नाभि उछाल क्या होता हैं और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है?

 नाभि उछाल क्या होता हैं और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है?

सांकेतिक तस्वीर फोटो सोर्स गूगल

नाभि उछाल क्या होता हैं और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है? What is a navel hoop and how can it be corrected?

मनुष्य के जन्म होने के बाद जब मां की नाल से जुड़ी बच्चे की गर्भनाल हो चिकित्सक द्वारा बांधकर अलग किया जाता है तो बच्चे के पेट पर एक निशान बन जाता है जिसे नाभि कहते हैं. इसका आकार और संरचना महिला और पुरुषों में भिन्न-भिन्न होती है. अंग्रेज़ी में इसे navel कहते हैं. नाभि में 1,458 प्रकार के बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो बाहरी बैक्टीरिया से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं. नाभि हमारी जीवन ऊर्जा का केंद्र है. यह शरीर का बेहद ही संवेदनशील भाग होता है, जो कि रक्त वाहिकाओं से जुड़ा होता है. कई ठोकर, अधिक वजन उठाने से पेट में दर्द  होता है, जिसे नाभि उछाल या नाभि खिसकना कहते है. लेख के जरिए हम आपकों नाभि उछाल को ठीक करने का घरेलु उपाय बताने जा रहे हैं.

what-is-a-navel-hoop-and-how-can-it-be-corrected
सांकेतिक तस्वीर फोटो सोर्स गूगल

नाभि का महत्व । Importance of navel

हिन्दू शास्त्रों की मानें तो नाभि मनुष्य जीवन का ऊर्जा का केंद्र है. मृत्यु के बाद भी प्राण नाभि में 6 मिनट तक रहते हैं. इंसानी शरीर में दिमाग से भी महत्वपूर्ण स्थान है नाभि का है. कहा जाता है कि नाभि शरीर का प्रथम दिमाग होता है, जो प्राणवायु के बल पर संचालित होता है. मनुष्य का सूक्ष्म शरीर नाभि ऊर्जा के केंद्र से जुड़ा होता है. यदि कोई संत या सिद्धपुरुष शरीर से बाहर निकलकर सूक्ष्म शरीर से कहीं भी विचरण करता रहता है, तो उसके सूक्ष्म शरीर की नाभि से स्थूल शरीर की नाभि के बीच एक रश्मि जुड़ी रहती है. किसी कारणवश यदि यह टूट जाती है तो व्यक्ति का अपने स्थूल शरीर से संबंध भी टूट जाता है. भगवान ब्रह्मा का जन्म विष्णु की नाभि से हुआ था. आसान शब्दों में कहा जाएं तो, इस संसार में प्रत्येक मनुष्य का जन्म नाभि से ही होता है. हिंदू धर्म में नाभि को पाताल लोक भी कहा जाता है. पूरे ब्रह्माण का भी नाभि केंद्र है.

लहसुन और गुड़ साथ खाने से होने वाले फायदा और स्वास्थ्य लाभ क्या‌ हैं?

नाभि उछाल क्या होता हैं और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है? What is a navel hoop and how can it be corrected?

मनुष्य का सूक्ष्म शरीर नाभि ऊर्जा के केंद्र से जुड़ा होता है. शारीरिक क्षमता से अधिक भार उठाने और अनियमित आहार लेने से नाभि में उछाल आता है. चलिए लेख के जरिए जानें इसे कैसे ठीक किया जा सकता है?

आवश्यक सामग्री :

  • कच्ची हल्दी की गांठ
  • कुश यानी घास
  • कोयला
  • पानी करीब दाे लीटर
  • एक बड़ा पीतल का पात्र
  • मिट़्टी का मटका

नाभि उछाल को ठीक करने का घरेलु उपाय :-

  • सुबह उठने के बाद बासी मुंह आप एक पीतल के पात्र में कच्ची हल्दी की गांठ, सूखी घास, कोयला और मिट्‌टी का पात्र एक खाली स्थान पर ले जाएं
  • जिसके बाद आप पीतल के पात्र में हल्दी की गांठ, कोयला और सूखी घास को जलाकर मिट्‌टी के मटके में रख दें. पीतल के पात्र को पानी से भरकर आप मिट्‌टी का घड़ा उसके ऊपर रख दें. ध्यान रहे केवल घास ही जलना चाहिए.
  • जिसके बाद आप अपने पैरों के एक उंगूठे को मिट्‌टी के घड़े के उपर रखें. यदि आपकी नाभि में उछाल होगा तो पात्र में रखा पानी घंड़े में अंदर एकाएक चला जाएंगा. यदि नाभि नहीं खिसकी होगी तो पानी पात्र में रहेगा. यह नुख्सा आयुर्वेदिक है. इसका वैज्ञानिक कारण है कि हमारी नाभि रक्त धमनियों के सहारे रहती है. यह एक स्थान पर स्थिर नहीं रहती.

इसे भी पढ़े :

KAMLESH VERMA

https://newsmug.in

Related post