गोवर्धन पूजा का महत्व, पूजन विधि, मुहूर्त और कथा | Govardhan Puja 2020 in Hindi

 गोवर्धन पूजा का महत्व, पूजन विधि, मुहूर्त और कथा | Govardhan Puja 2020 in Hindi

सांकेतिक तस्वीर सोर्स गूगल

गोवर्धन पूजा महत्व, पूजन विधि, पौराणिक कथा | Govardhan Puja Mahatva, Puja Vidhi and Stories in Hindi

गोवर्धन पूजा दीपावली के दूसरे दिन की जाती है. मुख्य रूप से यह पूजा उत्तर भारत में उत्साह से की जाती है.  इस दिन भारत में सभी घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर उसकी पूजा की जाती है और गाय की भी पूजा की जाती है. उत्तर भारत में इस दिन को धोक पड़वा कहा जाता है. भारत के विभिन्न प्रांतों में इस दिन अन्नकूट का भी आयोजन किया जाता है.

गोवर्धन पूजा का महत्व (Govardhan Puja Mahatva)

भारतीय  त्यौहारों में वैज्ञानिक महत्व निहित रहता है. गोवर्धन पूजा का यह त्यौहार प्रकृति और मानव के बीच संबंधों को स्थापित करता है. इस दिन का विशेष उद्देश्य पशुधन की पूजा करना है. हिंदू धर्म में गौमाता को साक्षात ईश्वर का रूप माना गया है. इस दिन सभी किसान अपने पालतु पशुओं का श्रृंगार करते हैं. भगवान श्री कृष्ण इंद्र के अभिमान को तोड़कर बृजवासी पर्यावरण के महत्व को समझें और उसकी रक्षा करें यही उनका उद्देश्य था. इस दिन बहुत से श्रद्धालुओं के राज पर्वत की परिक्रमा भी करते हैं.

धोक पड़वा (Dhok Padwa)

उत्तर भारत में इस दिन गोवर्धन पूजा के साथ धोक पड़वा पर्व को मनाया जाता है. इस दिन सभी लोग अपने से बड़ों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेते हैं. इसे स्थानीय भाषा में धोक देना भी कहा जाता है. गुजराती नववर्ष की शुरुआत भी इसी दिन से होती है.

गोवर्धन पूजा शुभ मुहूर्त (Govardhan Puja Muhurat)

हिंदू पंचांग के अनुसार गोवर्धन पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन की जाती है.वर्ष 2018 में यह पूजा 8 नवंबर गुरुवार के दिन की जाएगी.

गोवर्धन पूजा पर्व तिथि 15 नवंबर 2020, रविवार
गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त प्रातः 6:25 से प्रातः 8:30 तक
गोवर्धन पूजा सायं काल मुहूर्त दोपहर बाद 15:18 बजे से सायं 17:27 बजे तक
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ 10:36 (15 नवंबर 2020) से
प्रतिपदा तिथि समाप्त 07:05 बजे (16 नवंबर 2020) तक)

गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा (Govardhan Puja Story)

पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि देवराज इंद्र को अपनी शक्ति और वैभव पर अभिमान हो गया था. उसे ही नष्ट करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने यह लीला रची थी. एक दिन जब यशोदा मैया भगवान इंद्र की पूजा की तैयारी कर रही थी तभी उस समय श्री कृष्ण माता यशोदा से पूछा कि वह किस लिए भगवान इंद्र की पूजा कर रही है. कृष्ण जी को माता यशोदा ने उत्तर दिया कि अरे गांव वाले गांव में अच्छी बारिश की कामना के लिए भगवान इंद्र की पूजा कर रहे हैं. जिससे हमारा गांव हरा भरा और फसल की पैदावार अच्छी हो सके.

इस पर श्री कृष्ण ने माता यशोदा से कहा कि गिरिराज पर्वत से भी हमें गायों के लिए घास प्रदान करता है. इसलिए गोवर्धन पर्वत की भी पूजा अवश्य होनी चाहिए और इंद्र तो कभी दर्शन भी नहीं देते जबकि गोवर्धन पर्वत पर साक्षात हमारे समक्ष प्रस्तुत है. श्री कृष्ण की इस बात पर सभी गांव वाले सहमत हो गए और सभी गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे. इस बात से नाराज होकर देवराज इंद्र क्रोधित हो उठे. देवराज इंद्र ने अपने अपमान का बदला लेने के लिए ब्रज में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी. पूरे गांव में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई.

चारों ओर पानी ही पानी से हाहाकार मच गया. सभी गांव वालों की रक्षा के लिए भगवान श्री कृष्ण सभी को गोवर्धन पर्वत की ओर ले गए. जहां उन्होंने गिरिराज पर्वत को प्रणाम कर उसे अपनी सबसे छोटी उंगली पर धारण कर लिया और उसी के नीचे सभी गांव वालों ने शरण ली. यह देख इंद्र और क्रोधित होगा. उन्होंने वर्षा का प्रभाव और तेज कर दिया. तभी श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र ने वर्षा की गति को नियंत्रित किया और शेषनाग को आदेश दिया कि वे पानी को पर्वत की ओर आने से रोके. इस तरह 7 दिनों तक भगवान कृष्ण ने गांव वासियों की वर्षा से रक्षा की.

देवराज इंद्र को एहसास हो गया था कि श्री कृष्ण कोई सामान्य बालक नहीं है. फिर ब्रह्मा जी ने देवराज इंद्र से कहा कि वह कोई सामान्य बालक नहीं है वह भगवान विष्णु का ही रूप है. इसके बाद देवराज इंद्र श्री कृष्ण के पास पहुंचे और उनसे क्षमा मांगी और बारिश को रोक दिया. उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा. इसी दिन से गोवर्धन पर्वत पूजा त्योहार के रूप में हर साल मनाया जाता है.

गोवर्धन पूजा विधि (Govardhan Puja Vidhi)

इस दिन गाय के गोबर से सभी घरों में गिरिराज पर्वत का प्रतीक बनाया जाता है. खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में यह पूजा अधिक प्रचलित है. शहरों में भी यह पूजा की जाती है. गिरिराज पर्वत के प्रतीक का पंचामृत अभिषेक भी किया जाता है.इस दिन सभी घर में रामभाजी (सभी सब्जी को मिलकर बनाई गई) विशेष रूप से बनाई जाती है.

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KAMLESH VERMA

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