शुरू हो रहा है वैसाख, जानिए त्योहारों की तिथि, उपाय और महत्व

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शुरू हो रहा है वैसाख, जानिए त्योहारों की तिथि, उपाय और महत्व (Vaishakh Month 2021)

हिंदू पंचांग के अनुसार 27 अप्रैल 2021 को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है. साथ ही चैत्र मास का समापन और 28 तारीख 2021 से वैसाख आरंभ होगा, जो 26 मई 2021 को समाप्त होगा. भारतीय कैलेंडर के अनुसार यह वर्ष का दूसरा माह है. धार्मिक दृष्टि से यह माह भी बेहद ही महत्वपूर्ण होता है. (Vaishakh Month 2021)

वैसाख में भी कई व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं. नारद जी के अनुसार, इस माह को ब्रह्मा जी ने सभी माह में श्रेष्ठ बताया है. हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, वैशाख मास में पाप कर्मों से मुक्ति पाने के लिए स्नान-दान का महत्व है. इस माह में कुछ विशेष उपाय करने से जातकों को कई तरह के शुभ फल प्राप्त होते हैं.

वैसाख को परोपकार का माह भी कहा गया है. तो चलिए लेख के जरिए जानते हैं वैशाख मास में पड़ने वाले त्योहार और उपवास की तिथियां ताकि व्रत करते समय तिथि को लेकर आपको कोई असमंजस न रहे.

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वैशाख माह के व्रत और त्यौहार :

  • 30 अप्रैल दिन शुक्रवार- वैसाख माह, संकष्टी गणेश चतुर्थी
  • 03 मई दिन सोमवार- वैसाख कृष्ण अष्टमी, कालाष्टमी: भगवान काल भैरव की पूजा करने का दिन
  • 07 मई दिन शुक्रवार- रबीन्द्रनाथ टैगोर जयंती, वरुथिनी एकादशी सनातन धर्म में सबसे श्रेष्ठ व्रत, वल्लभाचार्य जयंती
  • 08 मई दिन शनिवार- वैसाख कृष्ण चतुर्दशी तिथि, प्रदोष व्रत (शिव जी को समर्पित तिथि)
  • 09 मई दिन रविवार- मातृ दिवस, वैसाख कृष्ण चतुर्दशी, मासिक शिवरात्रि
  • 11 मई दिन मंगलवार- अमावस्या , भौमवती अमावस्या
  • 13 मई दिन गुरुवार- चंद्र दर्शन , रोहिणी व्रत
  • 14 मई दिन शुक्रवार- वृषभ संक्रांति, मातंगी जयंती, परशुराम जयंती, अक्षय तृतीया
  • 15 मई दिन शनिवार- वरद संकष्टी चतुर्थी, भगवान गणेश को समर्पित
  • 17 मई दिन सोमवार- षष्टी तिथि, सोमवार व्रत, सूरदास जयंती
  • 18 मई दिन मंगलवार- गंगा सप्तमी
  • 19 मई दिन बुधवार- बुधाष्टमी व्रत
  • 20 मई दिन गुरुवार- मासिक दुर्गाष्टमी व्रत, बगलामुखी जयंती
  • 21 मई दिन शुक्रवार- वैसाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि, सीता नवमी
  • 22 मई दिन शनिवार- वैसाख शुक्ल पक्ष, मोहिनी एकादशी व्रत
  • 23 मई दिन रविवार- परशुराम द्वादशी
  • 24 मई दिन सोमवार- त्रयोदशी तिथि, सोम प्रदोष व्रत, भगवान शिव को समर्पित
  • 25 मई दिन मंगलवार- वैसाख शुक्ल चतुर्दशी, भगवान नृसिंह जयंती
  • 26 मई दिन बुधवार- कूर्म जयंती, वैसाख शुक्ल पूर्णिमा व्रत, बुद्ध पूर्णिमा

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इस माह जरूर करें ये उपाय :

  • वैशाख माह में राहगीरों और प्यासे लोगों को पानी पिलाने से पुण्य लाभ मिलता है. जो इंसान इस माह में प्यासे को जल पिलाता है, उसे सब दानों के समान पुण्य और सब तीर्थों के दर्शन के समान फल प्राप्त होता है. और उसे उतनी ही मात्रा से दस हजार राजसूय यज्ञों का फल प्राप्त होता है.
  • जो इंसान वैशाख मास में सड़क पर यात्रियों के लिए प्याऊ लगवाता है, वह वैकुंठ लोक प्राप्त करता है. जो प्याऊ लगाकर थके हुए यात्रियों की प्यास बुझाने में मदद करता है, उस पर ब्रह्मा, विष्णु और शिव सहित समस्त देवतागण की सदैव कृपा बनी रहती है.
  • धूप और परिश्रम से पीड़ित ब्राह्मण को जो पंखे से हवाकर शीतलता प्रदान करता है, वह इतने ही मात्र से निष्पाप होकर भगवान का पार्षद हो जाता है। जो इस मास में ताड़ का पंखा दान करता है, वह सब पापों का नाश करके ब्रह्मलोक को जाता है.
  • दुनिया में अन्न के समान दूसरा कोई दान नहीं है. धधकते दोपहर में आए हुए ब्राह्मण मेहमान को या भूखे जीव को यदि कोई भोजन करवाए तो उसको अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है.
  • वैशाख मास में किसी जरूरतमंद व्यक्ति को पादुका या जूते-चप्पल दान करता हैं, वह यमदूतों का तिरिस्कार करके भगवान श्री हरि के लोक में जाता है.
  • जो मनुष्य तिनके या खजूर आदि के पत्तों से बनी हुई चटाई दान करता है, उसके सारे दुखों का नाश हो जाता है और परलोक में उत्तम गति को पाता है.

वैशाख माह का महत्व :

स्कन्द पुराण की मानें तो वैशाख मास को पुण्यार्जन माह की संज्ञा देते हुए ‘माधव’ मास कहा गया है. ‘न माधवसमा मासो न कृतेन युगं समम्। न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम्।। इसका मतलब है कि, बैशाख के समान कोई मास नहीं है, सतयुग के समान कोई युग नहीं है, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगा के समान कोई तीर्थ नही है.

देवर्षि नारद ने भी वैशाख माह का महत्व बताते हुए कहा है कि जिस प्रकार विद्याओं में ‘वेद’ श्रेष्ठ है, मंत्रों में ‘प्रणव’, वृक्षों में कल्पवृक्ष, धेनुओं में कामधेनु, देवताओं में विष्णु, वर्णों में ब्राह्मण, वस्तुओं में प्राण, नदियों में गंगा, तेजों में सूर्य, अस्त्र-शस्त्रों में चक्र, धातुओं में स्वर्ण, तथा रत्नों में कौस्तुभमणि श्रेष्ठ है, उसी तरह महीनों में वैशाख मास सर्वोत्तम है.

जो इंसान भूख, प्यास से व्याकुल जीवों की मदद करता है उसकी सेवा नारायण की सेवा करने जैसा है. वैशाख माह के शुक्लपक्ष की तृतीया को ‘अक्षय तृतीया’ कहा गया है. इस दिन किये सभी शुभ-अशुभ कर्मों का फल अक्षुण तो रहता है। इसी दिन त्रेतायुग का आरम्भ, भगवान विष्णु नर-नारायण, परशुराम, नृसिंह और ह्ययग्रीव अवतार हुए। सप्तमी को गंगा एवं नवमी को सीता का प्राकट्यपर्व मनाया जाता है.

अमावस्या को देववृक्ष ‘वट’ की पूजा की जाती है तो पूर्णिमा को विश्वभर में परोपकार, सादगी और करुणा का सन्देश देने वाले गौतम बुद्ध का जन्मोत्सव मनाया जाता है. वैशाख मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया को जगन्नाथ पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा भी निकलती है. हिंदू धर्म के चार धाम में से एक ‘बद्रीनाथधाम’ के कपाट वैशाख माह की अक्षय तृतीया को खुलते हैं. इसलिए वैशाख माह का एक-एक दिन महत्वपूर्ण है जन-मानस को इसका लाभ उठा चाहिए.

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