सावन सोमवार की विधि कथा 2021

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सावन सोमवार की विधि कथा

सावन सोमवार की विधि कथा । Sawan Somvar ki vidhi katha श्रावण सोमवार महीने का महत्व एवम कथा ( Shravan (Sawan) Somvar vrat , Month Mahatva, Katha, 2021 date In Hindi

सावन माह भगवान शिव जी का अत्यंत प्रिय महीना हैं. शिवालयों में पूरे माह धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. मंदिरों पर पूरे सवान में भक्तों का तांता लगा रहता हैं. कई विशेष त्यौहार श्रावण के इस महीने में मनाए जाते हैं. भारत देश की परम्परायें हमें हमेशा ईश्वर से जुड़ने का मार्ग बताती हैं, फिर उसमें एक दिन का त्यौहार हो या महीने भर का उत्साह. सभी का अपना एक अलग महत्व हैं. यहाँ ऋतुओं को भी पूजा जाता हैं. उनका आभार अपने तरीके से व्यक्त किया जाता हैं.

वर्षा ऋतू से ही चार महीने के त्यौहार शुरू हो जाते हैं, जिनका पालन सभी धर्म, जाति और अपनी मान्यताओं के अनुरूप करते हैं. उसी प्रकार सावन का हिन्दू समाज में बहुत अधिक महत्व हैं. इसे कई विधियों एवं परम्पराओं के रूप में देखा एवं पूजा जाता हैं.

भारतवर्ष में ऋतुओं का समान आकार हैं मुख्य तीनों मुख्य ऋतुयें 4-4 माह के लिए आती हैं. सभी का होना हमारे देश की कृषि पर विशेष प्रभाव डालती हैं. सावन का महीना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता हैं.

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सावन सोमवार की विधि कथा

साल 2021 में सावन सोमवार कब- कब है? ( Sawan Somvar 2021 date)

26 जुलाई सोमवार सावन सोमवार व्रत
2 अगस्त सोमवार सावन सोमवार व्रत
9 अगस्त सोमवार सावन सोमवार व्रत
16 अगस्त सोमवार सावन सोमवार व्रत

सावन का महीना महत्त्व  (Shravan / Sawan  Month Mahatva)

श्रावण यह हिंदू कैलेंडर में पांचवे स्थान पर आता हैं. इसकी शुरुआत वर्षा ऋतू से होती हैं. भगवान शंकर जो श्रावण के देवता कहे जाते हैं, उन्हें इस माह में भिन्न- भिन्न तरीकों से पूजा जाता हैं. पूरे माह मंदिरों पर और लोगों के घरों में धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, शिव उपासना, व्रत, पवित्र नदियों में स्नान एवं शिव अभिषेक का महत्व हैं. विशेष तौर पर सावन सोमवार को पूजा जाता हैं. कई शिव की उपासक महिलायें पूरा सावन महीना सूर्योदय के पूर्व स्नान कर उपवास रखती हैं. कुंवारी युवतियां सुयोग्य वर कि कामना के लिए इस माह में उपवास एवं शिव की पूजा करती हैं. विवाहित स्त्री पति की सलामती के लिए मंगल कामना करती हैं. भारत देश में पुरे उत्साह के साथ सावन महोत्सव मनाया जाता हैं. मध्य प्रदेश के उज्जैन नगरी में पूरे सावन माह में भगवान महाकाल की शाही सवारी निकाली जाती है. पौराणिक कथाओं में सुनने को मिलता है कि सवारी के रुप में राजा महाकालेश्वर प्रजा का हाल जानने के लिए निकलते हैं.

सावन माह से जुड़ी धार्मिक कहानियाँ  (Shravan Ki Katha)

क्यूँ हैं सावन भगवान शिव का प्रिय महीना ?

लोक कथाओं और किवदंतियों में उल्लेख मिलता हैं कि, सावन भगवान शिव का अति प्रिय महीना होता हैं. इसके पीछे की धार्मिक मान्यता यह हैं कि दक्ष पुत्री माता सति ने अपने जीवन को त्याग कर कई वर्षों तक श्रापित जीवन जिया. जिसके बाद उन्होंने हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया. माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को पति रूप में पाने के लिए पूरे श्रावण महीने में कठोरतप किया, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की. अपनी भार्या से पुनः मिलाप के कारण भगवान् शिव को श्रावण का यह महीना अत्यंत प्रिय हैं. यही कारण हैं कि इस महीने कुमारी कन्या अच्छे वर के लिए शिव जी से प्रार्थना करती हैं.

यही प्राचीन धार्मिक मान्यता हैं कि श्रावण के महीने में भगवान शिव ने धरती पर आकार अपने ससुराल में विचरण किया था, जहाँ अभिषेक कर उनका स्वागत हुआ था इसलिए इस माह में अभिषेक का महत्व बताया गया हैं.

प्राचीन धार्मिक मान्यता है कि, सावन माह में ही देवताओं ने समुद्र मंथन किया था, जिसमे निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया, जिस कारण उन्हें नील कंठ का नाम मिला और इस प्रकार उन्होंने श्रृष्टि को इस विष से बचाया, और सभी देवताओं ने उन पर जल डाला था इसी कारण शिव अभिषेक में जल का विशेष स्थान हैं.

वर्षा ऋतू के चौमासा में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस वक्त पूरी श्रृष्टि भगवान शिव के आधीन हो जाती हैं. अतः चौमासा में भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु मनुष्य जाति कई प्रकार के धार्मिक कार्य, दान, उपवास करती हैं.

बैल पत्र का महत्व (Bel Patra Ka Mahatva)

भगवान शिव कि उपासना में बैल पत्र का विशेष महत्व हैं. लोक कथाओं में सबसे प्रचलित कथा है कि, एक डाकू अपने जीवन व्यापन के लिए राहगीरों को लुटता हैं. एक बार वो रात्रि के समय एक पेड़ पर बैठ कर अपने शिकार का इंतजार करता हैं लेकिन समय निकलता जाता हैं कोई नहीं आता. तभी डाकू के हृदय में अपनी करनी को लेकर पश्चाताप का भाव उत्पन्न होता हैं और वो खुद को कोसता हुआ उस पेड़ के पत्तो को तोड़- तोड़ कर नीचे फेंकता रहता हैं. वह वृक्ष बैल पत्र का होता हैं और उसके नीचे शिव लिंग स्थापित होता हैं. डाकू के द्वारा फेका गया पत्ता शिव लिंग पर गिरता हैं और उसके करुण भाव के कारण उसमें एक सच्ची श्रद्धा का संचार होता हैं, जिससे प्रसन्न होकर भोलेनाथ उसे दर्शन देते हैं और उसकी पीढ़ा को समाप्त कर उसे सही राह पर लाते हैं. इसलिए बैल शिव पूजन में पत्र का विशेष महत्व होता हैं.

श्रावण/ सावन सोमवार व्रत का महत्व  (Savan Somvar Mahatva)

सोमवार का स्वामी भगवान शंकर को माना जाता हैं. पूरे साल में सोमवार को शिव भक्ति के लिए उत्तम दिन माना जाता हैं. अत: शिव प्रिय होने के कारण श्रावण के सोमवार का महत्व अधिक बढ़ जाता हैं. श्रावण में पाँच अथवा चार सोमवार आते हैं, जिनमे एक्श्ना अथवा पूर्ण व्रत रखा जाता हैं. एक्श्ना में संध्या काल में पूजा के बाद भोजन ग्रहण किया जाता हैं. शिव जी की पूजा का समय प्रदोषकाल में होती हैं. कई जगहों पर श्रावण सोमवार के दिन शाला का अर्धावकाश होता हैं.

काँवर यात्रा का उल्लेख  (Savan Kaanvar Yatra Mahtva)

सावन में काँवर यात्रा का भी खासा महत्व हैं. इस यात्रा में भोले भक्त भगवा वस्त्र धारण करके पवित्र नदियों के जल को एक काँवर में बाँधकर पैदल चलकर शिवलिंग पर उस जल को चढ़ाते हैं. काँवर एक बाँस का बना होता हैं जिसमे दोनों तरफ छोटी सी मटकी होती हैं जिसमे नदियों का पवित्र जल भरा होता हैं और उस बाँस को फूलों एवं घुन्घुरों से सजाया जाता हैं. यात्रा के दौरान श्रद्धालु “बोल बम” का नारा लगाते हैं. भारत के मध्य प्रदेश महाकालेश्वर, झारखंड स्थित बाबा बैद्यनाथ, मंदसौर मध्य प्रदेश पशुपतिनाथ में काँवर यात्री श्रृद्धा पूर्वक पद यात्रा कर पवित्र जल को शिवलिंग पर अर्पण करते हैं. श्रावण का पुराणों में बहुत महत्व हैं. कहते हैं रावण ने सबसे पहले काँवर यात्रा की थी एवं भगवान राम ने भी काँवडी के रूप में शिवलिंग पर जल चढ़ाया था. इस तरह से यह कार्य पुरुषों द्वारा भी किया जाता हैं. अतः सावन का यह महीना स्त्री एवं पुरुषों दोनों के द्वारा अपने- अपने तरीकों से मनाया जाता हैं.

भुजरिया का महत्व  (Shravan Bhujariya Mahtva)

शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा नाग पंचमी के दिन से भुजरिया बोई जाती हैं. इसमें घर में टोकनी में मिट्टी डालकर कर गेहूँ बोते हैं. इस दिन से पूर्णिमा के दिन तक इसकी पूजा की जाती हैं. श्रावण पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन के दुसरे दिन इस भुजरियाँ को सभी को बाँटा जाता हैं. आसपास के घरों एवं रिश्तेदारों को भुजरिया दी जाती हैं.

सावन व्रत का विवरण  (Sawan Somwar Vrat Mahtva)

सावन के महीने में भगवान शिव जी के लिए व्रत रखे जाते हैं जिनमे सोमवार का विशेष महत्व हैं. शिव जी की पूजा कैसे की जाती हैं जाने क्रमबध्द तरीके से. सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती हैं कारण भगवान गणेश को वरदान प्राप्त हैं कि किसी भी कार्य में सबसे पहले गणेश जी का आव्हान करना हिंदू धर्म में अनिवार्य हैं. जिसके बाद ही किसी शुभ कार्य या शिव जी की पूजा की जाती हैं.

शिव पूजन का विवरण  (Shiv poojan Details)

भगवान शिव की पूजा में अभिषेक का विशेष महत्व हैं जिसे रुद्राभिषेक कहा जाता हैं. प्रति दिन रुद्राभिषेक करने का नियम पालन किया जाता हैं. रुद्राभिषेक करने की विधि इस प्रकार है.

  • सबसे पहले जल से शिवलिंग काे स्नान कराया जाता हैं. जिसके बाद दूध, दही, शहद, शुद्ध घी, शक्कर इन पांच अमृत जिन्हें मिलाकर पंचामृत कहा जाता हैं के द्वारा शिवलिंग को स्नान कराया जाता हैं. जिसके बाद दोबारा जल से स्नान कराकर उन्हें शुद्ध किया जाता हैं.
  • जिसके बाद शिव लिंग पर चन्दन का लैप लगाया जाता हैं. तत्पश्चात जनैव अर्पण किया जाता हैं अर्थात पहनाया जाता हैं.
  • शिव जी पर हल्दी, कुमकुम एवं सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता. उन्हें अबीर अर्पण किया जाता हैं.
  • बैल पत्र, अकाव के फूल, धतूरे का फुल एवं फल चढ़ाया जाता हैं. शमी पत्र का विशेष महत्व होता हैं. धतूरे एवं बैल पत्र से भी शिव जी को प्रसन्न किया जाता हैं. शमी के पत्र को स्वर्ण के तुल्य माना जाता हैं.
  • पूरी पूजा ॐ नम: शिवाय मंत्र के जाप के साथ किया जाता हैं.
  • जिसके बाद माता गौरी काे पूजा जाता है.
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सावन सोमवार की विधि कथा

सावन माह एकदशी विवरण (Sawan Ekadashi Mahatva)

सावन के महीने में एकादशी का भी महत्व होता हैं इस माह में दो एकादशी होती हैं जिसमें –

  • पुत्रदा एकादशी : यह एकदशी शुक्ल पक्ष में आती हैं.
  • कामिका एकादशी : यह कृष्ण पक्ष एकदशी कही जाती हैं.

सावन के विशेष त्यौहार (Festival in Shravan/ Sawan)

क्रमांक सावन के त्यौहारों के नाम विस्तार
1 हरियाली तीज श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया को तीज का यह त्यौहार मनाया जाता हैं. इसमें नई नवेली दुल्हन अपने घर आती हैं. कुमारी युवतियां सुयोग्य वर की कामना हेतु यह व्रत करती हैं. इसमें निराहार रहा जाता हैं. माता गौरी को सोलह श्रृंगार चढ़ाते हैं. उत्साह के साथ संगठित होकर कन्या यह त्यौहार मनाती हैं.
2 नाग पंचमी यह शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती हैं. इसमें नाग देवता की पूजा की जाती हैं.
3 रक्षाबंधन श्रावण की पूर्णिमा पर राखी का त्यौहार मनाया जाता हैं. जिसे भाई-बहन का विशेष त्यौहार माना जाता हैं.
4 श्रावणी मेला इसे भारत के झारखण्ड राज्य में उत्साह से मनाया जाता हैं. इसमें पवित्र नदियों के स्नान किए जाने का खासा महत्व हैं.
5 कजरी तीज शुक्ल पक्ष की नवमी में मनाया जाता हैं इसे खासतौर पर किसान एवं महिलाओं द्वारा मनाया जाता हैं. यह विशेषकर मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य में मनाया जाता हैं.

श्रावण माह में अन्य रिवाज (Shravan Month Customs)

  • ऐसे कई त्यौहार मान्यतानुसार श्रावण माह में मनाये जाते हैं. सबका महत्व होता हैं प्रेम और अपनेपन से मिलकर ईश्वर में अपनी आस्था को बनाये रखना.
  • कहते हैं श्रावण की पूजा हमेशा परिवार जनों के साथ मिलकर की जानी चाहिये, इससे आपसी मन मुटाव कम होते हैं, और एकता बनी रहती हैं. खुशियाँ आती हैं.
  • श्रावण में हिन्दू धर्म में पूजा का बहुत महत्व हैं साथ ही श्रावण में मांसाहार खाना वर्जित माना गया हैं. श्रावण में कई लोग प्याज, लहसुन भी नहीं खाते. कई पुरुष श्रावण में दाड़ी एवं बाल कटवाना गलत मानते हैं.
  • श्रावण के महीने में शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों में रथयात्रा निकलती हैं. खासतौर पर यह यात्रा प्रति श्रावणी सोमवार को निकलती हैं. आखरी सोमवार शिव जी की बारात निकाली जाती हैं जिसमे नंदी भी लाये जाते हैं.
  • श्रावण के महीने में सुंदर कांड, रामायण, भागवत कथा का वाचन एवं श्रवण किया जाता हैं. इसे पुण्य का कार्य समझा जाता हैं. इसके अलावा घरो में भजन, शिव अभिषेक एवं सत्यनारायण की कथा की जाती हैं. पूरा महीने दान का भी महत्व होता हैं.

इस तरह से हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा श्रावण माह विशेषरूप से त्योहारों का माह होता है. जिसे लोग बहुत ही उत्साह के साथ मनाते हैं.

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