स्कूल में वापसी कैसे करें:78% पैरेंट्स नहीं भेजना चाहते बच्चों को अभी स्कूल

 स्कूल में वापसी कैसे करें:78% पैरेंट्स नहीं भेजना चाहते बच्चों को अभी स्कूल

भोपाल. महीनों से बंद पड़े स्कूलों को खोलने का सरकार ने संकेत दे दिया है. संभवत: 21 सितंबर से कक्षा 9 से लेकर 12वीं तक के स्कूल दोबारा खुल सकते हैं. हालांकि, सरकार ने पहले पैरेंट्स से अनुमति मांगी है, मतलब यदि पालक नहीं चाहते तो बच्चा स्कूल नहीं जाएगा.

स्कूल वापसी की तैयारियां के बीच सवाल यह है कि क्या सच में पालक या माता-पिता मानसिक रूप से अपने बच्चे को स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं? ऑनलाइन शिक्षा कंपनी एसपी रोबोटिक्स वर्क्स की रिसर्च में सामने आए आंकड़ों की मानें तो, करीब 78% पैरेंट्स महामारी खत्म होने तक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते.

भले ही बच्चे को क्लास रिपीट करना पड़े 

रिसर्च में शामिल हुए पैरेंट्स स्थिति सामान्य होने तक बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते, चाहे बच्चे का साल खराब हो या उन्हें क्लास  रिपीट करना पड़े.  रिसर्च के अनुसार बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद में रहने वाले माता-पिता बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा चिंतित हैं.

दूसरी ओर बड़े शहरों की तुलना में चेन्नई और कोलकाता में मामला अल्टा हैं। यहां के पैरेंट्स बच्चों के साथ रिस्क उठाने के लिए तैयार हैं. 64% पैरेंट्स का मानना है कि ऑनलाइन पढ़ाई से ज्यादा बेहतर पढ़ाई क्लास रुम में होती है. 67% बच्चे ऑनलाइन स्कूल एजुकेशन को सही नहीं मानते हैं.

भोपाल निवासी प्रीति जैन का मानना है, ऑनलाइन क्लासेस से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हूं, क्योंकि क्लास के मुकाबले बच्चे ऑनलाइन लर्निंग में पूरी तरह फोकस नहीं कर पाते।” हालांकि, जैन स्थिति सामान्य होने तक ऑनलाइन क्लासेस के समर्थन में हैं।

माता-पिता की जॉब पर पड़ता है प्रभाव
रिसर्च की मानें तो  पैरेंट्स का प्रोफेशन उनकी प्रतिक्रिया में बड़ी भूमिका निभाता है. आंकड़ों के अनुसार वेतनभोगी माता-पिता अपने बच्चों को लेकर ज्यादा परेशान हैं. महज 17% पैरेंट्स ही अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं,  30% सेल्फ एम्पलॉयड और 56% फ्रीलांस करने वाले पैरेंट्स स्कूल खुलने के तुरंत बाद अपने बच्चों को स्कूल भेजने की इच्छा रखते हैं.

मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं बच्चे

चाइल्ड एक्सपर्ट के अनुसार बच्चे काफी समय से  स्कूल रुटीन और दोस्तों से दूर हैं. जिसके चलते उन्हें मानसिक तौर पर भी परेशानी हो रही है. अहमदाबाद में साइकैट्रिस्ट डॉ. ध्रुव ठक्कर ने बताया कि, बच्चे साथियों से मिल नहीं पा रहे हैं, यह चीज उन्हें ज्यादा प्रभावित कर रही है. स्कूलों को खोला जाना बच्चों के मेंटल हेल्थ के लिए लाभकारी है. स्कूल खुलने से पैरेंट्स को बच्चों की पढ़ाई की चिंता कम होगी.

बच्चों की स्कूल वापसी पर पैरेंट्स क्या करें…?

  • सफाई का वादा: पालक को पक्का कर लेना चाहिए कि उनका बच्चा सावधानियों को लेकर चिंतित है या नहीं। महामारी के दौर में साफ सफाई का ख्याल ररखने की शपथ दिलाएं.
  • बार-बार याद न दिलाएं:  बच्चों किसी बात के लिए बार-बार ना टोके, ध्यान रहे घर पर काफी समय से रहने से बच्चों की मानसिक स्थिति पर दबाव पड़ा. बच्चे महामारी का बराबरी से सामना कर रहे हैं.
  • स्कूल रुटीन फिर दोहराएं: ऑनलाइन कक्षाओं में बच्चों ने जो मिस किया है, वह है स्कूल का रुटीन समय. पालक ध्यान रखें कि बच्चों की स्कूल की तैयारियों को पुराने तरीके से दोहराएं.

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KAMLESH VERMA

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