एबुलेंस का महंगा बिल देख अजीजभाई ने बनाई बाइक एबुलेंस

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मैकेनिकल इंजीनियर की इंजीनियरिंग का कमाल, एबुलेंस का महंगा बिल देख अजीजभाई ने बनाई बाइक एबुलेंस, सात दिन में आठ गंभीर मरीजाें काे मिला जीवनदान
-अखबारों और साेशल मीडिया पर लाेगाें काे संसाधनाें के अभाव में जान गंवाता देख सूझा विचार
-मरीज के साथ दाे व्यक्ति भी बैठ सकते हैं, 25 किलाे का ऑक्सीजन सिलेंडर भी लगा है
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धार. किसी भी प्रकार की शिक्षा कभी बेकार नहीं जाती, शिक्षित व्यक्ति अपने ज्ञान के बूते हर मुसीबत का हल ढूंढ ही लेता है. मध्य प्रदेश के धार निवासी के एक इंजीनियर ने काेराेना मरीजाें की समस्या का समाधान खाेज निकाला है. एबुलेंस संचालकाें ने आपदा में अवसर खाेजना शुरू किया ताे वसंत विहार काॅलाेनी निवासी अजीज खान ने बाइक एबुलेंस बनाकर पीड़िताें के लिए नि:शुल्क उपलब्ध कराना शुरू किया है.
अजीज द्वारा बनाई बाईक एबुलेंस काे काेई भी व्यक्ति अपनी बाइक से टाेचन कर मरीज काे अस्पताल पहुंचा सकता है। एबुलेंस में जरूरी दवाइयाें से लेकर 25 किलाे का ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया गया है. जिसका तीन घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है.
बाइक एबुलेंस ले जाने की शर्त यह है कि संबंधित काे ऑक्सीजन सिलेंडर में दोबारा गैस रिफिल करवाना होता है. अजीज की बाइक एबुलेंस की बदाैलत आठ लाेगों काे नई जिंदगी मिली है.
30 हजार रुपए में बनी एबुलेंस में मरीज के साथ दाे अटेंडर बैठ सकते हैं
अजीज (बीई मैकेनिकल) है. साल 2006 के पूर्व वह शहर के पाॅलीटेक्निक काॅलेज में व्याख्याता हुआ करते थे. 2006 में उन्होंने खुद का उद्याेग डाला. जानकारी देते हुए अजीज बताते हैं कि सुविधाओं के  अभाव में जानें जा रही है. इसी बीच उनके पास एक एबुलेंस का बिल आया, जिसमें मरीज काे ले जाने का शुल्क दस हजार रु. था.
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तब उन्हें बाइक एबुलेंस बनाने का विचार आया. अजीज ने पहले इंटरनेट से एबुलेंस में हाेने वाली सुविधाओं की जानकारी जुटाई. जिसके बाद एबुलेंस बनाना शुरू किया. इसमें दाे शाॅअप, रबर के पहिए, फेब्रिकेशन सहित उसकी चाैड़ाई इतनी रखी कि मरीज के अलावा दाे लाेग और आराम से बैठ सकें. एबुलेंस निर्माण की लागत 30 हजार रु. आई है. दाे दिन में बाइक एबुलेंस तैयार हाे गई.
बाइक एबुलेंस की वजह से बची कर्मचारी बंशी के भाई अनिल की जान
बाइक एबुलेंस की वजह से अजीज की फैक्ट्री में कार्य करने वाले कर्मचारी बंशी के भाई अनिल की जान बच गई. खान के अनुसार कर्मचारी बंशी सलकनपुर के पास गांव में रहते हैं. बंशी जब काम कर रहे थे, तब उनके पास फाेन आया कि उनके भाई की तबीयत बहुत अधिक खराब है.
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बाइक के लिए इस प्रकार तैयार की गई एंबुलेंस
इस पर बंशी बाइक से एबुलेंस टाेचन कर अपने भाई काे अस्पताल ले गए. समय पर इलाज मिलने की वजह से अब उनकी हालत खतरे से बाहर है. बंशी की तरह सात अन्य लाेगाें ने भी एबुलेंस का उपयाेग किया है. अजीज का कहना है कि ग्राम पंचायताें में ऐसी एंबुलेंस बनवाकर रखी जा सकती है. जिसका इस्तेमाल ऐसे समय में किया जा सकता है। ताकि सुविधाओं के अभाव में किसी की जान नहीं जाए.
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