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Home - News - ड्राइवर के होनहार बेटे ने किया कमाल, मेहनत से बना IAS ऑफिसर
News Updated:17/04/20210 Views

ड्राइवर के होनहार बेटे ने किया कमाल, मेहनत से बना IAS ऑफिसर

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Table of Contents

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  • पिता चलाते थे टैक्सी, ग़रीबी में बीता बचपन
  • सरकारी स्कूल से की पढ़ाई, कोचिंग के पैसे नहीं थे तो माँ ने ही पढ़ाया
  • एक IPS ऑफिसर से प्रभावित होकर UPSC परीक्षा देने का किया फैसला
  • 2 बार हुए फेल, फिर तैयारी के लिए बैंक की सरकारी नौकरी छोड़ी
  • सेल्फ स्टडी की और बने 2020 बैच के IAS ऑफिसर
  • IAS अज़हरूद्दीन काज़ी (IAS Azharuddin Quazi) के ख़ास सुझाव

IAS Azharuddin Quazi Success Story: कौन कहता है आसमान में छेद नहीं किया जा सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछाल के देखो यारों……आसमानों में भी सुराख किया जा सकता है. हर इंसान को अपने जीवन यात्रा में सफल होने के लिए कठिन तप तो करना ही पड़ता है, हाँ, लेकिन कुछ लोगों के जीवन में चुनौतियाँ इस क़दर आती है कि अक्सर उन से घबराकर व्यक्ति हार मान लेता है, लेकिन दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं। हम वह सब कर सकते है, जो हम सोच सकते हैं.

इसी बात का एक जीता जागता उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव यवतमाल के रहने वाले अज़हरूद्दीन काज़ी (IAS Azharuddin Quazi) , जिन्होंने ग़रीबी और संघर्षों का सामना करते हुए पढ़ाई की और कड़ी मेहनत करके वर्ष 2020 में IAS ऑफिसर बनकर पूरे महाराष्ट्र को चौका दिया. आज काजी उन सभी गरीब और कमजोर बैकग्राउंड से आने वाले यूपीएससी प्रतिभागियों के लिए मिसाल बन गए हैं जो यह सोचते थे कि ऐसे हालातों में UPSC परीक्षा पास करना नामुमकिन है. चलिए लेख के जरिए जानते हैं कि अज़हरूद्दीन ने संघर्षों से सफलता तक का सफ़र कैसे तय किया…

पिता चलाते थे टैक्सी, ग़रीबी में बीता बचपन

अज़हरूद्दीन काज़ी (IAS Azharuddin Quazi) की जीवन बचपन से ही परेशानियों ने भरा हुआ था. पिताजी पेशे से टैक्सी ड्राइवर थे और सारे घर की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधो के ऊपर थी. माँ एक गृहणी थीं, लेकिन उन्हें पढ़ना लिखना पसन्द था. अज़हरूद्दीन के तीन और भाई हैं और बच्चों में वही सबसे बड़े हैं.

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इस प्रकार से उनके परिवार में कुल 6 सदस्य हैं, जिनका भरण पोषण की पूरी जिम्मेदारी उनके पिताजी पर ही थी. माँ का विवाह छोटी उम्र में ही हो गई थी इसलिए उनकी पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी थी, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ने लिखने के लिए प्रेरित किया और उनसे जितना बन पड़ा उनका साथ दिया ताकि उनके अधूरे सपनों को वे अपने बच्चों के द्वारा पूरा होते हुए देखें.

सरकारी स्कूल से की पढ़ाई, कोचिंग के पैसे नहीं थे तो माँ ने ही पढ़ाया

परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, ऐसे में माता-पिता के पास इतने भी रुपए नहीं होते थे कि वह अपने बच्चों को साधारण स्कूल में भी दाखिला दिला पाएँ. उनकी माँ ने जैसे तैसे करके सभी बच्चों को यवतमाल में ही एक साधारण सरकारी हिन्दी मीडियम स्कूल में दाखिला कराया. अज़हरूद्दीन की शुरुआती शिक्षा भी उसी स्कूल से पूरी हुई.

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एक इंटरव्यू के दौरान अज़हरूद्दीन ने बताया कि उनके पास कोचिंग जाने के रुपए नहीं होते थे इसलिए उनकी माँ है सभी बच्चों को दसवीं कक्षा तक घर पर पढ़ाया करती थीं. जिसके बाद उन्होंने अपना सब्जेक्ट कॉमर्स सेलेक्ट किया तथा स्नातक भी पूरा किया. ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने के साथ ही वे एक प्राइवेट नौकरी भी किया करते थे, परन्तु फिर भी उनके घर की माली हालत नहीं सुधर पा रही थी.

एक IPS ऑफिसर से प्रभावित होकर UPSC परीक्षा देने का किया फैसला

अज़हरूद्दीन इंटरव्यू में आगे बताते हैं कि अब तो उनके परिवार की परिस्थितियाँ ऐसी भी नहीं रही थी कि उनके भाइयों की आगे की पढ़ाई जारी रह सके. उसी दौरान वर्ष 2010 में अज़हरूद्दीन दिल्ली से सिविल सर्विसेज की परीक्षा देने का निर्णय किया. दरअसल वे किसी समारोह में एक IPS ऑफिसर से मिले थे, जिनका उनके ऊपर काफ़ी प्रभाव पड़ा था और इसी वज़ह से उन्होंने सिविल सर्विसेज जाने का मन बनाया.

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उन्होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा देने का मन तो बना लिया था लेकिन उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे की वे दिल्ली पहुँच सकें. जिसके बाद किसी तरह टिकट का इंतज़ाम करके खड़े-खड़े ट्रेन से दिल्ली पहुँच गए तथा वहाँ जाकर एक ऐसी कोचिंग क्लास में प्रवेश लिया, जो की UPSC प्रतिभागियों को फ्री कोचिंग दिया करते थे. कोचिंग संस्थान में उनका चयन हुआ और उन्होंने तैयारी करके पहली बार UPSC की परीक्षा दी.

2 बार हुए फेल, फिर तैयारी के लिए बैंक की सरकारी नौकरी छोड़ी

साल 2010 – 2011 में अज़हरूद्दीन ने परीक्षा दी, लेकिन दोनों ही बार उन्हें सफलता नहीं मिल सकी. इसी बीच उनका परिवार की भी माली हालत बेहद ही खराब हो गयी थी, तब अज़हरूद्दीन निराश हो गए और उन्हें लगा कि सिविल सेवाओं का क्षेत्र उनके लिए नहीं है. वह सोचने लगे कि ऐसे समय में उन्हें परिवार की मदद करनी चाहिए ताकि उनके भाइयों की पढ़ाई भी चल सके. जिसके बाद उन्होंने कोई जॉब करने का दोबारा निर्णय लिया. फिर क़िस्मत ने साथ दिया और एक सरकारी बैंक में उनकी जॉब लग गई, जहाँ वे PO की पोस्ट पर सेलेक्ट हुए. फिर वे लगातार 7 सालों तक इसी नौकरी में लगे रहे. जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया और साथ ही उनके भाइयों की शिक्षा भी पूरी हो पाई.

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अज़हरूद्दीन की नौकरी अच्छी चल रही थी और उन्हें प्रमोशन पर प्रमोशन मिल रहा था, बावजूद उनके दिल इस बात का मलाल था कि वे सिविल सेवा में नहीं जा सके. फिर उन्होंने एक और बार कोशिश करनी चाही तथा जॉब के साथ परीक्षा की तैयारी भी शुरू करना चाहते थे, लेकिन पर्याप्त समय ना मिल पाने की वज़ह से वे तैयारी नहीं कर पा रहे थे.

फिर उन्होंने एक ऐसा फ़ैसला लिया, जिसे सुनकर हर कोई उनके फैसले की निंदा कर रहा था और कहा कि वे मूर्खता कर रहे हैं. यह फ़ैसला था, अज़हरूद्दीन के द्वारा अपनी अच्छी खासी सरकारी नौकरी छोड़ने का, जिसमें वे ब्रांच मैनेजर की पोस्ट पर काम कर रहे थे. लेकिन अज़हरूद्दीन अपने सपने को हर हाल में पूरा करना चाहते थे. जिसके बाद यह जॉब छोड़ कर वे एक बार फिर UPSC एग्जाम की तैयारी के लिए दिल्ली पहुँचे और तैयारी शुरू की.

सेल्फ स्टडी की और बने 2020 बैच के IAS ऑफिसर

हालाँकि अज़हरूद्दीन ने 7 साल पहले ही पढ़ाई छोड़ दी थी, इसलिए उन्हें पता था कि इतने वर्षों बाद फिर से इस परीक्षा की तैयारी करने में उन्हें काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन उन्होंने अपने हौसले को डिगने नहीं होने दिया. करीब 1 वर्ष तक तैयारी करने के पश्चात उन्होंने तीसरी बार प्रयास किया जिसने उनका सिलेक्शन इंटरव्यू राउंड तक हुआ परंतु वे चयनित नहीं हो पाए.

फिर साल 2019 में उन्होंने एक बार फिर से प्रयास किया और अन्ततः इस बार उन्हें सफलता मिली. वे 2020 बैच के IAS ऑफिसर बने.

IAS अज़हरूद्दीन काज़ी (IAS Azharuddin Quazi) के ख़ास सुझाव

अज़हरूद्दीन कड़े सँघर्ष का सामना करके इस मुकाम तक पहुँचे हैं. उनके घर परिवार की हालत देखकर कोई नहीं कह सकता था कि यह बच्चा एक दिन IAS बनेगा, लेकिन उनके आत्मविश्वास और सही दिशा में प्रयास करने से ही यह संभव हो पाया है. अज़हरूद्दीन (IAS Azharuddin Quazi) बताते हैं कि जब वे बैंक की जॉब कर रहे थे, उस दौरान जब उनके मित्रो का UPSC परीक्षा का नतीजा आता और वे चयनित हो जाते थे, तो उन्हें लगता कि उन्हें अपने जीवन में फिर कोशिश करने का अवसर भी प्राप्त नहीं हो पा रहा है. आपको अपनी परेशानियों से डर कर नहीं बैठना चाहिए, लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यदि पूरे मन से प्रयास करेंगे तो आपको सफलता अवश्य मिलेगी.

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KAMLESH VERMA
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दैनिक भास्कर और पत्रिका जैसे राष्ट्रीय अखबार में बतौर रिपोर्टर सात वर्ष का अनुभव रखने वाले कमलेश वर्मा बिहार से ताल्लुक रखते हैं. बातें करने और लिखने के शौक़ीन कमलेश ने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से अपना ग्रेजुएशन और दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है. कमलेश वर्तमान में साऊदी अरब से लौटे हैं। खाड़ी देश से संबंधित मदद के लिए इनसे संपर्क किया जा सकता हैं।

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