सोशल मीडिया पर कुछ भी लिखते हैं तो, बॉम्बे हाईकोर्ट की ये बात सुन लें ?

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल में कहा है कि भारतीय संविधान आर्टिकल-19 के अंतर्गत भारत वासियों को मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कोई ऐसा अधिकार नहीं है, जिसका आम नागरिक निरंकुश तरीके से उपयोग करें।

दरअसल महाराष्ट्र की एक महिला ने सीएम उद्धव ठाकरे, बेटे, महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आदित्य ठाकरे के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर टिप्पणी की थी।

शिकायती मामला कोर्ट पहुंचा. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार बॉम्बे हाईकोर्ट ने टिप्पणी दी है। महिला के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से भी कोर्ट ने इंकार किया है।

जस्टिस एसएस शिंदे की बेंच ने कहा –

“शायद भारतीय नागरिकों के बीच यह धारणा बन चुकी है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग वह बिना किसी नियंत्रण के इस्तेमाल कर सकते हैं. ऐसा बिल्कुल नहीं है.”

क्या है पूरा मामला

महाराष्ट्र निवासी सुनयना होले ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. अपील थी कि होले के ख़िलाफ तीन पुलिस एफआईआर दर्ज हैं, जिन्हें प्रभाव से रद्द किया जाए। इतना ही नहीं गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा भी दी जाए।

इसलिए हुई एफआईआर? 

आदित्य और उद्धव ठाकरे को लेकर होले ने ट्विटर प्लेटफार्म पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थी। शिकायत पर होले के खिलाफ धारा 505, 153-ए के तहत एफआईआर की गई।

किसने कराई थी होले पर एफआईआर? 

युवा सेना सदस्य रोहन चव्हाण की शिकायत पर होले के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। महाराष्ट्र सरकार ने होले को मौखिक आश्वासन दिया है कि दो हफ्ते तक गिरफ्तारी नहीं होगी।

लेकिन उन्हें आज़ाद मैदान पुलिस स्टेशन और पालघर के तुलिंज पुलिस स्टेशन में समय-समय पर जाकर पूछताछ में अपना सहयोग देना होगा।

मामला तुल पर था ही कि, इसी बीच 11 सितंबर को मुंबई में इसी प्रकार की एक घटना दोबारा हो गई। घटना से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लेकर बहस फिर से छिड़ गई है. इस बार एक एक्स नेवी ऑफिसर के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की।

आरोप है कि मारपीट करने वाले लोग शिवसेना सदस्य थे। बताया जा रहा है कि एक्स नेवी ऑफिसर ने उद्वव ठाकरे का कार्टून वॉट्सऐप पर सावर्जनिक ग्रुपों में फॉरवर्ड किया था। पीड़ित ने कहा देश में सबको अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है.

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