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भगवान विश्वकर्मा की पूजा से वास्तुदोष नहीं होता-शेखावत

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भगवान विश्वकर्मा की पूजा से वास्तुदोष नहीं होता-शेखावत | The worship of Lord Vishwakarma does not cause Vastu Dosh

नागदा। संसार में ज्ञान, कला, विज्ञान के अधिष्ठात्रा भगवान Vishwakarma मानव मात्र का कल्याण करते है आज के विज्ञान की उन्नति का श्रेय भगवान विश्वकर्माजी को है। पूरे भारत में भगवान विश्वकर्माजी के उपासको की संख्या 25 करोड़ के लगभग है।

भगवान Vishwakarma जी की पूजा अर्चना जीवन की विघ्न बाधाओं का अंत करती है। यह बात सर्व विश्वकर्मा सामाजिक कल्याण संस्था नागदा द्वारा आयोजित अन्नकूट महोत्सव व सम्मान समारोह में बतौर अतिथि के रुप में शामिल हुए पूर्व कर्मकार मंडल अध्यक्ष सुल्तानसिंह शेखावत ने कही।

शेखावत ने इससे संबंधित कई संस्मरण भी सुनाए। भगवान Vishwakarma की पुजा करने पर घरों में वास्तुदोष नहीं रहता। समारोह रविवार दोपहर 12 बजे श्री राम कॉलोनी स्थित विश्वकर्मा मंदिर परिसर में हुआ। समारोह अतिथि एसडीएम आरपी वर्मा ने Vishwakarma वंशज नल नील द्वारा सेतु बांध के वृतान्त से लेकर लक्ष्मण को मेघनाद द्वारा शक्ति लगने से उबारने में हनुमान शक्ति व लक्ष्मण पत्नी उर्मिला की पतिभक्ति पर सुन्दर-सुन्दर चैपाई के माध्यम से अपनी बात रखी।

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श्रीराम के जीवन में विश्वकर्माजी का योगदान विषय पर भी प्रकाश डाला। अतिविशिष्ट अतिथि सीएसपी, नपा अध्यक्ष अशोक मालवीय ने भी भगवान Vishwakarma व उनके उपासको के त्याग व सेवा समर्पण का चित्रण उकेरा। इस मौके पर जगदीश विश्वकर्मा, हरीश पांचाल, रामअवतार शर्मा, गोरधनलाल विश्वकर्मा व मोहनलाल लोहार ने भी विचार रखे।

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समारोह के पूर्व मंदिर पर दोपहर 12 बजे भगवान Vishwakarma की आरती हुई। जिसके बाद अतिथियों का उद्बोधन व सम्मान समारोह हुआ। स्वागत भाषण समारोह की अध्यक्षता कर रहे समिति की अध्यक्ष कैलाश सनोलिया ने दिया। अतिथि परिचय डॉ. पं. लक्ष्मीनारायण सत्यार्थी ने दिया।

समारोह में रामअवतार शर्मा, जगदीश विश्वकर्मा, बालमुकुन्द विश्वकर्मा, हरीश पांचाल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्षा विमला चैहान, सलीम खान व प्रकाश जैन का सम्मान किया गया।

अतिथियों का स्वागत सनोलिया, मोहनलाल लोहार, आर.सी. विश्वकर्मा, राजेन्द्र शर्मा, प्रभुलाल लोहार, अल्केश शर्मा, कैलाश शर्मा, मुकेश विश्वकर्मा, पं. दीपक रावल, रमेशचन्द्र शर्मा, पुरूषोत्तम व्यास, कैलाश खनार, भंवरलाल पांचाल ने किया। संचालन डॉ. पं. लक्ष्मीनारायण सत्यार्थी ने किया। आभार राजेन्द्र शर्मा ने माना।

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