राहत की खबर : 15 नवंबर के बाद ही गेहूं की बुवाई करें किसान

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राहत की खबर : 15 नवंबर के बाद ही गेहूं की बुवाई करें किसान | Relief news: farmers sow wheat only after November 15 | खेतों में जमा नमी से घबराने की नहीं है जरुरत

नागदा। अत्यधिक बारिश होने से खेतों की जुताई नहीं होने से चिंतित किसानों के लिए राहत भरी खबर है। कृषि विभाग के मानक के आधार पर फिलहाल रबी फसलों की बुवाई का उचित समय नहीं हुआ है। गेहूं की फसलों की बुवाई के लिए किसानों के पास 15 नवंबर तक का समय है।

ऐसे में किसानों को जल्द बाजी नहीं करते हुए फिलहाल मटर, लहसुन व सब्जियों जैसी फसलों की बुवाई करना चाहिए। उक्त बात की पुष्टि कृषि विभाग के एएसडीओ केएस मालवीय ने की है। मालवीय के अनुसार फिलहाल तापमान मानक स्तर पर नहीं पहुंचा है। गेहूं फसल की बुवाई का मानक तापमान 20 से 22 डिग्री सेल्सियस होता है। जो कि क्षेत्र में 15 नवंबर के बाद से आएगा।

#15 नवंबर के बाद करें बुवाई

दरअसल विकासखंड में औसत से अत्यधिक बारिश होने के कारण किसानों को इस बात की चिंता सता रही है कि, खेतों में नमी अधिक होने से बुवाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में किसान गेहूं की बुवाई करने के लिए परेशान हो रहे हैं।

दूसरी ओर कृषि विभाग ने किसानों के लिए राहत भरी खबर देते हुए इस बात की पुष्टि की है, कि 15 नवंबर के बाद ही गेहूं जैसी रबी फसलों की बुवाई किया जाना चाहिए। जिससे किसानों को उचित मात्रा में गेहूं का उत्पादन मिल सकें।

#तिलहलन फसलों की बुवाई का उचित समय

फिलहाल दिन व रात का तापमान एक समान है। जो कि गेहूं की बुवाई के लिए ऑटीमम तापमान नहीं है। ऐसे में किसानों को सब्जियों जैसे मटर, लहसुन व मैथी की बुवाई करना चाहिए।

वहीं गेहूं की बुवाई के लिए 20 से 23 डिग्री सेल्सियस होने के बाद ही बुवाई किया जाना चाहिए। साथ ही किसानों को बुवाई के पूर्व बीजों का उचित उपाचरण करने के बाद ही बुवाई करना चाहिए। बीजों का उपाचरण करने से किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ ही फसलों से कीटों का प्रकोप भी दूर रहता है।

इनका कहना-
किसानों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। फिलहाल बुवाई के लिए तिलहन फसलों का समय है। विकासखंड में रबी फसलों की बुवाई के लिए 15 नवंबर के बाद से उचित समय माना जाता है। इस समय में गेहूं की बुवाई के लिए 20 से 22 डिग्री सेल्सियस यानी के मानक तापमान होता है। उक्त समय पर किसानों को गेहूं की बुवाई शुरु करना चाहिए।
केएस मालवीय
सीनियर एग्रीकल्चर डेवल्पमेंड ऑफिसर

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