टॉपर रहने वाली आशिमा UPSC एग्जाम में हुई कई बार फेल

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Success Story of IAS Ashima Mittal – भारत में बहुत ही पुरानी कहावत हैं कि, असफलता से बड़ा और कोई शिक्षक नहीं होता है. असफलता हमें जो सबक सिखा सकती है, वह इंसान सालों साल बादाम खाकर भी नहीं सीख सकता. हर सफल इंसान के पीछे बहुत सी असफलताएँ भी होती है. दुनिया में कोई भी ऐसा शख़्स नहीं है, जो हमेशा जीतता ही रहा हो और उसने कभी असफल ना हुआ हो. हर इंसान जो हार का सामना करता है, वह अपनी नाकामयाबी से सीख लेकर अगली बार और अधिक तैयारी व दृढ़ निश्चय के साथ कोशिश में लग जाता है.

असफल होने के बाद यदि हम आत्मविश्लेषण करें, अपनी कमियों को पहचानें, ग़लत फैसलों की समीक्षा करके फिर उन कमियों को दूर करने में लग जाएँ, तो असफलता एक वरदान बन सकती है. लेकिन इसके लिए हम अपनी सोच को कमजोर न बनने दें, इसका सीधा कारण है कि, हमारी सोच व हमारा मनोबल ही कठिन समय में हमारा सम्बल होता है. आज हम आपको ऐसी ही एक लड़की की प्रेरणादायी कहानी बताने जा रहे हैं, जो बचपन से पढ़ने में होशियार रही, लेकिन UPSC परीक्षा में निरन्तर असफल हो रही थी, जिसके कारण पहले वे बहुत हताश हो गईं, लेकिन फिर अपना मनोबल बढ़ाकर एक बार और प्रयास किया तो आखिरकार उन्हें सफलता मिली. चलिए लेख के जरिए जानते हैं उन्होंने यह सफ़र कैसे पूरा किया…

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कौन हैं आशिमा मित्तल (IAS Ashima Mittal)

हम जिस लड़की की बात कर रहे हैं, वह जयपुर, राजस्थान की निवासी आशिमा मित्तल (IAS Ashima Mittal) , जिन्होंने किशोर अवस्था से हर क्षेत्र में सफलता हासिल की. स्कूल टाइम से ही पढ़ने में काफ़ी होनहार थीं और कक्षा में टॉपर रहने के साथ ही अन्य प्रतिभागी परीक्षाओं में भी अवश्य सलेक्ट हो जाया करती थीं, फिर चाहे वह प्रतियोगिता तो राष्ट्रीय स्तर के ही क्यों ना हों. इस प्रकार से बचपन से ही हर परीक्षा को भी रहने वाली होनहार छात्रा आशिमा और उनके परिवार को भी भरोसा हो गया था कि आशिमा इतनी बुद्धिमान हैं कि वे अपनी मेहनत से कोई भी परीक्षा एक बार में ही पास कर सकती हैं और हुआ भी कुछ ऐसा ही.

IIT बॉम्बे से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की

पहले स्कूल से IIT करने तक की उनकी यात्रा में वे पहले ही प्रयास में सफल रही. जिसके बाद तो उनका आत्मविश्वास इतना बढ़ गया था कि जब उन्होंने जेईई का फॉर्म भरा, उस समय भी उन्होंने सिर्फ़ एक ही विकल्प भरा था, जिसके वे बचपन से सपने देखती थीं, IIT बॉम्बे का। फिर उनकी मेहनत और क़िस्मत ने उनका साथ दिया. वह अच्छी रैंक से पास हुईं और उनकी इच्छानुसार IIT बॉम्बे ही मिला. जिसके बाद वहाँ से 4 साल ग्रेजुएशन पूरा करने में लगे और फिर उन्हें सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त हो गई.

मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब के बावजूद कैसे आया सिविल सेवा में जाने का विचार?

अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद आशिमा ने एक मल्टीनेशनल कंपनी में कुछ टाइम तक नौकरी भी की. जब वे छोटी थीं तो उनके परिवार वाले चाहते थे कि आशिमा को सिविल सेवाओं के क्षेत्र में करियर बनाना चाहिए. फिर नौकरी करते हुए आशिमा को भी लगा की उन्हें इस जॉब से सुविधाएँ, पैसा वगैरह सब कुछ प्राप्त हो रहा था, पर फिर भी उन्हें एक चीज़ की कमी खल रही थी और वह थी आत्मसंतुष्टि. जिसके बाद उन्होंने अपनी सुख सुविधाओं वाली नौकरी छोड़ दी और सिविल सेवा में जाने का निश्चय किया. उन्होंने UPSC की परीक्षा देने की तैयारी करने की प्लानिंग की.

जब करना पड़ा हार का सामना…

अब तक तो आशिमा को किसी भी परीक्षा में निराशा नहीं मिली थी, अतः उनके और उनके पूरे परिवार को विश्वास था कि इस बार भी वे सफल होंगी. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ, सम्भवतः आशिमा की मेहनत या परीक्षा की तैयारी में कुछ कमी रही होगी जिसकी वज़ह से उन्हें सफलता नहीं मिल सकी. इससे उन्हें अपने जीवन से सीख भी मिली कि ज़िन्दगी सदा एक-सी नहीं रहती है, जीवन में हार और जीत का सामना सभी को करना पड़ता है. आशिमा इंटरव्यू राउंड तक पहुँची लेकिन उनका सिलेक्शन नहीं हो सका. इस बात से उन्हें बहुत निराशा हुई, जिसके बाद उन्होंने बड़ी मुश्किल से ख़ुद को नॉर्मल किया.

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डिप्रेशन में चली गईं, लगा UPSC मेरे लिए नहीं बनी

परीक्षा में पास नहीं होने की कारण आशिमा डिप्रेशन में चली गई थीं, जिससे उबरने के लिए उन्होंने ख़ुद को हॉबीज में कुछ वक़्त तक लगाए रखा. फिर एक बार एक सरकारी संस्थान में इंटर्नशिप करते हुए उन्हें राजस्थान के एक गाँव में जाने का मौका मिला. तब एक घर में विजिट करने के दौरान उन्होंने वहाँ एक 3 वर्ष की छोटी बच्ची को देखा, जो अपने स्थान से ख़ुद हिल डुल भी नहीं पाती थी, बस ऐसे ही एक जगह ज़मीन पर पड़ी रहती थी. फिर आशिमा ने इस बारे में उस बच्ची की माँ से पूछा तो उन्होंने बताया कि वह बच्ची जन्म से ही ऐसी है और उन लोगों के पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वे उसका अच्छे डॉक्टर से इलाज़ करा सकें.

उनकी यह बात आशिमा के दिल को लग गई और उन्हें बहुत दुःख हुआ कि 3 सालों से वे लोग अपनी बच्ची का इलाज़ नहीं करा पाए. जिसके बाद आशिमा ने यह बात अपनी माँ से की और उनकी माँ ने आशिमा को समझाया कि उन्हें अचानक उस गाँव में जाना औऱ उस बच्ची से मिलना क़िस्मत का कोई इशारा हो सकता है. आशिमा ने ठान लिया था कि वे अब ऐसे लोगों के लिए कुछ न कुछ करेंगी. जिसके लिए उन्हें सिविल सेवा परीक्षा पास करनी ही होगी. इसके बाद आशिमा ने दोबारा परीक्षा देने के का फ़ैसला लिया. कड़ी मुश्किल से उन्होंने ख़ुद को परीक्षा के लिए तैयार किया, वरना पिछली बार की हार के बाद सलेक्ट ना होने पर उन्हें यह लगने लगा था कि शायद सिविल सेवा क्षेत्र उनके लिये नहीं बना है.

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दूसरी कोशिश में भी नहीं हुआ मनचाही सर्विस में सलेक्शन

आशिमा ने दूसरी बार कोशिश की और इस बार वर्ष 2016 में वह चयनित तो हो गई लेकिन उनकी रैंक 328 वीं आने की वज़ह से उनका सिलेक्शन IRS (IT) सर्विस में हुआ, पर आशिमा इस सर्विस में नहीं जाना चाहती थीं, फिर भी उन्होंने ज्वाइन कर लिया और एक बार फिर कोशिश करने के लिए परीक्षा की तैयारी में जुट गईं.

दूसरी बार भी मनचाही सफलता नहीं मिली तो उनके पिताजी ने अपनी बेटी को हताश देखकर विश्वासपूर्वक कहा की, देख लेना एक दिन मेरी बिटिया का सिलेक्शन टॉप 20 में ज़रूर होगा. पिता के अपने ऊपर विश्वास को देखते हुए आशिमा का भी आत्मा विश्वास बढ़ा तथा इस बार उन्होंने दुगनी मेहनत के साथ तैयारी की. प्री परीक्षा, 3 मेन्स परीक्षा और 3 इंटरव्यू देने के पश्चात आखिरकार तीसरी बार में आशिमा वर्ष 2017 में AIR रैंक 12 के साथ पास हुईं और उनका सलेक्शन उनकी मनचाही सर्विस IAS की पोस्ट के लिए हो गया.

आशिमा के सक्सेस टिप्स

अपनी असफलता से आशिमा ने बहुत कुछ सीखा, इस बारे में अपने अनुभव को साझा करते हुए वह कहती हैं कि UPSC परीक्षा में सफल होने के लिए कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता तो होती ही है लेकिन उसके साथ आपको संयम भी रखना होगा, कारण ज़रूरी नहीं कि एक बार में आपको सफलता मिल जाए, परीक्षा में पास ना होने पर आपको निराश नहीं होना है बल्कि हिम्मत रख कर अपनी कमियों को पहचान कर और ज़्यादा लगन से पढ़ाई करनी चाहिए, तभी आप सफल होंगे.

मीडिया को दिए गए इंटरव्यू के दौरान आशिमा ने बताती है कि, उन्होंने प्री परीक्षा के बहुत अच्छे से प्रैक्टिस की, एग्जाम से पहले वह 50 से 60 टेस्ट बनाकर प्रैक्टिस कर चुकी होती थी. उनमें से बहुत से सवाल तो पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों में से ही मिल जाते थे. उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे के पेपर में उनके कम मार्क्स आए थे तो उन्होंने पिछले वर्षों में पूछे गए एस्से के प्रश्नों का अच्छी तरह से अभ्यास किया क्योंकि उनका कहना है कि इस परीक्षा के लिए अभ्यास बहुत ही महत्त्वपूर्ण होता है.

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केवल पढ़ाई करना ही ज़रूरी नहीं होता है बल्कि जो भी आपने पढ़ा है उसे बार-बार दोहरा कर अभ्यास करना भी आवश्यक है. परीक्षा के दिन तक भले ही आप पढ़ाई करें लेकिन परीक्षा से 1 दिन पूर्व अच्छे से नींद लें, क्योंकि कई बार घबराहट होने की वज़ह से नींद नहीं आती है, फिर उसका असर आपके पेपर पर भी पड़ सकता है.

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