क्या हुआ चंद्रयान-1 का ? आपको पता है यान-1 कहां है?

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What happened to Chandrayaan-1? Do you know where Yan-1 is?

सुनिए हिम्मत मत हारिए. Chandrayaan-2 की अधूरी कामयाबी के बाद भी दुनियाभर के देश भारत के इसरो की तारीफ करते नहीं थक रहे. आने वाले साढ़े सात साल Chandrayaan-2 पोलोड चांद की सतह से हमारे लिए हाई रेजोल्यूशन तस्वीरें खींचेगा. दूसरी ओर भले ही Chandrayaan-2 को एक सफल मिशन का दर्जा दिया जा रहा हो, लेकिन इसके पीछे की सफलता में सबसे बड़ा सहयोग Chandrayaan-1 का है.

पूरा देश जानता है कि, Chandrayaan-2 के साथ भी ऑर्बिटर चांद पर पहुंचाया गया था, लेकिन बार खुशी इस बात की है कि, ऑर्बिटर ज्यादा तकनीकी से भरपूर है. लैंडर से संपर्क टूट जाने के पूर्व ही इसरो ने बहुत कुछ जानकारी प्राप्त कर ली गई. इसरो के पूर्व चेयरमैन जी माधवन नायर का तर्क है कि, Chandrayaan-2 ने अपने 95 प्रतिशत उद्देश्यों को पूरा कर लिया. दुख की बात यह है कि, चांद की सतह से दो किमी दूर आकर कही खो गया.चलिए दस साल पीछे चलते है. Chandrayaan-1 की सफलता के बाद ही अपने छोटे भाई Chandrayaan-2 को चांद के ऑर्बिटर में जाने की प्रेरणा मिली.

आपको पता है Chandrayaan-1 कहां है? Do you know where Yan-1 is?

जवाब है तो आर्टिकल से लौट जाएं, चलिए मजाक था. दरअसल Chandrayaan-1 भारत का पहला चंद्र मिशन था जिसे आज से 11 वर्ष पूर्व 22 अक्तूबर 2008 को आंध्र प्रदेश के सतीश धवन स्पेस सेंटर से मिशन पर भेजा गया था.

चंद्रयान-1 ने 3,400 से भी अधिक बार चांद के चक्कर लगाए साथ ही 29 अगस्त 2009 तक Chandrayaan-1 ने अपना कार्य बखूबी किया. 312 दिनों तक Chandrayaan-1 ने अपने कार्य को गतिपूर्वक किया. इसरो की मानें तो चंद्रयान-1 1380 किलो तक का भार उठाने में सक्षम था.

भारत के लिए गौरव की बात यह है कि, Chandrayaan-1 के मिशन के साथ भारत ने स्पेस की दुनिया में अपना नाम स्थापित कर लिया था क्योंकि चंद्रयान-1 का निर्माता भारत ही था. इसका निर्माण चांद की परिक्रमा करने के लिए किया गया था.

जिसे पीएसएलवी-सी 11 प्रक्षेपण यान में लॉन्च किया गया था जिसने सफलतापूर्वक अंतरिक्ष यान को लूनर ऑर्बिट में 8 नवंबर 2008 में रख दिया था. साल 2008 14 नवंबर को एक बड़ी जीत तब मिली जब एमआईपी को अलग किया गया. जिसके बाद वह लूनर साउथ पोल में प्रवेश कर गया. जिससे भारत चौथा देश बन गया जो की लूनर सरफेस पर जाने में सफल रहा.

चलिए अब जानते हैं क्या हुआ चंद्रयान-1 का ? What happened to Chandrayaan-1?

बीते हुए सालों की बात करें तो टेक्निकल प्रॉब्लम से यह Chandrayaan-1 लड़ता रहा. जिसके चलते 29 अगस्त 2009 को इसरो ने मिशन ओवर का ऐलान कर दिया. चंद्रयान-1 ने भले ही अपनी सेवा 2 साल से भी कम दिया मगर इसने अपना 95 प्रतिशत ऑब्जेक्टिव पूरा कर लिया. चंद्रयान-1 को बर्फ, मैग्नेशियम,एल्युमीनियम और सिलिकॉन चाँद के सतह पर मिली थी.

What happened to Chandrayaan-1? Do you know where Yan-1 is?

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