संपादकीय सारांश: 2 अक्टूबर 2026 को भारतवर्ष और संपूर्ण विश्व राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती (157th Gandhi Jayanti) अत्यंत श्रद्धा और गरिमा के साथ मना रहा है। इसी पावन दिन पर देश के दूसरे प्रधानमंत्री ‘सादगी के प्रतीक’ भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी की 122वीं जयंती भी मनाई जाती है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2 अक्टूबर को घोषित ‘अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ (International Day of Non-Violence) आज के युद्धग्रस्त और अशांत विश्व में शांति, सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण का सबसे बड़ा प्रकाशस्तंभ है। इस 5,300+ शब्दों के विस्तृत राष्ट्रीय डॉसियर में हमने गांधी जयंती का इतिहास, जीवन संघर्ष, स्कूलों के लिए तैयार भाषण, निबंध, बापू के 15 अनमोल विचार, 11 महाव्रत, स्वच्छ भारत दिवस और 10 रोचक तथ्यों का संपूर्ण संकलन प्रस्तुत किया है।
आलेख की संपूर्ण विषय-सूची (Table of Contents)
- 1. गांधी जयंती 2026: 2 अक्टूबर का महत्व और 157वीं जयंती का ऐतिहासिक पड़ाव
- 2. पोरबंदर से राजघाट तक: बापू का संपूर्ण जीवन परिचय व कालक्रम
- 3. स्वतंत्रता संग्राम के 5 महा-आंदोलन: चंपारण से भारत छोड़ो तक
- 4. संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस: वैश्विक शांति का प्रतीक
- 5. 2 अक्टूबर का दोहरा पर्व: लाल बहादुर शास्त्री जी की 122वीं जयंती
- 6. गांधी जयंती पर सर्वश्रेष्ठ भाषण (2 मिनट और 5 मिनट के भाषण स्क्रिप्ट)
- 7. गांधी जयंती पर उत्कृष्ट निबंध (स्कूल और कॉलेज परीक्षाओं के लिए)
- 8. महात्मा गांधी के 15 कालजयी अनमोल विचार (Quotes with Meaning)
- 9. साबरमती के 11 एकादश व्रत: बापू के जीवन जीने के मूलभूत नियम
- 10. स्वच्छता ही सेवा और स्वच्छ भारत मिशन: 2 अक्टूबर का संकल्प
- 11. महात्मा गांधी से जुड़े 10 अज्ञात व रोचक तथ्य (Mind-Blowing Facts)
- 12. गांधी जयंती 2026 पर अक्सर पूछे जाने वाले 10 प्रश्न (FAQs)
- 13. अंतिम संपादकीय निष्कर्ष: 21वीं सदी में गांधी दर्शन की प्रासंगिकता
🕊️ 1. गांधी जयंती 2026: 2 अक्टूबर का महत्व और 157वीं जयंती
प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को संपूर्ण भारतवर्ष अपने राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी के पावन जन्मदिवस को गांधी जयंती (Gandhi Jayanti) के रूप में मनाता है। वर्ष 2026 में हम बापू की 157वीं जयंती (157th Gandhi Jayanti) मना रहे हैं। भारत के संविधान और राजपत्र (Gazette of India) में 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) और 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के साथ 2 अक्टूबर को भारत के तीन आधिकारिक ‘राष्ट्रीय पर्वों’ (National Holidays) में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।
गांधी जयंती केवल एक अवकाश का दिन नहीं है, बल्कि यह आत्म-मंथन, सत्य की खोज और अहिंसा के मार्ग पर चलने के संकल्प का दिन है। एक ऐसा दुबला-पतला व्यक्ति, जिसके हाथ में केवल एक लाठी थी, बदन पर खादी की धोती और आंखों में सत्य का असीम तेज था, उसने बिना कोई तोप या बंदूक उठाए दुनिया के सबसे विशाल और क्रूर ब्रिटिश साम्राज्य की जड़े हिला दी थीं। आज 2 अक्टूबर के दिन पूरा देश नई दिल्ली स्थित राजघाट (Raj Ghat) पर बापू की समाधि पर पुष्प अर्पित करता है, जहां सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाता है।
देश के समसामयिक घटनाक्रम, सिनेमा और राष्ट्रीय विश्लेषण से जुड़े विशेष लेख पढ़ने के लिए आप हमारे Drishyam 3 रिलीज डेट व 2 अक्टूबर के रहस्य का विस्तृत विश्लेषण भी देख सकते हैं।
📖 2. पोरबंदर से राजघाट तक: बापू का संपूर्ण जीवन परिचय
महात्मा गांधी का जीवन एक सामान्य बालक से ‘महात्मा’ बनने की अद्भुत साधना की गाथा है। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर (सुदामापुरी) में एक प्रतिष्ठित गुजराती परिवार में हुआ था। उनके पिता करमचंद उत्तमचंद गांधी पोरबंदर रियासत के दीवान थे और माता पुतलीबाई एक अत्यंत धर्मपरायण, सात्विक और तपस्वी महिला थीं, जिनके संस्कारों ने बालक मोहनदास के अंतःकरण पर अमिट छाप छोड़ी।
📌 महात्मा गांधी का संक्षिप्त जीवन वृत्त:
1888 में गांधीजी कानून (Law) की पढ़ाई करने के लिए लंदन गए और 1891 में बैरिस्टर बनकर भारत लौटे। बंबई और राजकोट में वकालत में प्रारंभिक संघर्ष के बाद 1893 में वे एक मुकदमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका (South Africa) गए। यही वह भूमि थी जिसने एक साधारण वकील को दुनिया का सबसे बड़ा सत्याग्रही बना दिया।
⚡ 3. स्वतंत्रता संग्राम के 5 महा-आंदोलन: चंपारण से भारत छोड़ो तक
दक्षिण अफ्रीका में 21 वर्ष बिताने के बाद जब 9 जनवरी 1915 को गांधीजी भारत लौटे (जिस दिन को आज हम ‘प्रवासी भारतीय दिवस’ के रूप में मनाते हैं), तो उनके गुरु गोपाल कृष्ण गोखले ने उन्हें पूरे भारत का भ्रमण कर आम जनता की नब्ज पहचानने की सलाह दी। इसके बाद गांधीजी ने देश को ब्रिटिश दासता से मुक्त कराने के लिए 5 ऐतिहासिक आंदोलनों का नेतृत्व किया:
1. चंपारण सत्याग्रह (1917) — भारत का पहला सविनय अवज्ञा
बिहारबिहार के चंपारण में ब्रिटिश जमींदारों द्वारा ‘तिनकठिया प्रणाली’ के तहत किसानों को जबरन नील (Indigo) की खेती करने पर विवश किया जा रहा था। गांधीजी ने राजकुमार शुक्ल के आग्रह पर वहां पहुंचकर अहिंसक प्रतिरोध किया और अंग्रेजों को झुकने पर मजबूर कर दिया। यहीं से देश ने पहली बार सत्याग्रह की असीम शक्ति का साक्षात्कार किया।
2. खेड़ा सत्याग्रह एवं अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918)
गुजरातअकाल के बावजूद कर वसूली के खिलाफ खेड़ा के किसानों और अहमदाबाद के कपड़ा मिल मजदूरों को 35% बोनस दिलाने के लिए गांधीजी ने पहली बार ‘भूख हड़ताल’ (Hunger Strike) को हथियार बनाया, जिससे मजदूरों और किसानों में बापू के प्रति अटूट विश्वास पैदा हुआ।
3. असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement, 1920-1922)
राष्ट्रव्यापीरौलट एक्ट और 13 अप्रैल 1919 के बर्बर जलियांवाला बाग नरसंहार के विरोध में बापू ने असहयोग का आह्वान किया। वकीलों ने अदालतें छोड़ीं, छात्रों ने स्कूल-कॉलेज छोड़े और विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई। हालांकि, 5 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए यह विशाल आंदोलन तुरंत वापस ले लिया।
4. दांडी नमक सत्याग्रह व सविनय अवज्ञा (1930)
ऐतिहासिक मार्च12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से 78 अनुयायियों के साथ शुरू हुई 390 किलोमीटर की 24 दिवसीय पदयात्रा 6 अप्रैल को दांडी के समुद्र तट पर पहुंची। बापू ने समुद्र के पानी से एक मुट्ठी नमक बनाकर अंग्रेजों के नमक एकाधिकार और कानून को तोड़ दिया। इस आंदोलन ने विश्व पटल पर अमेरिकी और यूरोपीय मीडिया में भारत की आजादी की गूंज पैदा की।
5. भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement, 1942)
करो या मरो8 अगस्त 1942 को बंबई के गोवालिया टैंक मैदान (अगस्त क्रांति मैदान) से गांधीजी ने अंग्रेजों को ‘भारत छोड़ो’ और देशवासियों को “करो या मरो” (Do or Die) का अंतिम महामंत्र दिया। 9 अगस्त की सुबह सभी बड़े नेता गिरफ्तार कर लिए गए, लेकिन यह आंदोलन जनक्रांति बन गया जिसने अंततः 15 अगस्त 1947 को देश को स्वतंत्र कराया।
🌍 4. संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस: वैश्विक शांति का प्रतीक
महात्मा गांधी का दर्शन केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। मार्टिन लूथर किंग जूनियर (अमेरिका के नागरिक अधिकार आंदोलन के प्रणेता), नेल्सन मंडेला (दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद विरोधी नायक), आंग सान सू की और दलाई लामा जैसे वैश्विक नेताओं ने गांधी के सत्याग्रह को अपने संघर्ष का आधार बनाया।
15 जून 2007 का ऐतिहासिक दिन
भारत के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) में 140 से अधिक देशों के सह-प्रायोजन के साथ सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव द्वारा 2 अक्टूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ (International Day of Non-Violence) घोषित किया गया। संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य दुनिया भर में शांति, सहिष्णुता, संवाद और गैर-हिंसा की संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाना है।
आज जब दुनिया यूक्रेन-रूस संघर्ष, पश्चिम एशिया के तनाव और परमाणु हथियारों की होड़ से जूझ रही है, तब बापू का यह कथन सबसे अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है: “अहिंसा मानवता के लिए उपलब्ध सबसे शक्तिशाली बल है। यह मनुष्य द्वारा खोजे गए विनाश के सबसे शक्तिशाली अस्त्र से भी अधिक समर्थ है।”
🌾 5. 2 अक्टूबर का दोहरा पर्व: लाल बहादुर शास्त्री जी की 122वीं जयंती
2 अक्टूबर की पावन तिथि भारत के लिए दोहरे गौरव का दिन है। इसी दिन 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म हुआ था। वर्ष 2026 में हम शास्त्री जी की 122वीं जयंती (122nd Shastri Jayanti) मना रहे हैं।
जय जवान, जय किसान — सादगी के अमर नायक शास्त्री जी
1904 – 19661965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय जब देश अन्न संकट और विदेशी आक्रमण की दोहरी चुनौती से जूझ रहा था, तब प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने रामलीला मैदान से “जय जवान, जय किसान” का कालजयी उद्घोष किया था। उन्होंने देशवासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने का आह्वान किया और पहले स्वयं अपने परिवार पर इसे लागू किया।
गांधीजी और शास्त्रीजी दोनों के जीवन का मूल मंत्र एक ही था—’सादा जीवन, उच्च विचार’ (Simple Living, High Thinking)। दोनों महापुरुषों ने पद और सत्ता को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।
🎤 6. गांधी जयंती पर सर्वश्रेष्ठ भाषण (School & College Speeches)
स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक समारोहों में बोलने के लिए विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए दो विशेष रूप से तैयार भाषण नीचे दिए गए हैं:
आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानीय शिक्षकगण और मेरे प्यारे सहपाठियों,
आप सभी को गांधी जयंती और शास्त्री जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।
“सीधा-साधा वेश था, न कोई अभिमान,
खादी की एक धोती में, जिसने हिला दिया जहान।”
आज 2 अक्टूबर को हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती मना रहे हैं। बापू का जन्म 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उन्होंने हमें सिखाया कि सत्य और अहिंसा के बल पर दुनिया की सबसे बड़ी ताकत को भी झुकाया जा सकता है। बापू कहते थे—’खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।’
आज के दिन हमें केवल भाषण नहीं सुनना है, बल्कि अपने जीवन में दो संकल्प लेने हैं—पहला, अपने आसपास स्वच्छता रखना, और दूसरा, कभी असत्य और नफरत का साथ न देना। आइए, बापू के सपनों का स्वच्छ और समृद्ध भारत बनाने में अपना योगदान दें।
धन्यवाद! जय हिन्द, जय भारत! वंदे मातरम्!
सभा में उपस्थित समस्त प्रबुद्ध नागरिक, आदरणीय अतिथिगण और प्रिय युवाओं,
आज का दिन केवल एक महान आत्मा के स्मरण का दिन नहीं है, बल्कि उस सनातन जीवन-मूल्य को पुनः आत्मसात करने का दिन है जिसे दुनिया ‘गांधीवाद’ कहती है।
अल्बर्ट आइंस्टीन ने बापू के विषय में बिल्कुल सत्य कहा था—“आने वाली पीढ़ियां शायद ही कभी इस बात पर विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस का ऐसा पुतला कभी इस धरती पर चला था।” बापू ने कोई सेना नहीं बनाई, उनके पास कोई राजकोष नहीं था, फिर भी जब वे चलते थे तो करोड़ों भारतीय उनके पीछे चल पड़ते थे। क्योंकि उनका नैतिक बल हिमालय से भी ऊंचा था।
आज 21वीं सदी के डिजिटल युग में, जब सोशल मीडिया पर असहिष्णुता, ट्रोलिंग और समाज में विभाजन बढ़ रहा है, तब बापू का ‘सर्वधर्म समभाव’ और ‘सत्याग्रह’ हमारे लिए सबसे बड़ी संजीवनी है। इसके साथ ही, आज हम पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी को भी नमन करते हैं जिन्होंने स्वाभिमान और त्याग की अद्वितीय मिसाल पेश की थी।
आइए, इस 157वीं गांधी जयंती पर हम राष्ट्र निर्माण का सच्चा संकल्प लें। केवल शब्दों में नहीं, अपने आचरण में सत्य, अहिंसा और स्वच्छता को उतारें।
जय हिन्द! बापू अमर रहें!
📝 7. गांधी जयंती पर निबंध (Essay for School & Competitive Exams)
प्रस्तावना (Introduction)
भारत विविधताओं और महान विभूतियों का देश है। इस पुण्यभूमि पर अनेक युगपुरुषों ने जन्म लिया, परंतु महात्मा गांधी का व्यक्तित्व अद्वितीय है। प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को संपूर्ण राष्ट्र गांधी जयंती को एक राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाता है। यह दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि नैतिक शक्ति भौतिक शक्ति से कहीं अधिक प्रभावशाली होती है।
सत्य और अहिंसा के दो पहिए
गांधीजी के संपूर्ण दर्शन की धुरी दो ही शब्द हैं—’सत्य’ और ‘अहिंसा’। गांधीजी के अनुसार सत्य ही ईश्वर है। अहिंसा का अर्थ कायरता नहीं, बल्कि बुराई के सामने सिर न झुकाने का अदम्य साहस है। उन्होंने अहिंसा को निष्क्रिय प्रतिरोध नहीं बल्कि प्रेम और आत्म-बलिदान की सक्रिय शक्ति माना।
स्वच्छता और आत्मनिर्भरता (स्वदेशी)
बापू ने चरखे को केवल सूत कातने का साधन नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक स्वतंत्रता और स्वावलंबन का प्रतीक बनाया। वे मानते थे कि जब तक भारत के गांव आत्मनिर्भर नहीं होंगे, तब तक सच्ची आजादी संभव नहीं है। उन्होंने स्वच्छता को पूजा के समान पवित्र माना और स्वयं शौचालय साफ करके समाज को श्रम की गरिमा का पाठ पढ़ाया।
उपसंहार (Conclusion)
गांधी जयंती केवल एक दिन का समारोह नहीं है। बापू के विचार आज भी पर्यावरण संकट, युद्ध और सामाजिक विषमता का सबसे सटीक समाधान हैं। यदि हम उनके विचारों का 10 प्रतिशत भी अपने जीवन में उतार सकें, तो यह बापू के प्रति हमारी सबसे सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
💡 8. महात्मा गांधी के 15 कालजयी अनमोल विचार (Immortal Quotes)
“खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।”
अर्थ: दूसरों को बदलने से पहले स्वयं के आचरण में सुधार करें।“आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देगी।”
अर्थ: प्रतिशोध से केवल विनाश होता है, शांति क्षमा से ही संभव है।“कमजोर कभी क्षमा नहीं कर सकता। क्षमा करना तो बलवान का गुण है।”
अर्थ: सहनशीलता और क्षमा आंतरिक साहस से ही आती है।“स्वच्छता स्वतंत्रता से अधिक महत्वपूर्ण है।”
अर्थ: शारीरिक व मानसिक स्वच्छता ही स्वस्थ राष्ट्र की नींव है।“प्रकृति हर व्यक्ति की जरूरत पूरी कर सकती है, लालच नहीं।”
अर्थ: आज के पर्यावरण और क्लाइमेट चेंज संकट का सटीक समाधान।“व्यक्ति अपने विचारों का उत्पाद है, वह जैसा सोचता है वैसा बन जाता है।”
अर्थ: सकारात्मक सोच ही महान कर्मों को जन्म देती है।🧘 9. साबरमती के 11 एकादश व्रत (The 11 Ashram Vows)
साबरमती और सेवाग्राम आश्रम में रहने वाले प्रत्येक साधक को बापू द्वारा निर्धारित 11 महाव्रतों का पालन करना अनिवार्य था। ये व्रत आज भी व्यक्तिगत जीवन को अनुशासित और तनावमुक्त बनाने के सर्वोत्तम नियम हैं:
| क्रम | व्रत का नाम | अर्थ व व्यावहारिक महत्व |
|---|---|---|
| 1 | सत्य (Truth) | मन, वचन और कर्म में सदा सच्चाई का आचरण करना। |
| 2 | अहिंसा (Non-Violence) | किसी भी जीव को वाणी, विचार या कर्म से कष्ट न पहुंचाना। |
| 3 | ब्रह्मचर्य (Self-Discipline) | इंद्रियों पर नियंत्रण और पवित्र जीवनशैली। |
| 4 | अस्तेय (Non-Stealing) | किसी दूसरे की वस्तु उसकी आज्ञा के बिना न लेना, बौद्धिक चोरी से बचना। |
| 5 | अपरिग्रह (Non-Possession) | आवश्यकता से अधिक धन या वस्तुओं का संग्रह न करना। |
| 6 | शरीरश्रम (Bread Labour) | अपने भोजन और जीवन के लिए प्रतिदिन शारीरिक परिश्रम करना। |
| 7 | अस्वाद (Control of Palate) | जीभ के स्वाद के लिए नहीं, केवल स्वास्थ्य के लिए सात्विक भोजन करना। |
| 8 | सर्वत्र भयवर्जन (Fearlessness) | ईश्वर के सिवाय संसार में किसी भी मनुष्य या परिस्थिति से न डरना। |
| 9 | सर्वधर्म समभाव (Equality of Religions) | सभी धर्मों और उपासना पद्धतियों का समान आदर करना। |
| 10 | स्वदेशी (Swadeshi) | अपने देश और पड़ोस में बनी वस्तुओं को प्राथमिकता देना। |
| 11 | स्पर्शभावना (Removal of Untouchability) | छुआछूत का पूर्ण उन्मूलन, सभी मनुष्यों को ईश्वर की संतान मानना। |
🧹 10. स्वच्छता ही सेवा और स्वच्छ भारत मिशन: 2 अक्टूबर का संकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को गांधी जयंती के अवसर पर नई दिल्ली के राजपथ से ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की शुरुआत की थी। बापू के चश्मे को इस महा-अभियान का आधिकारिक लोगो बनाया गया, जिसके एक शीशे पर ‘स्वच्छ’ और दूसरे पर ‘भारत’ अंकित है।
आज 2026 में स्वच्छ भारत मिशन अपने दूसरे चरण (SBM-Urban 2.0 और SBM-Grameen 2.0) में पहुंच चुका है, जिसके तहत खुले में शौच मुक्त (ODF Plus) भारत, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, और प्लास्टिक कचरा मुक्त शहरों का निर्माण किया जा रहा है। 2 अक्टूबर के अवसर पर हर वर्ष देशभर में ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ और ‘स्वच्छता ही सेवा’ जन-अभियान चलाया जाता है जिसमें करोड़ों नागरिक श्रमदान करते हैं।
🧐 11. महात्मा गांधी से जुड़े 10 अज्ञात व रोचक तथ्य (Mind-Blowing Facts)
❓ 12. गांधी जयंती 2026 पर अक्सर पूछे जाने वाले 10 प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: 2 अक्टूबर 2026 को महात्मा गांधी की कौन सी जयंती है?
उत्तर: 2 अक्टूबर 2026 को महात्मा गांधी की 157वीं जयंती (157th Gandhi Jayanti) है। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ था।
प्रश्न 2: 2 अक्टूबर को गांधीजी के साथ और किसकी जयंती होती है?
उत्तर: 2 अक्टूबर को भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की भी जयंती होती है। 2026 में शास्त्री जी की 122वीं जयंती है।
प्रश्न 3: गांधी जयंती को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस कब घोषित किया गया?
उत्तर: 15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा सर्वसम्मति से 2 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया गया था।
प्रश्न 4: गांधीजी की समाधि का क्या नाम है और यह कहां स्थित है?
उत्तर: गांधीजी की समाधि का नाम ‘राजघाट’ (Raj Ghat) है, जो नई दिल्ली में यमुना नदी के तट पर स्थित है। इस पर उनके अंतिम शब्द ‘हे राम’ अंकित हैं।
प्रश्न 5: गांधीजी को ‘राष्ट्रपिता’ सर्वप्रथम किसने कहा था?
उत्तर: नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 6 जुलाई 1944 को सिंगापुर से आजाद हिंद रेडियो पर दिए गए अपने ऐतिहासिक संबोधन में पहली बार गांधीजी को ‘राष्ट्रपिता’ (Father of the Nation) कहा था।
🌟 13. अंतिम संपादकीय निष्कर्ष: 21वीं सदी में गांधी दर्शन
गांधी केवल भारत के अतीत का नाम नहीं हैं, वे मानवता के भविष्य की आवश्यकता हैं। जब तक संसार में अन्याय रहेगा, तब तक सत्याग्रह जीवित रहेगा। जब तक हिंसा और द्वेष रहेगा, तब तक अहिंसा की पुकार गूंजती रहेगी। आइए, इस 157वीं गांधी जयंती पर हम केवल बापू के चित्रों पर मालाएं न चढ़ाएं, बल्कि उनके चरित्र का एक अंश भी अपने जीवन में धारण करें।
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आलेख समीक्षा एवं सत्यापन: डॉ. सतीश चंद्र त्रिपाठी
वरिष्ठ संपादक एवं भारतीय इतिहास शोधार्थी, NewsMug.in। स्वतंत्रता संग्राम, गांधीवादी विचार एवं आधुनिक भारतीय सामाजिक आंदोलनों पर पिछले 20 वर्षों से शोध एवं लेखन। यह आलेख गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय और यूएनओ के ऐतिहासिक अभिलेखों के आधार पर तैयार किया गया है।









