सबसे आसान भाषा में समझिए पृथ्वी का सबसे बड़ा संकट। What is Climate Change

 सबसे आसान भाषा में समझिए पृथ्वी का सबसे बड़ा संकट। What is Climate Change

सांकेतिक तस्वीर सोर्स गूगल

सबसे आसान भाषा में समझिए पृथ्वी का सबसे बड़ा संकट। What is Climate Change

पृथ्वी के ध्रुवों पर हजारों सालों से जमी बर्फ पिघल रही है। दुनिया भर में जंगल आग में भस्म में हो रहे हैं। समुंद्र का बढ़ता जलस्तर आने वाले समय में कई बड़े शहरों को निगल सकता है। कहीं सूखा है तो कहीं आए दिन बाढ़ और तूफान आ रहे हैं। हालत बहुत खराब है। करोड़ों जिंदगियां दांव पर लगी हुई है, हो सकता है कि आज आपका जलवायु परिवर्तन का सीधे तौर पर असर ना हो।

लेकिन हम लोग जिस तरफ जा रहे हैं आप भी जल्द इसकी चपेट में आ जाएंगे। समस्या इतनी गंभीर है कि पृथ्वी के अस्तित्व पर सवाल उठने लगे हैं। लेकिन यह नौबत क्यों ? आई जलवायु परिवर्तन आखिर क्या है ? जिसकी हर तरफ इतनी चर्चा हो रही है। जलवायु परिवर्तन या फिर कहे क्लाइमेट चेंज पृथ्वी के औसत तापमान में हो रही वृद्धि से है।

लेकिन इस वृद्धि की वजह क्या है ? यह तो आप जानते ही हैं कि पृथ्वी को प्रकाश और गर्मी सूरज से मिलती है। सुरज की किरणें जब पृथ्वी पर पड़ती है। तो उनमें से कुछ किरणें परावर्तित होकर वापस अंतरिक्ष में चली जाती हैं। और कुछ किरणों को हमारे वायुमंडल में मौजूद ग्रीनहाउस गैस परावर्तित होने से रोक लेती हैं। इसे ग्रीन हाउस इफेक्ट कहते हैं।

वायुमंडल को आप पृथ्वी के चारों ओर बना गैसों का एक कवच कह सकते हैं। सूरज की गर्मी को वायुमंडल में मौजूद ग्रीन हाउस गैस परावर्तित होने से रोक लेती हैं। उसी से पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाता है। वरना ठंड के कारण पृथ्वी पर इंसानों का रहना मुश्किल हो जाएगा। बल्कि खेती भी आसान नहीं होगी और फिर दुनिया की आबादी का पेट भरना मुश्किल हो जाएगा। तो इसका मतलब यह है कि जिन ग्रीन हाउस गैसों को हमारे सामने खलनायक के तौर पर पेश किया जाता है। वह तो बहुत जरूरी हैं, लेकिन हां तभी जब उनकी मात्रा हमारे पर्यावरण में संतुलित हो।

छह मुख्य ग्रीन हाउस गैसों में जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड यानी CO2, मीथेन, ओजोन, नाइट्रोजन ऑक्साइड और क्लोरो फ्लोरो ऑक्सीजन शामिल है। इनमें सबसे खतरनाक कार्बन डाइऑक्साइड ही है। जो लंबे समय तक पर्यावरण में रहती है। इंसानी गतिविधियों से जो भी CO2 पैदा होती है। उसकी बड़ी वजह जीवाश्म ईंधन का अधिक इस्तेमाल हैं।

what-is-climate-change
सांकेतिक तस्वीर साेर्स गूगल

यानी कोयला डीजल पेट्रोल और जमीन से निकलने वाली गैसों का इस्तेमाल है। खासकर इसकी शुरुआत 1750 में हुई जब औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई थी। तब से अब तक हमारे पर्यावरण में CO2 की मात्रा 30% बढ़ गई है। इसका मतलब है कि जितना CO2 हमारे पर्यावरण साल 2020 में है। उतना पृथ्वी के 800000 साल के इतिहास में कभी नहीं रहा। समस्या इसलिए और अधिक बढ़ गई क्योंकि कार्बन सोखने वाले जंगलों को अंधाधुन तरीकों से काटा जा रहा हैं।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन का कहना है कि, की व्यापक औद्योगिकिकरण शुरू होने के पहले पृथ्वी का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है। कई रिसर्च बताती है कि 1850 से लेकर इस सदी के आखिर तक पृथ्वी के तापमान में 1 डिग्री तक इजाफा होगा। और यदि यह बदलाव 2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया तो पृथ्वीवासी बर्बादी के मुहाने पर पहुंच सकते हैं।

what-is-climate-change
प्रतिकात्मक तस्वीर सोर्स गूगल

तापमान बढ़ने का नतीजा है कि पृथ्वी के ध्रुवों पर जमी बर्फ की चादर तेजी से पिघल रही है। जिसका सीधा समुंद्र के बढ़ते जलस्तर के तौर पर दिख रहा हैं। साल 2005 से 2015 के बीच में हर साल समुद्र के जलस्तर में 3.6 मिलीमीटर की वृद्धि हुई है। यदि यह जलवृद्धि इसी प्रकार बढ़ती रही तो दुनिया के कई देश और बड़े शहर समुद्र में समा सकते हैं।

बढ़ते तापमान की वजह से मौसम में अप्रत्याशित बदलाव आ रहे हैं। जो अपने साथ सूखा, बेमौसम बारिश, बाढ़ और तूफान ला रहे हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि यदि तापमान वृद्धि को डेढ़ डिग्री सेल्सियस पर रोका जा सके तो सुरक्षित होगा। लेकिन दुनिया के देश अब भी नफा नुकसान का हिसाब लगा रहे हैं।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पर्यावरण को बचाने के लिए जितने इंतजाम किए जाने की जरूरत है वह दुनियाभर की सरकारों में नहीं दिखता। इसीलिए बड़ों के साथ बच्चे भी अब सड़कों पर उतर आए हैं। और जलवायु संरक्षण के लिए कड़े कदमों की मांग कर रहे हैं।

तो सवाल यह है कि हम और आप कर क्या रहे हैं ? और कर क्या सकते हैं ? बहुत कुछ कर सकते हैं- जैसे कि कार के बजाय साइकिल से चलिए, विमान की जगह ट्रेन में सफर करिए। नई नई चीजें खरीदने की बजाएं पुरानी चीजों को खराब होने पर ठीक कराएं और इस्तेमाल कीजिए। यकीन मानिए आपके इन छोटे-छोटे कदमों से हम पृथ्वी की बड़ी समस्या से निपट सकते हैं।

इसे भी पढ़े : पाकिस्तान में बनती है पत्थर की रोटी । Traditional bread of Balochi Shepherds in Pakistan

KAMLESH VERMA

https://newsmug.in

Related post