राजा विक्रमादित्य की जन्मस्थल पर मौजूद शिवमंदिर हो रहा जलमग्न

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  • प्राचीन काल में राजा विक्रमादित्य महाकाल दर्शन के लिए करते थे मंदिर की गुफा का उपयोग
  • सुरक्षा को देखते हुए ग्रामीणों ने बंद कर दिया गुफा का रास्ता

नागदा. शहर से करीब 11 किमी दूर स्थित ग्राम भीकमपुर राजा विक्रमादित्य की जन्मस्थली पर मौजूद भीकमपुर महाकाल मंदिर गर्भगृह धीरे-धीरे जलमग्न हो रहा है. बीते पांच दशकों में गर्भगृह कभी जलमग्न नहीं हुआ है. लेकिन 14 सिंतबर से लगातार शिवलिंग जल में समाहित होते जा रहा है.

रोचक बात यह है कि, मंदिर में पहुंचने वाली पानी बिलकुल स्वच्छ है. एक सप्ताह से अधिक समय से मंदिर के गर्भगृह में पानी का स्तर बढ़ रहा है. ग्रामीणों ने कई बार मोटर की सहायता से पानी निकालने की कोशिश की, लेकिन सफलता हाथ नहीं लग सकी.

मंदिर में पानी की आवक को सबसे पहली बार देखने वाले मंदिर पुजारी बालूगिरी गोस्वामी के अनुसार बीते दिनों से गर्भगृह में पानी की आव आ रही है. पानी गुफा की दिवार में मौजूद पार्वती की प्रतिमा के पीछे से आ रही है.

#पांच दशकों में पहली बार जलमग्न हुआ शिवलिंग

मंदिर समिति सदस्य मांगूसिंह व सवजी गुर्जर बताते है, कि गर्भगृह में हर तीन साल में सिलन व शिवलिंग तक कुछ मात्रा में बारिश का पानी पहुंचता है, लेकिन शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाना पहली बार देखा गया है. प्रति तीन साल में गर्भगृह में पानी आने का क्रम चलता है, उसके पीछे का कारण है.

Shiva temple at the birth place of King Vikramaditya being inundated

ग्राम में मौजूद प्राचीन कुंड. जिसके लबालब हो जाने के कारण शिवलिंग तक कुछ मात्रा में पानी पहुंच जाता है. लेकिन इस बार गर्भगृह में लगातार पानी का स्तर बढ़ रहा है. हमें बुजुर्गों से सुना है कि, गुफा उज्जैन महाकाल मंदिर को जोड़ती है. संभवत: क्षेत्र में 82 इंच बारिश दर्ज होने के कारण गुफा के बंद हो चुके मार्ग खुल गए होंगे.

#पानी स्वच्छ व सुंगधित

शिवलिंग को जलमग्न करने वाला पानी साफ व स्वच्छ है. किसी प्रकार की गंदगी और मिट्टी भी नहीं है. ग्रामीणों का तर्क है कि, यदि किसी जलस्त्रोत का पानी मंदिर में पहुंचता तो पानी मटमैला होता. लेकिन एक सप्ताह से मंदिर के गर्भगृह का जलस्तर बढऩे का क्रम चल रहा है पानी एकदम साफ व स्वच्छ है.

Shiva temple at the birth place of King Vikramaditya being inundated
नागदा। तांबे की जलाधारी के पीछे मौजूद सुरंग से रिस रहा पानी।

ना ही पानी में से किसी प्रकार की बदबू आ रही है. जबकि प्राचीन पत्थरों पर एक सप्ताह से अधिक दिनों तक पानी एकत्र होने पर काई या फिसलन की स्थिति निर्मित हो जाती है. लेकिन भीकमपुर महाकाल मंदिर में इस प्रकार की कोई स्थिति नहीं हैं.

मंदिर गुफा में स्थित है. पीछे एक सुरंग है, जिसे कई सालों पहले बंद कर दिया गया. गुफा का उपयोग राजा विक्रमादित्य उज्जैन महाकाल मंदिर जाने के लिए करते थे. शिवलिंग के पीछे की ओर पत्थर में एक पार्वती की प्रतिमा है. उक्त प्रतिमा के पीछे से पानी की धार आ रही है. खास बात यह है कि, पानी शुद्ध है. ग्राम के समीप मौजूद कुंड का पानी रिसकर पहुंच रहा होगा.

 

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