रैगिंग और सुसाइड के 8 साल पुराने केस में कोर्ट ने क्या सज़ा सुनाई?

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भोपाल जिला न्यायालय ने रैगिंग के एक मामले में चार छात्राओं को सजा सुनाई. सांकेतिक फोटो.

मैं अनीता शर्मा. B.Pharma सेकंड ईयर की छात्रा हूं. जब से मैं कॉलेज आई, तभी से मेरे साथ रैगिंग हो रही है. ये चारों लड़कियां (निधि, दीप्ति, कीर्ति और देवांशी) बहुत गंदी हैं. मैंने इन्हें एक साल तक कैसे झेला, ये मैं ही जानती हूं. मुझसे इन्होंने मिड सेमेस्टर की कॉपी तक लिखवाई थी. शिकायत करने पर मनीष सर ने मुझे कहा कि कॉलेज में रहने के लिए सीनियर्स की बात माननी पड़ती है.

भोपाल. एक छात्रा, जिसने सुसाइड के पहले ये नोट अपने माता-पिता और भाई के लिए छोड़ा था. जिसमें यह भी लिखा गया था, कि उसकी मौत के बाद उसे याद कर ना रोए. घटना साल 2013 की है, लेकिन इंसाफ करीब आठ साल बाद मिला है.

दरअसल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अनीता एक प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा थी. जहां पर पढ़ने वाली चार लड़कियों से परेशान होकर उसने सुसाइड कर लिया था. आरोप रैगिंग का था, जिसकी सुनवाई करते हुए 5 फरवरी 2021 को भोपाल की एक जिला अदालत ने फैसला सुनाया. आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में चारों लड़कियों को धारा-306 के तहत दोषी पाया गया. पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई. साथ ही दो-दो हज़ार रुपये का ज़ुर्माना भी लगाया. जिसके बाद चारों लड़कियों को जेल भेज दिया गया. वहीं, शिक्षक मनीष को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया गया.

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो- अनीता ने अपनी परेशानी अपने दोस्तों से भी साझा की थी. उसने कहा था कि वो अपने जूनियर्स को इस तरह कभी परेशान नहीं करेगी.

दैनिक भास्कर भोपाल में छपी एक खबर के अनुसार, सरकारी वकील मोहम्मत खालिद कुरैशी ने बताया कि पहली बार रैगिंग के मामले में लड़कियों को सजा हुई है. अनीता ने 6 अगस्त, 2013 को अपने घर में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया था. कोर्ट ने अपने फैसले में रैगिंग की सज़ा के बारे में जिक्र किया. कहा कि इन मामलों में सजा इतनी होनी चाहिए कि दूसरा व्यक्ति ऐसा करने के पहले कई दफे सोचे. और एडमीशन लेने वाले नए छात्रों को सुसाइड के लिए मजबूर ना होना पड़े.

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भोपाल जिला न्यायालय ने रैगिंग के एक मामले में चार छात्राओं को सजा सुनाई. सांकेतिक फोटो.

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रैगिंग के लिए इस हेल्पलाइन पर कॉल करें

अगर आप या आपका कोई परिचित भी रैगिंग से परेशान है, तो इसकी शिकायत करने के लिए हेल्पलाइन नंबर है- 1800-180-5522. यहां 12 भाषाओं में मदद उपलब्ध है

रैगिंग के अंतर्गत क्या-क्या आते हैं?

# किसी भी विद्यार्थी द्वारा नए छात्र को बोलकर या लिखकर परेशान करना या प्रताड़ित करना.

# नए छात्र के मन में डर पैदा करना, उसे शारीरिक या मानसिक चोट पहुंचाना.

# किसी नए छात्र से ऐसा काम कहना, जिसे करके फ्रेशर को शर्म या पीड़ा की भावना हो और उस कार्य को करके उस पर गलत प्रभाव पड़े.

# यौन शोषण करना, समलैंगिक हमले करना, मारपीट करना, अश्लील और भद्दी हरकतें करना, इशारे करना, शारीरिक नुकसान पहुंचाना.

रैगिंग में क्या सज़ा होगी?

# क्लास को अटेंड करने या फिर पूरे शैक्षणिक विशेषाधिकारों से सस्पेंड करना.

# स्कॉलरशिप या फेलोशिप को रद्द करना या फिर दी गई तो वापस लेना

# किसी परीक्षा या टेस्ट में बैठने की परमीशन ना देना

# रिजल्ट रोक देना.

# हॉस्टल से निकाल देना

# एडमीशन कैंसिल कर देना

# एक या चार सेमेस्टर कर रस्टीकेट कर देना

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