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Home - त्योहारों और परंपराओं - Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि कब से शुरू है? जानें कलश स्थापना शुभ मुहूर्त, घटस्थापना विधि, 9 दिन 9 रंग व पूजा नियम
त्योहारों और परंपराओं KAMLESH VERMABy KAMLESH VERMA

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि कब से शुरू है? जानें कलश स्थापना शुभ मुहूर्त, घटस्थापना विधि, 9 दिन 9 रंग व पूजा नियम

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shardiya navratri 2026
shardiya navratri 2026
🚩 शारदीय नवरात्रि महापर्व • 2026
NewsMug.in
पंचांग व धर्म विशेषांक
NewsMug - We Serve Information
🔱 11 से 19 अक्टूबर 2026 • 9 दिन 9 देवियां 9 शुभ रंग • कन्या पूजन

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि

घटस्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त, कलश स्थापना विधि, 9 दिन के 9 रंग व संपूर्ण पूजा गाइड

📅
आरंभ तिथि
11 अक्टूबर 2026
⏰
घटस्थापना मुहूर्त
06:19 – 10:12 AM
✨
अभिजित मुहूर्त
11:44 – 12:31 PM
🏹
विजयादशमी
20 अक्टूबर 2026
NewsMug.in • 100% Equal Size • Desktop & Mobile Friendly

🚩 शक्ति साधना महापर्व • 2026

Shardiya Navratri 2026: 9 दिन 9 देवियां, शुभ रंग व घटस्थापना मुहूर्त

11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक: पंचांग मुहूर्त, नौ भोग व संपूर्ण व्रत नियम

पंचांग संकलन: NewsMug.in धर्म डेस्क
नवरात्रि प्रारंभ
11 अक्टूबर 2026
रविवार (प्रतिपदा)
घटस्थापना मुहूर्त
06:19 – 10:12 AM
अवधि: 3 घंटे 53 मिनट
अभिजित मुहूर्त
11:44 – 12:31 PM
अवधि: 47 मिनट
विजयादशमी
20 अक्टूबर 2026
मंगलवार (दशहरा)

✨ 9 दिन, 9 देवियां, शुभ रंग और प्रिय भोग

(मोबाइल पर दाएं-बाएं स्क्रॉल करें ↔)
तारीख व दिन माँ का स्वरूप शुभ रंग (9 Colors) प्रिय भोग
11 Oct (रवि) माँ शैलपुत्री नारंगी (Orange) गाय का शुद्ध घी
12 Oct (सोम) माँ ब्रह्मचारिणी सफेद (White) शक्कर व पंचामृत
13 Oct (मंगल) माँ चंद्रघंटा लाल (Red) दूध की खीर
14 Oct (बुध) माँ कूष्मांडा रॉयल ब्लू (Blue) मालपुआ
15 Oct (गुरु) माँ स्कंदमाता पीला (Yellow) केले का फल
16 Oct (शुक्र) माँ कात्यायनी हरा (Green) शुद्ध शहद
17 Oct (शनि) माँ कालरात्रि ग्रे (Grey) गुड़ का नैवेद्य
18 Oct (रवि) माँ महागौरी (दुर्गा अष्टमी) पर्पल (Purple) नारियल व हलवा
19 Oct (सोम) माँ सिद्धिदात्री (महानवमी) मयूर हरा (Peacock) चना व हलवा-पूरी
सर्वाधिकार सुरक्षित • NewsMug.in सनातन पंचांग
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता

पंचांग व धर्म विशेषांक 2026 • प्रकाशित: 05 अक्टूबर 2026 • लेखक: पंडित राधेश्याम चतुर्वेदी (वरिष्ठ ज्योतिष व पंचांग विशेषज्ञ) • स्रोत: निर्णयसिंधु, धर्मसिंधु एवं काशी विश्वनाथ पंचांग

संपादकीय सारांश: सनातन धर्म में शक्ति साधना का सबसे पावन और दिव्य महापर्व शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri 2026) इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026 (रविवार) से प्रारंभ होकर 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) तक पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसके अगले दिन 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) का त्योहार होगा। नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) से माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों (नवदुर्गा) की आराधना शुरू होती है। इस 5,400+ शब्दों के विस्तृत पंचांग डॉसियर में हमने कलश स्थापना का 3 घंटे 53 मिनट का मुख्य शुभ मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त, कलश स्थापना की संपूर्ण विधि, 9 दिनों के 9 शुभ रंग (9 Colors), दिनवार भोग, अखंड ज्योति के नियम, कन्या पूजन और व्रत पारण की हर एक शास्त्रीय जानकारी संकलित की है।

नवरात्रि प्रारंभ तिथि
11 अक्टूबर 2026
रविवार (प्रतिपदा घटस्थापना)
घटस्थापना शुभ मुहूर्त
06:19 – 10:12 AM
अवधि: 3 घंटे 53 मिनट
महाअष्टमी व नवमी
18 व 19 अक्टूबर
कन्या पूजन व महानवमी हवन
विजयादशमी (दशहरा)
20 अक्टूबर 2026
मंगलवार (रावण दहन)

आलेख की संपूर्ण विषय-सूची (Table of Contents)

  1. 1. शारदीय नवरात्रि 2026: तिथि, दिन व पंचांग की सही गणना
  2. 2. घटस्थापना (कलश स्थापना) का सबसे शुभ मुहूर्त व अभिजित मुहूर्त
  3. 3. चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का पंचांग विश्लेषण (निर्णयसिंधु मत)
  4. 4. कलश स्थापना की संपूर्ण शास्त्रीय विधि (Step-by-Step Guide)
  5. 5. नवरात्रि पूजा सामग्री की संपूर्ण चेकलिस्ट (A to Z Samagri List)
  6. 6. 9 दिन, 9 देवियां, 9 भोग और 9 शुभ रंग (Day-by-Day Table)
  7. 7. अखंड ज्योति प्रज्वलित करने के 7 अनिवार्य शास्त्रीय नियम
  8. 8. नवरात्रि व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं (Fasting Food Rules)
  9. 9. दुर्गा अष्टमी और महानवमी 2026: कन्या पूजन विधि व नियम
  10. 10. नवरात्रि व्रत पारण का सही समय और शास्त्रीय विधि
  11. 11. माँ अम्बे गौरी की पावन आरती व दैनिक मंत्र
  12. 12. शारदीय नवरात्रि 2026 पर अक्सर पूछे जाने वाले 10 प्रश्न (FAQs)
  13. 13. अंतिम संपादकीय निष्कर्ष: शक्ति साधना का कल्याणकारी महत्व

🚩 1. शारदीय नवरात्रि 2026: तिथि, दिन व पंचांग की सही गणना

सनातन धर्म में वर्ष में कुल चार नवरात्रियां आती हैं—चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रियां (माघ व आषाढ़)। इनमें आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) का महत्व सबसे अधिक माना गया है, क्योंकि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने लंका विजय से पूर्व माँ दुर्गा के नौ रूपों की नौ दिनों तक कठिन उपासना की थी और दसवें दिन रावण का वध करके धर्म की पुनर्स्थापना की थी।

वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ होकर सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 10 अक्टूबर 2026 को रात्रि 09:19 PM पर होगा और यह 11 अक्टूबर 2026 को रात्रि 09:30 PM पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में ‘उदयातिथि’ (सूर्योदय कालीन तिथि) को मान्यता दी जाती है, इसलिए 11 अक्टूबर 2026 को ही प्रतिपदा तिथि का सूर्योदय होगा और इसी दिन कलश स्थापना की जाएगी।

आगामी महापर्वों के प्रामाणिक पंचांग विश्लेषण के लिए आप हमारे दिवाली 2026 में कब है व लक्ष्मी पूजन मुहूर्त का विशेष लेख भी पढ़ सकते हैं।

⏳ 2. घटस्थापना (कलश स्थापना) का सबसे शुभ मुहूर्त 2026

घटस्थापना हमेशा शुभ लग्न, शुभ चौघड़िया और अनुकूल नक्षत्र में की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, प्रतिपदा तिथि के प्रथम एक-तिहाई भाग (प्रथम प्रहर) में द्वि-स्वभाव लग्न (कन्या लग्न) के दौरान कलश स्थापित करना सर्वोत्तम माना गया है:

11 अक्टूबर 2026: घटस्थापना के दो महा-मुहूर्त

काशी पंचांग सम्मत
मुहूर्त 1 (मुख्य व सर्वोत्तम प्रातःकालीन मुहूर्त):
सुबह 06:19 AM से सुबह 10:12 AM
कुल अवधि: 3 घंटे 53 मिनट | लग्न: कन्या लग्न (द्वि-स्वभाव लग्न)
मुहूर्त 2 (अभिजित मुहूर्त — अत्यंत शुभ):
दोपहर 11:44 AM से दोपहर 12:31 PM
कुल अवधि: 47 मिनट | भगवान विष्णु का सर्वदोषनाशक मुहूर्त

📜 3. चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का पंचांग विश्लेषण

धार्मिक ग्रंथों जैसे ‘निर्णयसिंधु’ और ‘देवी पुराण’ में उल्लेख आता है कि चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के समय घटस्थापना करने से बचना चाहिए। 11 अक्टूबर 2026 को चित्रा नक्षत्र रात्रि 10:32 PM तक रहेगा और वैधृति योग रात्रि 09:05 PM तक रहेगा।

परंतु निर्णयसिंधु का स्पष्ट नियम है कि यदि चित्रा या वैधृति योग पूरे दिन व्याप्त रहे, तो अभिजीत मुहूर्त अथवा प्रातःकाल के द्वि-स्वभाव लग्न (कन्या लग्न) में घटस्थापना अवश्य की जा सकती है। प्रातः 06:19 AM से 10:12 AM तक का समय सूर्योदय कालीन पवित्र वेला है, जिसमें पूजा करने से किसी प्रकार का दोष नहीं लगता।

🏺 4. कलश स्थापना की संपूर्ण शास्त्रीय विधि (Step-by-Step Vidhi)

कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक और समस्त तीर्थों का निवास माना जाता है। घटस्थापना की सही क्रमवार विधि निम्नलिखित है:

चरण 1 (स्थान शुद्धि): ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। वहां लकड़ी की चौकी स्थापित कर उस पर लाल या पीला नया वस्त्र बिछाएं।
चरण 2 (जौ बोना): मिट्टी के एक बड़े उथले पात्र में शुद्ध मिट्टी और बालू मिलाकर रखें। उसमें सात प्रकार के अनाज या जौ (यव) के दाने समान रूप से बिखेरें और थोड़ा सा जल छिड़कें।
चरण 3 (कलश तैयार करना): तांबे या मिट्टी के कलश पर रोली से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं और गले में कलावा (मौली) बांधें। कलश में शुद्ध जल व थोड़ा गंगाजल भरें। उसमें एक सिक्का, सुपारी, अक्षत, हल्दी की गांठ और इत्र डालें।
चरण 4 (पल्लव व नारियल): कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते रखें। एक जटा वाले पानीदार नारियल को लाल कपड़े या चुनरी में लपेटकर कलावा बांधें और उसे कलश के ऊपर इस प्रकार स्थापित करें कि उसका मुख पूजा करने वाले की ओर हो।
चरण 5 (आवाहन व दीप प्रज्वलन): हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर वरुण देवता और माँ भगवती का ध्यान करें: “कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः। मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः॥” इसके बाद अखंड ज्योति या घी का दीपक प्रज्वलित करें।

📹 वीडियो गाइड: Shardiya Navratri 2026 Kab Hai | Durga Puja kab se Shuru Hai

100% Mobile & Desktop Equal Size (16:9)
⏱️ भाग 1 (00:00 – 03:45)
नवरात्रि 2026 शुरुआत व कलश स्थापना तिथि
11 अक्टूबर प्रतिपदा उदयातिथि व शुभ चौघड़िया
⏱️ भाग 2 (03:46 – 08:30)
कन्या लग्न व अभिजित घटस्थापना मुहूर्त
प्रातः 06:19 से 10:12 AM तक संपूर्ण विधि
⏱️ भाग 3 (08:31 – समाप्ति)
दुर्गा पूजा, अष्टमी, नवमी व विसर्जन तिथियां
कन्या पूजन नियम व अखंड ज्योति संकल्प विधि

🛒 5. नवरात्रि पूजा सामग्री की संपूर्ण चेकलिस्ट (A to Z Samagri)

घटस्थापना व मूल पूजा सामग्री:

  • मिट्टी या तांबे का कलश व ढक्कन
  • जौ बोने के लिए मिट्टी का बड़ा सकोरा
  • शुद्ध खेत की मिट्टी या बालू
  • जौ (यव) और गंगाजल
  • आम या अशोक के 7 ताजे पत्ते
  • जटा वाला नारियल व कलावा (मौली)
  • रोली, चंदन, कुमकुम, हल्दी की गांठ
  • सुपारी, लौंग, इलायची, सिक्के

माँ दुर्गा का श्रृंगार व नैवेद्य:

  • माँ दुर्गा की सुंदर प्रतिमा या चित्रपट
  • लाल चुनरी, साड़ी और 16 श्रृंगार सामग्री
  • शुद्ध देसी गाय का घी व तिल का तेल
  • अखंड ज्योति के लिए बड़ा पीतल का दीपक व रुई की बत्ती
  • धूप, अगरबत्ती, कपूर और हवन सामग्री
  • लाल गुड़हल के फूल और कमल का पुष्प
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल)
  • फल, बताशे, पंचमेवा और मिश्री

🌈 6. 9 दिन, 9 देवियां, 9 भोग और 9 शुभ रंग (Day-by-Day Table)

नवरात्रि के नौ दिनों में माँ भगवती के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक दिन का एक विशिष्ट रंग और प्रिय भोग होता है। मान्यता है कि उस दिन के शुभ रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करने से माँ दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देती हैं:

नवरात्रि 2026: 9 देवियां, शुभ रंग व भोग सारणी (मोबाइल में टेबल को बाएं-दाएं स्क्रॉल करें ↔)
दिन व तारीख माँ का स्वरूप शुभ रंग (Lucky Color) प्रिय भोग विशेष बीज मंत्र
दिन 1: 11 Oct (रवि) माँ शैलपुत्री (प्रतिपदा) नारंगी (Orange) गाय का शुद्ध घी ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
दिन 2: 12 Oct (सोम) माँ ब्रह्मचारिणी (द्वितीया) सफेद (White) शक्कर व पंचामृत ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
दिन 3: 13 Oct (मंगल) माँ चंद्रघंटा (तृतीया) लाल (Red) दूध की खीर ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
दिन 4: 14 Oct (बुध) माँ कूष्मांडा (चतुर्थी) रॉयल ब्लू (Royal Blue) मालपुआ ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
दिन 5: 15 Oct (गुरु) माँ स्कंदमाता (पंचमी) पीला (Yellow) पके केले ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः॥
दिन 6: 16 Oct (शुक्र) माँ कात्यायनी (षष्ठी) हरा (Green) शुद्ध शहद ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
दिन 7: 17 Oct (शनि) माँ कालरात्रि (सप्तमी) ग्रे (Grey) गुड़ का नैवेद्य ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
दिन 8: 18 Oct (रवि) माँ महागौरी (दुर्गा अष्टमी) पर्पल / बैंगनी (Purple) नारियल व हलवा-पूरी ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
दिन 9: 19 Oct (सोम) माँ सिद्धिदात्री (महानवमी) मयूर हरा (Peacock) चना व हलवा-पूरी ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

🪔 7. अखंड ज्योति जलाने के 7 अनिवार्य शास्त्रीय नियम

नवरात्रि में अखंड ज्योति प्रज्वलित करना अत्यंत फलदायी माना जाता है, परंतु इसके कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है:

  • स्थान व दिशा: अखंड ज्योति को चौकी के आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में रखना चाहिए। घी का दीपक हो तो देवी के दाईं ओर और तिल के तेल का हो तो बाईं ओर रखें।
  • बाती का चयन: अखंड ज्योति के लिए कलावे (कच्चे सूत) से बनी लंबी बाती का उपयोग करें।
  • घर खाली न छोड़ें: जिस घर में अखंड ज्योति जल रही हो, उस घर को पूरे 9 दिनों तक कभी भी पूरी तरह ताला लगाकर खाली नहीं छोड़ना चाहिए।
  • वायु से सुरक्षा: दीपक के ऊपर कांच की चिमनी या धातु का सुरक्षा आवरण अवश्य रखें ताकि पंखे या हवा से लौ न बुझे।
  • बाती बदलना: यदि बाती ठीक करनी हो, तो पहले एक छोटा दूसरा दीपक जलाएं और उसके बाद मुख्य बाती को धीरे से आगे बढ़ाएं।
  • पवित्रता: अखंड ज्योति के पास स्वच्छता और सात्विकता का पूर्ण ध्यान रखें।
  • समापन: नवमी के बाद ज्योति को स्वयं शांत होने दें, उसे कभी फूंक मारकर या हाथ से न बुझाएं।

🍎 8. नवरात्रि व्रत के नियम: क्या खाएं और क्या न खाएं?

✅ व्रत में क्या खा सकते हैं (स्वीकार्य फलाहार):

  • कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, राजगिरा का आटा
  • साबूदाना, समा के चावल (मोरधन), मखाना
  • सेंधा नमक (Rock Salt), काली मिर्च, जीरा, हरी मिर्च
  • आलू, शकरकंद, अरबी, कद्दू, लौकी, खीरा, टमाटर
  • दूध, दही, पनीर, छाछ, गाय का शुद्ध घी
  • सभी प्रकार के ताजे फल और सूखे मेवे (बादाम, काजू, किशमिश)

❌ व्रत में क्या पूर्णतः वर्जित है:

  • प्याज, लहसुन, मशरूम और तामसिक भोजन
  • साधारण सफेद आयोडीन नमक और समुद्री नमक
  • अनाज (गेहूं, चावल, मक्का, बाजरा, बेसन)
  • दालें (उड़द, चना, मूंग, मसूर, अरहर)
  • मांस, मछली, अंडा और मदिरा (शराब)
  • हल्दी, सरसों का तेल और हींग का अत्यधिक प्रयोग

👧 9. दुर्गा अष्टमी और महानवमी 2026: कन्या पूजन विधि

शारदीय नवरात्रि में दुर्गा अष्टमी (18 अक्टूबर) और महानवमी (19 अक्टूबर) के दिन कन्या पूजन (कंजक) करने की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार, 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याएं साक्षात माँ दुर्गा का स्वरूप होती हैं:

कन्याओं की संख्या: कुल 9 कन्याओं और साथ में एक छोटे बालक (जिन्हें बटुक भैरव व लंगूर कहा जाता है) को आमंत्रित करना चाहिए।

चरण 1: कन्याओं के घर आगमन पर दूध और जल से उनके चरण धोएं और साफ तौलिए से पोंछें।

चरण 2: सभी कन्याओं के मस्तक पर कुमकुम, अक्षत का तिलक लगाएं और कलाई पर कलावा (मौली) बांधें।

चरण 3: माँ के भोग स्वरूप बना हलवा, पूरी और काले चने का भोजन आदरपूर्वक परोसें।

चरण 4: भोजन के बाद फल, दक्षिणा (रुपये) और लाल चुनरी या उपहार देकर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

🌅 10. नवरात्रि व्रत पारण का सही समय और नियम

नवरात्रि व्रत का पारण महानवमी के दिन हवन और कन्या पूजन के पश्चात किया जाता है। जो लोग पूरे 9 दिनों का व्रत रखते हैं, वे मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 (विजयादशमी) के सूर्योदय के पश्चात सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत खोलते हैं। पारण में पहले माता का प्रसाद (हलवा, चना) और फिर सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।

🙏 11. माँ अम्बे गौरी की पावन आरती

॥ श्री अम्बे जी की आरती ॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी…
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥ ॐ जय अम्बे गौरी…
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥ ॐ जय अम्बे गौरी…
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी…
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥ ॐ जय अम्बे गौरी…
शूंभ-निशूंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥ ॐ जय अम्बे गौरी…
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ॐ जय अम्बे गौरी…
ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ॐ जय अम्बे गौरी…
चौंसठ योगिन गावत, नृत्य करत भैरु।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥ ॐ जय अम्बे गौरी…
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पति करता॥ ॐ जय अम्बे गौरी…
भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी…
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥ ॐ जय अम्बे गौरी…
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै॥ ॐ जय अम्बे गौरी…

❓ 12. शारदीय नवरात्रि 2026 पर अक्सर पूछे जाने वाले 10 प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू है?

उत्तर: शारदीय नवरात्रि 2026 रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को प्रतिपदा तिथि (घटस्थापना) से शुरू होकर सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को महानवमी के साथ समाप्त होगी।

प्रश्न 2: कलश स्थापना (घटस्थापना) का शुभ मुहूर्त क्या है?

उत्तर: 11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना का मुख्य मुहूर्त सुबह 06:19 AM से सुबह 10:12 AM तक है। इसके अलावा दोपहर में अभिजित मुहूर्त 11:44 AM से 12:31 PM तक रहेगा।

प्रश्न 3: क्या 2026 में नवरात्रि 8 दिन की है या 9 दिन की?

उत्तर: शारदीय नवरात्रि 2026 में पूरे 9 दिनों की है। किसी भी तिथि का क्षय नहीं है। प्रतिपदा 11 अक्टूबर से शुरू होकर नवमी 19 अक्टूबर को होगी और 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा।

प्रश्न 4: नवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा होती है और उनका रंग क्या है?

उत्तर: नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है और इस दिन का शुभ रंग नारंगी (Orange) है। माँ शैलपुत्री को गाय का शुद्ध घी अर्पित किया जाता है।

प्रश्न 5: दुर्गा अष्टमी 2026 में कब है?

उत्तर: दुर्गा महाअष्टमी रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन माँ महागौरी की पूजा और कन्या पूजन किया जाता है।

🌺 13. अंतिम संपादकीय निष्कर्ष: शक्ति साधना का कल्याणकारी संदेश

शारदीय नवरात्रि केवल उपवास का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर की तामसिक और आसुरी प्रवृत्तियों (क्रोध, लोभ, अहंकार) का संहार कर सात्विकता और आत्मिक शक्ति के जागरण का दिव्य अवसर है। माँ भगवती जगदम्बा आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति का संचार करें।

सनातन धर्म, पंचांग और राष्ट्रीय पर्वों के सबसे तेज, प्रामाणिक और विस्तृत विश्लेषण के लिए NewsMug.in के साथ जुड़े रहें।

RC

आलेख समीक्षा एवं सत्यापन: पंडित राधेश्याम चतुर्वेदी

वरिष्ठ ज्योतिष व पंचांग विशेषज्ञ, NewsMug.in। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से वैदिक ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र में स्नातकोत्तर। निर्णयसिंधु, धर्मसिंधु एवं प्रमुख भारतीय पंचांगों के आधार पर व्रत-पर्वों के मुहूर्त निर्धारण पर 22 वर्षों से प्रामाणिक मार्गदर्शन।

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KAMLESH VERMA
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दैनिक भास्कर और पत्रिका जैसे राष्ट्रीय अखबार में बतौर रिपोर्टर सात वर्ष का अनुभव रखने वाले कमलेश वर्मा बिहार से ताल्लुक रखते हैं. बातें करने और लिखने के शौक़ीन कमलेश ने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से अपना ग्रेजुएशन और दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है. कमलेश वर्तमान में साऊदी अरब से लौटे हैं। खाड़ी देश से संबंधित मदद के लिए इनसे संपर्क किया जा सकता हैं।

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