छठ पूजा 2021 में कब हैं । 2021 Chhath Puja Date Time

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प्रतिकात्मक तस्वीर

Overview

छठ पूजा बिहार और उत्तर प्रदेश वासियों की आस्था का प्रतिक है. यह एक सांस्कृतिक पर्व है जिसमें पुत्र की सुख समृद्धि के लिए व्रती सूर्य की उपासना करती हैं. छठ पूजा हिंदू धर्म का बेहद ही प्राचीन त्यौहार है, जो ऊर्जा के परमेश्वर के लिए समर्पित है जिन्हें सूर्य या सूर्य षष्ठी के रूप में भी जाना जाता है. एक सर्वव्यापी प्राकृतिक शक्ति होने के कारण सूर्य को आदि काल से पूजा जाता रहा है. पुत्र प्राप्त होने के बाद महिलाएं छठ व्रत को उठाती है. प्राचीन कथाओं के अनुसार अज्ञातवास में द्रौपदी ने पांडवों की कुल परिवार की कुशलता के लिए वैसी ही पूजा अर्चना की थी जैसी अभी छठ में की जाती है. लेख के जरिए हम जानेंगे कि, छठ पूजा 2021 में कब है – छठ पूजा के लाभ । 2021 Chhath Puja Date Time । छठ पूजा 2021 में कब मनाया जाएगा

छठ पूजा (Chhath Puja) मुख्य रूप से पूर्वी भारत में मनाया जाने वाला एक पर्व है. बिहार के साथ ही छठ पर्व अब पूरे नेपाल में मनाया जाने लगा है. कई लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर भी यह व्रत उठाते हैं और आजीवन या जब तक संभव हो सके यह व्रत करते हैं.

चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में ब्राह्मण की कोई आवश्यकता नहीं. व्रत करने वाली महिलाएं स्वयं पूजा करती है. इस कठिन पूजा में सहायता के लिए नाते रिश्तेदारों से लेकर पास पड़ोसी तक शामिल हो जाते हैं. यानि जो छठ नहीं करते वो भी व्रती की गतिविधियों में सहभागी बन कर उसका हिस्सा बन जाते हैं.

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छठ पूजा 2021 – Chhath Puja 2021 Date, Time (Muhurat) – छठ पूजा कब है?

छठ पूजा 2021 का त्यौहार बुधवार, 10 नवंबर को मनाया जाएगा. यह पवित्र त्योहार कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाता है. मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है. यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है. पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में. चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है.

छठ पूजा 4 दिनों तक चलती हैं. छठ मैया को प्रसन्न करने के लिए उपासक महिलाएं 36 घंटे का निर्जल व्रत रखती हैं. छठ पर्व चार दिनों की अवधि में मनाया जाता हैं. इनमें पवित्र स्नान, उपवास और पीने के पानी से दूर रहना, लंबे समय तक पानी में खड़ा होना, और अर्घ्य देना शामिल है.

Chhath Puja 2021 Date (छठ पूजा 2021): 10 नवंबर 2021, बुधवार

छठ पर्व की तारीख (Chhath Puja Date):

  • 08 नवंबर 2021, सोमवार – नहाय-खाय
  • 99 नवंबर 2021, मंगलवार – खरना
  • 10 नवंबर 2021, बुधवार – डूबते सूर्य का अर्घ्य
  • 11 नवंबर 2021, गुरुवार – उगते सूर्य का अर्घ्य

अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त – Chhath Puja Muhurat

  • सूर्यास्त का समय (संध्या अर्घ्य): – 10 नवंबर, 05:30 PM
  • सूर्योदय का समय (उषा अर्घ्य) – 11 नवंबर, 06:40 AM

छठ पूजा में प्रयोग होने वाली सामग्री 

  • दौरी या डलिया
  • सूप – पीतल या बांस का
  • नींबू
  • नारियल (पानी सहित)
  • पान का पत्ता
  • गन्ना पत्तो के साथ
  • शहद
  • सुपारी
  • सिंदूर
  • कपूर
  • शुद्ध घी
  • कुमकुम
  • शकरकंद / गंजी
  • हल्दी और अदरक का पौधा
  • नाशपाती व अन्य उपलब्ध फल
  • अक्षत (चावल के टुकड़े)
  • खजूर या ठेकुआ
  • चन्दन
  • मिठाई
  • इत्यादि
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छठ पूजा के चार दिन का वृतांत

चतुर्थी – नहाय खाय

छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को नहाय खाय के साथ होती है. इस दिन पूरे घर की सफाई कर के उसे पवित्र बनाया जाता है. छठ व्रत स्नान करना होता है. फिर स्वच्छ वस्त्र धारण कर के शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत का शुभआरंभ करना होता है.

पंचमी – लोखंडा और खरना

दूसरे दिन यानी कार्तिक शुक्ल की पंचमी तिथि को व्रत रखा जाता है. इसे खरना कहा जाता है. पूरा दिन निर्जल उपवास करना होता है. और शाम को पूजा के बाद भोजन ग्रहण करना होता है. इस अनुष्ठान को खरना भी कहा जाता है. खरना का प्रसाद लेने के लिए आस-पड़ोस  के लोगों को भी बुलाया जाता है. प्रसाद में घी चुपड़ी रोटी, चावल की खीर बना सकते हैं.

षष्ठी – संध्या अर्ध्य

सूर्य षष्ठी पर सूर्य देव की विशेष पूजन किया जाता है. इस दिन छठ का प्रसाद बनाया जाता है. प्रसाद में चावल के लड्डू, फल, और चावल रूपी साँचा प्रसाद में शामिल होता है. शाम के समय एक बाँस की टोकरी या सूप में अर्ध्य सामग्री सजा कर व्रती, सपरिवार अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य अर्पण करने घाट की और प्रयाण करता है, किसी तालाब या नदी किनारे व्रती अर्ध्य दान विधि सम्पन्न करता है. इस दिवस पर रात्रि में नदी किनारे मेले जैसा मनोरम दृश्य सर्जित होता है.

सप्तमी – परना दिन, उषा अर्ध्य

व्रत के अंतिम दिवस पर उदयमान सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है. जिस जगह पर पूर्व रात्री पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य दिया था, उसी जगह पर व्रती (व्रतधारी) इकट्ठा होते हैं. वहीं प्रसाद वितरण किया जाता है. और सम्पूर्ण विधि स्वच्छता के साथ पूर्ण की जाती है.

छठ पूजा के अन्य नाम

  • छठी माई की पूजा,
  • डाला छठ,
  • सूर्य सस्थी,
  • डाला पूजा छठ पर्व

Frequently Asked Questions (FAQ)

छठ या सूर्यषष्ठी व्रत में किन देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है?

इस व्रत में सूर्यदेव और छठ मैया दोनों की पूजा की जाती है. हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, छठ मैया संतानों की रक्षा करती है और उनको लंबी उम्र देती है.

छठ मैया कौन-सी देवी होती हैं?

सृष्टि की अधिष्ठाेत्री प्रकृति देवी के एक प्रमुख अंश को देवसेना कहा गया है. प्रकृति का छठा अंश होने के कारण इन देवी का एक प्रचलित नाम षष्ठी‍ है. पुराणों में पष्ठी देवी का एक नाम कात्यायनी भी है. षष्ठी देवी को ही छठ मैया कहा गया है, छठ मैया नि:संतानों को संतान देती हैं और सभी बालकों की रक्षा करती हैं और उनको दीर्घायु बनाती है.

छठ पूजा मनाने की कैसे हुई शुरूआत?

प्राचीन समय में एक राजा थे. उनका नाम राजा प्रियव्रत था. राजा की कोई संतान नहीं थी. इसके कारण वह बेहद दुखी और चिंतित रहते थे. फिर एक दिन राजा की महर्षि कश्यप से भेंट हुई. राजा ने अपना सारा दुख महर्षि कश्यरप को बताया. महर्षि कश्यप ने राजा को पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराने को कहा. राजा ने यज्ञ कराया, जिसकी बाद उनकी महारानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया.

लेकिन दुर्भाग्य से शिशु मरा पैदा हुआ था. राजा को जब यह समाचार मिला तो वह बहुत ही दुखी हुआ. तभी राजा के सामने अचानक एक देवी प्रकट हुई. देवी ने राजा के पुत्र को जीवित कर दिया. देवी की इस कृपा से राजा बहुत प्रसन्न हुआ और उसने षष्ठी देवी की स्तुति की। तभी से छठ पूजा मनाई जाती है.

नदी और तालाब किनारे ही क्यों की जाती है यह पूजा?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, छठ पर्व पर सूर्यदेव को जल का अर्घ्य  देने का विधान है. इस पर्व पर सूर्य को अर्घ्यज देने और स्नान करने का विशेष महत्व है. इसलिए यह पूजा साफ सुथरी नदी या तालाब के किनारे की जाती है.

ज्यादातर महिलाएं ही छठ पूजा में बढ़-चढ़कर हिस्सा क्यों लेती हैं?

महिलाएं अपनी संतान से बेहद प्यार करती है. यही वजह है कि वह छठ मैया से संतान के स्वास्थ्य और उनके दीर्घायु होने की पूजा में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं.

क्या यह पूजा किसी भी धर्म या जाति के लोग कर सकते हैं?

सूर्यदेव सभी के ईष्ट होते हैं. वह सभी प्राणियों को समान नजर से देखते हैं. छठ पूजा में किसी जाति या धर्म का कोई भेद नहीं होता है। इस पावन पर्व हर जाति-धर्म के लोग मना सकते हैं.

ज्यादातर बिहार के लोग ही छठ पूजा क्यों मनाते हैं?

बिहार में सूर्य पूजा और छठ मैया की पूजा का विशेष महत्व है. यहां के लोगों को इस पर्व का बेसब्री से इंतजार रहता है. बिहार में सूर्य देव की पूजा सदियों से प्रचलित है. सूर्य पुराण में यहां के देव मंदिरों की महिमा का वर्णन मिलता है. यहां सूर्यपुत्र कर्ण की जन्मस्थली भी है. इसलिए इस प्रदेश के लोगों की आस्था सूर्य देवता में ज्यादा है.

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