ऐसा शख्स जिन्होंने अंतिम सांस तक नहीं छोड़ी संघ की गणवेश

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संघ की गणवेश में जिंदगी में गुजराने वाले पूर्व हेड मास्टर ने दुनिया को कहा अलविदा

नागदा. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) नाम सुनने के बाद अनुशासन का परिचय देने की आवश्यकता नहीं है. संघ के अनुशासन को ताउम्र जीवन में उतारने वाले एक ऐसे स्कूल हेडमास्टर जिन्होंने पूरा जीवन संघ के गणवेश पहनकर ही गुजार दिया. यकिन नहीं हो रहा ना, लेकिन सच है.

दुखद बात यह है कि, अनुशासन की परिभाषा को जीवन में ढालने वाले मोहनलाल शुक्ला का निधन हो गया है. शुक्ला बीमार चल रहे थे, उज्जैन के गुरुनानक अस्पताल में उपचाररत थे. 11 अगस्त की शाम को 90 वर्ष की आयु में शुक्ला का देहांत हो गया.

मध्य प्रदेश स्कूली शिक्षा विभाग में हेड मास्टर रह चुके मोहनलाल शुक्ला का जन्म 1928 में हुआ था. शुक्ला नागदा व आसपास के कई गांव बैरछा, पिपलौदा, बेड़ावन, आलोट, रुनिजा आदि ग्रामीण शासकीय स्कूलों में सेवा चुके हैं. हम शुक्ला को इसलिए याद कर रहे हैं,

क्योंकि इन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की गणवेश यानी नेकर व कमीज को जीवन भी पहना. यकिन नहीं हो रहा ना, लेकिन सच है, शुक्ला ने बचपन से ही संघ की गणवेश को धारण करे रखा. यहां तक कि अंतिम सांस लेने के दौरान भी शुक्ला ने संघ की गणवेश को ही पहने रखा.

शुक्ला बचपन से ही वह आरएसएस से जुड़ गए और इतने प्रेरित हुए कि जीवनभर संघ की गणवेश में ही गुजारने का निर्णय लिया. शुक्ला ठंड व बारिश के मौसम भी संघ की गणवेश सफेद शर्ट व खाकी नेकर ही पहनते थे. शुक्ला का जब विवाह हुआ था तो उस समय भी उन ने संघ की गणवेश पहन रखी थी.

30 जनवरी 1948 को जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या हुई थी, उस समय तात्कालीन सरकार द्वारा आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. जिसको लेकर देश भर में विरोध-प्रदर्शन हुआ था. शुक्ला ने भी आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. नतीजन रतलाम जिले के सैलाना रियासत में उन्हें जेल भेज दिया. शुक्ला ने करीब 3 माह तक जेल में गुजारे.

The person who did not leave the Union uniform till his last breath
मोहनलाल शुक्ला

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