देव जागते ही शुरु हुई मांगलिक कार्यों की बेला, मंदिरों में तुलसी विवाह

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देव जागते ही शुरु हुई मांगलिक कार्यों की बेला, मंदिरों में हुई तुलसी विवाह | Mangalik works started as soon as God awakened, Tulsi marriage took place in temples

नागदा। चार माह से बंद पड़े मांगलिक कार्यों का शुभारंभ शुक्रवार को तुलसी विवाह के साथ हुआ। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष एकादशी को देवप्रबोधिनी एकादशी के रुप में शहर में मनाया गया। इस दिन को देवउठनी ग्यारस भी कहा जाता है, साथ ही इस दिन से मंगल कार्यों का शुभारंभ हो जाता है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि, एकादशी को ही भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार मास शयन के बाद जागते हैं।

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दीपावली पर्व के समाप्त होने के बाद एकादशी को भगवान विष्णु के जागने के साथ ही वैवाहिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाती है। पौराणिक मान्यताओं की मानें तो तुलसी विवाह करवाने से कन्यादान का फल प्राप्त होता है। जिसके बाद 13 दिसंबर से खरमास हो जाएगा। खरमास में वैवाहिक कार्यक्रमों पर ब्रेक लग जाता है।

#शुभ विवाह मुहूर्त, 8 नवंबर को है अबूझ मुहूर्त

नवंबर मास में 8 नवंबर, शुक्रवार देव उठनी ग्यारस, 19 नवंबर मंगलवार, मार्गशीर्ष कृष्ण सप्तमी , 20 नवंबर बुधवार, मार्गशीर्ष अष्टमी 21 नवंबर गुरुवार, मार्गशीर्ष कृष्ण नवमी, 22 नवंबर शुक्रवार, मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी, 23 नवंबर शनिवार, मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी, 28 नवंबर गुरुवार, मार्गशीर्ष शुक्ल द्वितीया एवं 30 नवंबर शनिवार, मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थी। दिसंबर में शादी के 6 शुभ तिथियां हैं जिसमें 1 दिसंबर, रविवार, मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी, 2 दिसंबर सोमवार, मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष, 3 दिसंबर मंगलवार मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, 7 दिसंबर शनिवार, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी,11 दिसंबर बुधवार, मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्दशी एवं 12 दिसंबर गुरुवार , मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा शामिल है।

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