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तीनों अंगों के मुखिया में जानें क्या है एक बात कॉमन

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तीनों अंगों के मुखिया में जानें क्या है एक बात कॉमन l This is one thing common among the heads of the three organs

लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवने 31 दिसंबर 2019 को हमारे देश के नए आर्मी चीफ के रुप में मनोनीत किए गए हैं. मुकुंद ने जनरल बिपिन रावत का पदभार ग्रहण किया है. इधर जनरल बिपिन रावत को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है. रावत देश के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ (CDS) मनोनीत किए गए है.

पूर्व में लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवने श्रीलंका गई शांति सेना का प्रमुख हिस्सा थे. लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवने ने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी काफी समय तक अहम भूमिका निभाते हुए काम किया है. मूल रुप से पुणे के रहने वाले लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवने सिख लाइट इंफेन्ट्री के ऑफिसर हैं.

लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवने रेजिमेंट से आर्मी चीफ़ के पद तक पहुंचने वाले तीसरे अफसर है. तीसरे इसलिए क्योंकि पूर्व में जनरल वीपी मलिक और बिक्रम सिंह उक्त पदों पर रह चुके हैं. खास बात यह है कि, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज नरवने के आर्मी चीफ़ बनने के साथ ही वर्तमान में देश की तीनों सेनाओं के मुखिया नेशनल डिफ़ेंस एकेडमी (NDA) के एक ही बैच के ट्रेनी रह चुके हैं.

जिसमें नौसेना के चीफ़ एडमिरल करमबीर सिंह, एयरफोर्स चीफ़ राकेश कुमार सिंह भदौरिया और आर्मी चीफ़ मनोज नरवने 1976 में एक साथ NDA ट्रेनिंग ले चुके हैं.

इतना ही नहीं संयोग यह भी है कि, एडमिरल करमबीर सिंह और लेफ्टिनेंट जनरल मनोज नरवने का साथ NDA में आने के पूर्व दोनों साथ में स्कूल मेट भी रह चुके है.

एडमिरल करमबीर सिंह ने 31 मई, 2019 को नौसेना के मुखिया का अहम जिम्मा संभाला था. दूसरी ओर राकेश कुमार सिंह भदौरिया 30 सितंबर, 2019 को एयर चीफ़ मार्शल के पद पर पहुंचे थे.  अब दोबारा 44 साल बाद उक्त तीनों देश की सेना के तीनों अंगों के सबसे बड़े पद पर पहुंच कर अहम भूमिका निभाएंगे.

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तीनों सेनाओं के चीफ़ NDA के सेम बैच से निकले हैं.

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