कोराना का पहरा लेकिन,चंबल तट पर छाया छठ का उल्लास, 10 थानों का पहुंचा बल

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नायन डेम पर डूबते सूर्य को अर्ध्य देती उपासक महिलाएं।

Nagda News. कोरोना महामारी का असर पूर्वांचलवासियों के छठ पर्व पर दिखाई दिया। बीते साल की तुलना में शहर के तीनों घाटों पूर्वांचलवासियों की भीड़ कम रही। प्रशासन की सख्ती के चलते केवल व्रत करने वाली महिला उपासक और एक अटेंडर को ही घाट पर जाने की अनुमति दी गई। शहर के इतिहास में पहली बार छठ पर्व के लिए तीन थानों का बल लगाया गया। चार दिनों तक चलने वाले छठ महापर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को शहर के तीनों घाटों पर छठ व्रत करने वाली महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। शनिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिवसीय पर्व का समापन होगा।

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बिरलाग्राम थाने के समीप टैफिक कंटोल करते सीएसपी रत्नाकर व एसडीएम आशुतोष गोस्वामी।

तीनों घाट, नदी के आसपास व बिरलाग्राम चौराहा लगभग 3 किमी के दायरे में 150 जवानों को तैनात किया गया था। भीड़ को काबू करने के लिए एसडीएम आशुतोष गोस्वामी व सीएसपी मनोज रत्नाकर ने स्वयं  बिरलाग्राम मुख्य सड़क पहुंचकर टैफिक कंटोल किया।

05 हजार परिवार करते निवास

औद्योगिक शहर नागदा में बड़ी संख्या में पूर्वांचलवािस परिवार निवास करते है। शहर में जब 1950 के दशक में ग्रेसिम उद्योग की स्थापाना हुई थी। उस समय से यह लोग नागदा के बिरलाग्राम क्षेत्र में निवास करते है। शहर में लगभग 05 हजार से अधिक परिवार पूर्वांचलवासियों का है।

इस वर्ष को लेकर कोरोना के चलते पहले प्रशासन ने छठ पर्व पर नदी घाट पर पूजन करने पर प्रतिबंध लगाया था। लेकिन पूर्वांचलवासियों तथा क्षेत्र के राजनेताओं एवं जनप्रतिनििधयों की मांग पर मप्र शासन ने छठ पर्व पर नदी पर पूजन करने की अनुमति प्रदान की थी। लेकिन अनुमति कुछ शर्त पर दी गई थी। इस शर्त का पालन कराने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

इन थानों का बल किया गया तैनात

छठ पर्व पर सुरक्षा व्यवस्था व शर्त का पालन कराने के लिए 10 थाने नागदा मंडी, बिरलाग्राम, महिदपुर रोड, बड़नगर, भाटपचलाना, तराना, उन्हेल, माकड़ोन, झारड़ा, राघवी तथा पुलिस लाईन व होमगार्ड से 150 जवान बुलाए गए थे।

इन के साथ 24 होमगार्ड के गोताखोर भी थे। साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर जिला मुख्यालय से यातायात क्रेन व बोट भी मंगवाई गई थी। कुछ महिला व यातायात के आरक्षक भी तैनात किए गए।

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पर्व के दौरान वेदी पर मौजूद महिला उपासक।

मालूम हो कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सायंकाल में सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं। इसलिए छठ पूजा में शाम के समय सूर्य की अंतिम किरण प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर उनकी उपासना की जाती है। कहा जाता है कि इससे व्रत रखने वाली महिलाओं को दोहरा लाभ मिलता है। जो लोग डूबते सूर्य की उपासना करते हैं, उन्हें उगते सूर्य की भी उपासना जरूर करनी चाहिए।

चंबल तट पहुंचकर राजनितिक दलों ने दी पूर्वांचल वासियों को शुभकामनाएं
छठ पूजन पर विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने चंबल तट पहुंचकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान सभी पूर्वांचलवासियों को नायन डेम, मेहतवास, हनुमान डेम पर जाकर छठ पर्व की बधाईयां दी।

गुर्जर के साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष राधे जायसवाल, रघुनाथसिंह बब्बू, दिपक गुर्जर, शिवानारायण चौधरी, संदीप चौधरी, सेवालाल यादव, भानुसिंह, मोन्टु ठाकुर, अभिषेक ठाकुर आदि मौजूद थे।

इसी प्रकार पूर्व विधायक दिलीप सिंह शेखावत, पूर्व नपा अध्यक्ष अशोक मालवीय, पूर्व पार्षद हरीश अग्रवाल, सांसद प्रतिनिधि प्रकाश जैन आदि ने घाट पर पहुंच कर पूर्वांचलवासियों को बधाई दी और पूजन की अनुमति प्रदान करने पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का आभार माना।

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इनका कहना-

संक्रमण को देखते हुए चंबल के छठ घाटों पर भीड़ कंट्रोल करने के लिए एक प्लान तैयार किया गया था। जिसमें नगर पालिका, पीएडब्लूडी, प्रशासनिक अफसर, स्वास्थ्य विभाग के अफसर शामिल थे। घाटों पर पहुंचने वाले लोगों के मास्क और बॉडी टेम्पचेर को चैक अंदर भेजा गया। शनिवार सुबह 4 बजे से 7 बजे तक घाटों पर अनावश्यक भीड़ को काबू करने के लिए जवान लगाए गए है। 

आशुतोष गोस्वामी, एसडीएम नागदा

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