बकरा ईद कब की है 2021 में । Bakra Eid Kab Ki Hai 2021 Date

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बकरा ईद मुस्लिमजनों का एक विशेष पर्व है. ईद के दिन विशेष प्रार्थना, अभिवादन और उपहार भेंट कर मनाया जाता है. यदि भारत की बात करें तो इस दिन शासकीय अवकाश होता है, जिस दिन स्कूल, कॉलेज, सरकारी दफ्तर और अधिकांश व्यवसाय बंद रहते है. बकरा ईद को हम बलिदान पर्व, बकरीद, ईद उल जुहा या ईद उल बकाह के नाम से भी जानते हैं.

ईद उल जुहा या ईद उल बकाह भारत और अन्य मुस्लिम देशों में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है. इस दिन मुस्लमान नए कपडे़ पहनते है.  बकरा ईद के दिन मुस्लिम समाजजन ईदगाह या मस्जिद में जमा होते है और जमात के साथ 2 रकात नमाज़ अदा करते है. चलिए अब जानते है की साल 2021 में बकरा ईद कब है –  Bakra Eid Kab Ki Hai 2021

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बकरा ईद कब की है 2021 – Bakra Eid Kab Ki Hai 2021

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यदि देखा जाएं तो यह साफ़ पता चलता है की बकरा ईद की तारीख हर साल 10 से 12 दिन पीछे खिसकती है. जैसा की आपको पता है की ईद को मनाने का दिन एक दिन पहले चाँद को देखकर पता चलता है, लेकिन बकरा ईद का दिन चाँद के हिसाब से 10 दिन पहले भी देखा जा सकता है.

2021 mein Bakra Eid Kab Hai – बकरा ईद, मीठी ईद के लगभग 70 दिनों के बाद मनाई जाती है. साल 2021 की बकरा ईद भारत में 21 जुलाई 2021 को मनाई जाएगी. मुस्लिम धर्म की प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, यह त्यौहार 3 दिनों तक चलने वाला त्यौहार है, जिस कारण 20 जुलाई, मंगलवार से शुरू होकर 22 जुलाई, गुरुवार की शाम को समाप्त होगा.

सोशल मीडिया पर लोग बकरा ईद को Eid-ul-azha, Eid Quarbani, Eid ul Zuha और Eid-ul-Adha आदि नामों से भी जानते है.

बकरा ईद क्यों मनाया जाती है – Bakra Eid Kyo Manayi Jati Hai

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, हज़रत इब्राहिम को अल्लाह का पैगम्बर माना जाता है. इब्राहिम अपनी पूरी उम्र नेकी के कार्यो में जुटे हुए थे और उनका सारा जीवन जनसेवा और समाजसेवा में ही बीत गया, लेकिन करीब 90 वर्ष तक की उम्र में उनके कोई संतान नहीं हुई. इसके बाद उन्होंने खुदा की इबादत की और इनके चाँद सा बीटा इस्माइल हुआ.

इसके बाद इब्राहिम के सपने में खुदा ने आदेश दिया की अपनी सबसे प्यारी चीज़ को कुर्बान कर दो, तो उन्होंने अपने सबसे प्रिय जानवर को कुर्बान किया. इसके कुछ दिन बाद उन्हें फिर से सपना आया, की वो अपने बेटे की बलि दें. जिसके बाद उन्होंने अपने बेटे को कुर्बान करने का प्रण लिया था.

फिर उन्होंने आँख पर पट्टी बांधकर बेटे की कुर्बानी दी, लेकिन कुर्बानी के बाद जब उन्होंने देखा तो पता चला की उनका बेटा तो खेल रहा था और अल्लाह के करम से उनके स्थान पर उनके बकरी की कुर्बानी हो गई. तभी से आज तक इस दिन बकरे की कुर्बानी देनें की परंपरा चली आ रही है.

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