनी खाता-पुस्तकों की पूजा कर विजय प्रार्थना करते हैं।
📹 वीडियो गाइड: Dussehra 2026 Kab Hai | Vijayadashami Shubh Muhurat & Ravan Dahan
100% Mobile & Desktop Equal Size (16:9)🕊️ 9. नीलकंठ पक्षी दर्शन और पान खाने की परंपरा का रहस्य
विजयादशमी के दिन दो प्राचीन लोक-परंपराएं अत्यंत प्रसिद्ध हैं:
🕊️ नीलकंठ तुम नीले रहियो, दूध-भात का भोजन करियो
मान्यता है कि भगवान श्री राम जब रावण से युद्ध करने निकले थे, तब उन्हें नीलकंठ पक्षी के दर्शन हुए थे। नीलकंठ को भगवान शिव का प्रतिनिधि माना जाता है। दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन होने से पूरे वर्ष भाग्य का साथ मिलता है और घर में सुख-शांति रहती है।
🍃 दशहरे पर मीठा पान खाने का वैज्ञानिक व धार्मिक महत्व
दशहरे के दिन मीठा बीड़ा (पान) खाने की परंपरा है। धार्मिक रूप से पान को विजय और सत्कार का प्रतीक माना जाता है। वहीं वैज्ञानिक रूप से शरद ऋतु के प्रारंभ में पाचन तंत्र को संतुलित करने और मौसमी बदलाव से शरीर को सुरक्षित रखने में पान के पत्ते अत्यंत गुणकारी होते हैं।
🏹 10. 10 बुराइयों के विनाश का पर्व: रावण के 10 सिरों का प्रतीक
दशहरा केवल एक ऐतिहासिक घटना का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर मौजूद 10 नकारात्मक प्रवृत्तियों को समाप्त करने का आध्यात्मिक पर्व है। रावण के 10 सिर मानव मन के 10 विकारों का प्रतिनिधित्व करते हैं:
❓ 11. दशहरा 2026 पर अक्सर पूछे जाने वाले 10 प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: Dussehra 2026 kab hai: दशहरा 2026 में किस दिन और किस तारीख को मनाया जाएगा?
उत्तर: Dussehra 2026 kab hai का प्रामाणिक उत्तर है मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026। आश्विन शुक्ल दशमी तिथि 19 अक्टूबर को रात 09:30 बजे से 20 अक्टूबर रात 08:44 बजे तक रहेगी। उदयातिथि व प्रदोष काल के अनुसार 20 अक्टूबर को ही विजयादशमी और रावण दहन मान्य है।
प्रश्न 2: 20 अक्टूबर को रावण दहन का सही समय क्या है?
उत्तर: रावण दहन का शुभ मुहूर्त सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में शाम 05:46 PM से रात्रि 08:24 PM तक रहेगा (कुल अवधि: 2 घंटे 38 मिनट)।
प्रश्न 3: विजयादशमी पर ‘विजय मुहूर्त’ का समय क्या है?
उत्तर: विजय मुहूर्त दोपहर 01:58 PM से दोपहर 02:44 PM तक (46 मिनट) रहेगा। इस काल में नया कार्य आरंभ करना या शमी पूजन करना सर्वसिद्धिदायक होता है।
प्रश्न 4: क्या दशहरे के दिन वाहन खरीदना शुभ होता है?
उत्तर: जी हाँ! विजयादशमी को सनातन परंपरा में ‘अबूझ मुहूर्त’ (स्वयं सिद्ध मुहूर्त) माना जाता है। इस दिन वाहन, सोना, भूमि या नई संपत्ति खरीदना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है।
प्रश्न 5: दुर्गा विसर्जन (सिंदूर खेला) किस दिन होगा?
उत्तर: माँ दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन और सिंदूर खेला भी 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को प्रातः काल से दोपहर तक संपन्न किया जाएगा।
🏁 12. अंतिम संपादकीय निष्कर्ष: अधर्म पर धर्म की शाश्वत विजय
विजयादशमी का पावन पर्व हमें स्मरण कराता है कि अहंकार और अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न प्रतीत हो, सत्य, मर्यादा और धर्म के समक्ष उसका पराभव निश्चित है। 20 अक्टूबर 2026 को रावण के पुतले के साथ अपने अंतर्मन के विकारों को भी भस्म करने का संकल्प लें।
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