NGO रजिस्ट्रेशन के लिए आधार जरूरी, विधेयक को संसद ने दी मंजूरी

 NGO रजिस्ट्रेशन के लिए आधार जरूरी, विधेयक को संसद ने दी मंजूरी

Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2020-लोकसभा के बाद अब राज्यसभा ने सर्वानुमति से विदेशी अभिदाय विनियमन संशोधन विधेयक 2020 को मंजूरी दी है. एनजीओ के पंजीकरण के लिए धार नंबर जरूरी कर दिया गया है. साथ ही लोक सेवक के विदेशों से धनराशि हासिल करने पर पाबंदी का प्रावधान लागू कर दिया गया है.

नई दिल्ली. भारत के बाहर से मिलने वाली विदेशी सहायता राशि पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) (Parliament passes The Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2020) में संशोधन के विधेयक को लोकसभा के बाद अब राज्यसभा से  पास करा लिया है.

पास कराए गए संशोधनों में विदेशों से सहायता पाने वाले गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के सदस्यों और पदाधिकारियों का आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है.

इसे भी पढ़े : बिहार कैडर के IPS गुप्तेश्वर पांडेय को लोकसभा भेजने की तैयारी में JDU!

इतना ही नहीं सरकारी अधिकारियों के लिए विदेशी धन लेने पर पूरी तरह रोक लगाने का भी प्रावधान प्रभावी किया गया है. विधेयक को पेश कर गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने तर्क दिया था कि, विदेशों से मिलने वाली सहायता और राशि के बीच पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से संशोधन जरूरी हैं.

मालूम हो कि एफसीआरए के अंतर्गत पंजीकृत एनजीओ को 2016-17 और 2018-19 के बीच 58,000 करोड़ों की राशि का विदेशी फंड मिला. वर्तमान में देश में लगभग 22,400 एनजीओ हैं.

FCRA में संशोधन से जुड़ी जरूरी बातें-एफसीआरए में प्रस्तावित संशोधनों में एनजीओ के लिए विदेशी सहायता से मिली रकम से ऑफिस के खर्चे की सीमा घटाकर 20 फीसद कर दी गई है यानी एनजीओ को विदेशी सहायता का 80 फीसदr उस काम में खर्च करना होगा जिसके लिए विदेशी धन दिया गया था.

इसे भी पढ़े : सिक्युरिटी गेट एंट्री पास से ठेका श्रमिकों को काम पर बुला रहा ग्रेसिम उद्योगय प्रबंधन, नहीं मिलेगा हितलाभ

संसोधन के अनुसार सरकार एनजीओ के एफसीआरए लाइसेंस को तीन साल के लिए निलंबित करने के साथ निरस्त कर सकती है. संशोधनों के बाद से देश में एनजीओ दिल्ली स्थित स्टेट बैंक (SBI) की शाखा में ही विदेशी सहायता प्राप्त कर सकेगा. एनजीओ के लिए स्थानीय बैंक में खाता खोलने की अनुमति दी गई है.

साल 2011 में लागू कानून में दो बार किया जा चुका है संशोधन

विदेशी अंशदान (योगदान) विधेयक, 2010 को लोगों या एसोसिएशन या कंपनियों के विदेशी धन राशि के इस्तेमाल को नियमित (Regulate) करने के लिए लागू किया गया था. राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) को खतरा पहुंचाने वाली किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि के लिए विदेशी धनराशि  (Foreign Contribution) के उपयोग पर मनाही है.

यह कानून 1 मई 2011 को लागू किया गया था. संशोधन दो बार हो चुके हैं. वित्त कानून की धारा-236 के आधार पर  पहली बार संशोधन हुआ. वित्त कानून, 2018 की धारा-220 के अंतर्गत दूसरी बार संशोधन हुआ था.

सरकारी अधिकारी या विभाग नहीं ले सकेंगे विदेशी चंदा

संशोधन विधेयक में तर्क दिया गया है कि विदेशी नागरिक होने पर पासपोर्ट की एक कॉपी या ओसीआई कार्ड (OCI Card) की कॉपी देना आवश्यक है. लोक सेवक (Public Servants) और सरकार या इसके नियंत्रण वाले निगम को ऐसी इकाइयों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव है, यह भी विदेशी अनुदान राशि नहीं ले सकते. सरकारी विभाग या अधिकारी विदेशी चंदा नहीं ले सकेगा.

aadhar-is-necessary-for-ngo-registration-parliament-approved-the-bill

KAMLESH VERMA

https://newsmug.in

Related post