ग्रेसिम उद्योग प्रबंधन नागदा 60 स्थायी श्रमिकों के स्थान पर ठेका श्रमिक रखने की तैयारी में

 ग्रेसिम उद्योग प्रबंधन नागदा 60 स्थायी श्रमिकों के स्थान पर ठेका श्रमिक रखने की तैयारी में

सांकेतिक तस्वीर : सोर्स गूगल

नागदा। ग्रेसिम उद्योग प्रबंधन नागदा ने 60 स्थायी श्रमिकों के स्थान पर ठेका श्रमिकों को लगाने की तैयार कर ली है। इन स्थायी श्रमिकों को पहले तो अन्य विभागों में संविलियन किया जाएगा। जिसके  बाद  आवश्यकता नहीं होने का कह कर घर भेजने की तैयारी भी की जा रही हैं।

पटिए पर ठेका प्रथा के तहत श्रमिकों को लगाने का ठेका भी सत्ताधारी दल से जुडे़ एक ठेकेदार को ही मिला है। प्रबंधन एक और तो कार्य नहीं होने का बहाना बनाकर लगभग 2500 ठेका श्रमिकों को घर बैठा चुका है। वहीं दूसरी और स्थायी श्रमिकों के स्थान पर अब ठेका श्रमिकों को लगाकर स्थायी श्रमिकों को घर भेजने की तैयारी कर रहा है।

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सांकेतिक तस्वीर : सोर्स गूगल

पूरे मामले में श्रम संगठनों की गहरी चुप्पी भी चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि चाहे मामला ठेका श्रमिकों का हो या अब स्थायी श्रमिकों का उद्योग में कार्यरत श्रम संगठनों ने एक गुप्त समझौते के तहत ही प्रबंधन के खिलाफ अपनी जुबान नहीं खोली है। ऐसे में उद्योग में कार्यरत श्रमिकों को अपने भविष्य के प्रति स्वयं ही चिंतन एवं मनन करना होगा।

क्या है पूरा मामला

ग्रेसिम उद्योग प्रबंधन द्वारा नवम्बर से उद्योग में कार्यरत 60 स्थायी श्रमिकों को अन्य स्थानों पर संविलियिन कर पटिए पर ठेका श्रमिकों को लगा जाने के लिए ठेका दे दिया है। सूत्रों का कहना है कि उद्योग ठेका श्रमिकों को कार्य से मुक्त करने के बाद अब स्थायी श्रमिकों पर अपनी रूपरेखा बनाते हुए उनकी छुट्टी करने में लग गया है।

प्रबंधन की जो मंशा दिखाई दे रही है उसके अनुसार पहले स्थायी श्रमिकों को दूसरे विभागों में शिफ्ट कर ठेका श्रमिकों को पटिए पर लगाया जाए, तथा बाद में अतिरिक्त श्रमिकों की बात कहते हुए स्थायी श्रमिकों को परेशान कर घर बैठाने की तैयारी की जा रही है।

प्रबंधन कम से कम श्रमिकों के साथ उद्योग को चलाना चाहता है जिससे उसकी आर्थिक स्थित जो की पहले से ही काफी मजबूत है और सुदृढ हो जाए। सरकार के नियमों का फायदा लेना चाहता है उद्योग सूत्रों का कहना है कि उद्योग प्रबंधन केन्द्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के तहत उद्योग को विभिन्न डिविजन में बांट कर प्रत्येक डिविजन को 300 श्रमिकों से कम में ही चलाने की मंशा रखता है।

कहा तो यहां तक जा रहा है कि उक्त नियम के बाद उद्योग पर 300 से कम श्रमिक होने पर श्रम कानूनों के पालन का बंधन नहीं रह जाएगा तथा वह श्रमिकों पर अपना दमनचक्रम भी चला सकेगा।

श्रम संगठनों की चुप्पी, श्रमिक विरोधी

मामले में उद्योग के कुछ श्रमिकों ने कहा कि ग्रेसिम में कार्यरत श्रमिकों के हितों की रक्षा करने का दावा श्रम संगठन के आगेवान करते हैं। लेकिन वर्तमान में बीएमएस, एटक, एचएमएस आदि सभी यूनियन के आगेवानों की जुबान बन्द है।

उद्योग द्वारा 2500 ठेका श्रमिकों को कोरोना के नाम पर घर बैठा दिया गया। श्रम संगठन नहीं बोले, अब स्थायी श्रमिकों को घर बैठाने की तैयारी की जा रही है, लेकिन श्रम संगठन की बोलती आज भी बंद है।

सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन एवं श्रम संगठनों के बीच गुप्त समझौता हो गया है जिसके चलते ही श्रम संगठनों की मौन सहमती के बल पर उद्योग प्रतिदिन श्रमिकों पर दमनचक्र चला रहा है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाला समय उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों के लिए काफी कष्टदायी साबित हो सकता है।

KAMLESH VERMA

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