मोहम्मद शरीफ भी राम मंदिर भूमि पूजन में जाएंगे : 28 साल पहले बेटे की मौत ने बदल दी थी इनकी जिंदगी

 मोहम्मद शरीफ भी राम मंदिर भूमि पूजन में जाएंगे : 28 साल पहले बेटे की मौत ने बदल दी थी इनकी जिंदगी

साइकिल मिस्त्री हैं मोहम्मद शरीफ।

राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम 5 अगस्त को है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का शिलान्यास करेंगे. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की ओर से नेपाल के संतों को निमंत्रण भेजा गया हैं.

पूजन कार्यक्रम में बुलाए गए मेहमानों की सूची में दो नाम पूरे देश में बेहद चर्चा में हैं. पहला नाम बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी दूसरा नाम मोहम्मद शरीफ का है. बेटे की मौत 28 साल पहले हो चुकी है.

बेटे की मौत ने इनकी जिंदगी बदल दी. कारण आगे बताएंगे. बेटे की मौत के बाद शरीफ ने हिम्मत नहीं हारी और जिले में मिलने वाली लावारिस लाशों का क्रिया कर्म करने लगे. चलिए जानें कौन है मोहम्मद शरीफ…………

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साल 2019 में राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री का मिला था सम्मान।

पिछले साल पद्मश्री से नवाजे गए थे

80 साल के वृद्ध मोहम्मद शरीफ अयोध्या खिड़की अली बेग मोहल्ला में रहते हैं. पेशे से साइकिल रिपेयरिंग का काम करते हैं. साल 2019 में राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री सम्मानित किया गया था.

80 साल के शरीफ 25 हजार से अधिक लावारिस शवों को का धार्मिक रस्मों के अनुसार क्रिया कर्म कर चुके हैं. शवों के अंतिम संस्कार के लिए प्रतिदिन कब्रिस्तान और श्मशान घूमने जाते है.

शरीफ इतने फेमस व्यक्ति है कि, लावारिस लाश मिलने पर पुलिस उन्हें स्वयं सूचना देती है.लाशों के अंतिम संस्कार का खर्च जेब से करते हैं.

28 साल पहले शुरू किया ये काम

शरीफ ने बताया कि, उनके चार बेटों में से दो की मौत हो चुकी है. मृतक के नाम मोहम्मद और रईस था. पेशे से केमिस्ट मोहम्मद 28 साल पहले सुल्तानपुर गया था. जिसके बाद से वह नहीं लौटा.

उन दिनों अयोध्या में विवादित ढांचा गिरा दिया गया था. अयोध्या में सांप्रदायिक दंगे हो रहे थे. एक माह बाद पता चला कि, बेटे का शव रेल पटरी पर मिला है. मृतक दंगों की चपेट में आ गया था.

घटना ने शरीफ की जिंदगी बदल दी. जिसके बाद से जिले में मिलने वाली लावारिस लाशों का दाह संस्कार करने का बीड़ा उठाया. कुछ लोग अंतिम संस्कार के लिए चंदा देते हैं.

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साइकिल मिस्त्री हैं मोहम्मद शरीफ।

पीएम से मिलने की इच्छा

मोहम्मद शरीफ की दिली इच्छा पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने की है. शरीफ का तर्क है कि, मेरे द्वारा कभी हिंदू-मुस्लिम समुदाय से या धर्म में भेद नहीं किया.

भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होने से कोई परहेज नहीं, मोदी ने मुझ जैसे शख्स को निमतंत्रण दिया यही मेरे लिए सौभाग्य की बात है. आयोजन मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है.

KAMLESH VERMA

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