गांधी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता : वाजपेयी

 गांधी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता : वाजपेयी

सांकेतिक तस्वीर.

नागदा। राष्ट्रपिता इंदौर में मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति में देवनागरी लिपि समारोह में उपस्थित हुए। गांधी के विरोध का तरीका अहिंसात्मक रहा हैं। गांधी आज भी प्रेरणा बने हुए हैं। गांधी के देवनागरी लिपि के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

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यह बात गांधी के 151वें जयंती समारोह में विशिष्ट वक्ता हरेराम वाजपेयी  ने वेबीनार को संबोधित करते हुए कही। विशिष्ट अतिथि डॉ. शहाबुद्दीन शेख ने अपने वक्तव्य में कहा कि महात्मा गांधी हिंदी और खादी के प्रबल समर्थक रहे हैं। वह सच्चे समाज सुधारक एवं राष्ट्रभक्त थे।

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आर्यामा सांयाल ने कहा कि गांधी ने कहा मेरा जीवन मेरा संदेश। अष्टप्रश्यता, उपवास, अहिंसा समर्थन ऐसे गांधी को नमन है। समारोह संयोजक डॉ. प्रभु चौधरी ने कहा कि गांधी की रामराज्य की अवधारणा थी।

जिसमें समाज के अंतिम पंक्ति का व्यक्ति भी सुखी हो। वेबीनार में डॉ. शम्भू पंवार, डॉ. भरत शेणकर, डॉ. मुक्ता कौशिक, डॉ. जी.डी. अग्रवाल, श्वेता गुप्ता ने भी विचार रखें।

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इस मौके पर अनील ओझा, डॉ. आशीष नायक, निक्की शर्मा, आभा श्रीवास्तव, डॉ. शिवा लोहारिया, डॉ. जय भारती चंद्राकर, ममता झा, मनीषा सिंह, निरुपा उपाध्याय आदि मौजूद थे। संचालन रागिनी शर्मा ने किया।

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सांकेतिक तस्वीर.

KAMLESH VERMA

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