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मध्य प्रदेश प्रवासी मजदूर : 250 में से 78 अपने घर जाने को हुए तैयार

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  • नपा ने 4 बस के माध्यम से किया सब को रवाना

नागदा। lockdown 4.0 में छूट मिलने के बाद शहर व क्षेत्र से प्रलायन करने वाले प्रवासियों मजदूरों का अपने घर जाने का सिलसिला थमसा नजर आ रहा है। अब मजदूरों को लग रहा है कि शायद 1 जून के बाद से जिंदगी पटरी पर लौटने वाली है।

जिसके कारण कई लोग अब अपने घर नहीं जाना चाहते है। ऐसा ही नजारा बुधवार रात को देखने को मिला। जिला प्रशासन द्वारा शहर से लगभग 250 मजदूरों को छोडऩे के लिए बस की व्यवस्था की गई थी।

जिसके लिए 12 बस नागदा भेजी गई थी। मजदूरों की सूची भी तैयार कर ली थी। लेकिन अब नपा ने प्रत्येक मजदूर से फोन जाने का पूछा तो लगभग 50 मजूदरों ने जाने से इंनकार कर दिया और 150 मजूदर जाने को तैयार हो गए।

नपा ने इन सब मजदूरों ने बुधवार शाम को नपा के नरेंद्र मोदी प्रशाल में बुलाया और भोजन कराया। इन के लिए 7 बस भी तैयार की गई।

लेकिन बस में बैठाते समय लगभग 72 मजदूरों ने जाने से इंनकार कर दिया। रात तक महज 78 मजदूर की तैयार हुए अपने घर जाने को। यह मजदूर उप्र व बिहार के थे। जिसके चलते नपा ने इन मजदूरों को 4 बस  के माध्यम से यूपी के लिए रवाना किया।

इन सभी मजूदरों की स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच कि गई। साथ ही समस्त बस को सेनेटाईजर भी किया गया। यह बस गुुरुवार देर रात को यूपी व मप्र की बार्डर झांसी पर पहुंची। यहां पर सभी मजूदरों को छोड़ा गया। यहां से उप्र सरकार द्वारा इन मजदूरों को अपने-अपने गांव भिजवाया जाएगा।

क्यों इंनकार कर रहे है मजूदर

प्रवास मजदूरों ने लगभग एक माह पूर्व नपा कार्यालय में फार्म जमा किए थे। लेकिन बाद में शासन ने ईपास की सुविधा भी प्रारंभ कर दी है।

साथ धीरे-धीरे क्षेत्र के उद्योग भी खुलते जा रहे है। 1 जून से लगभग 200 ट्रेन भी प्रारंभ हो रही हे। जिससे मजूदरों को लग रहा है कि अब lockdown आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

जिससे कई मजदूर अब अपने घर व गांव जाने से इंनकार कर रहे है। शहर से लगभग 800 से अधिक प्रवासी मजदूरों ने नपा कार्यालय में फार्म जमा किए थे। प्रवासी मजदूरों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने के लिए सांसद अनिल फिरोजिया व पूर्व विधायक दिलीपसिंह शेखावत के प्रयास  रंग लाए है।  नगर पालिका के प्रयास रंग लाने लगे है।

नर्मदा-चंबल लिंक के मजदूर भी रवाना

जिले में इन दिनों नर्मदा-चंबल को जोडऩे का कार्य चल रहा है। यह कार्य उज्जैन से होता हुआ नागदा पहुंच गया। जिसमें लगभग 500 से अधिक मजूदर कार्य कर रहे है।

अधिकांश मजदूर उप्र व बिहार के है। लेकिन लॉकडाउन के कारण फंस गए थे। इन में से 40 मजदूरों को बिहार भेजा गया। इन मजदूरों को पहले उज्जैन भिजवाया गया उसके बाद वहां सभी को बिहार के लिए रवाना किया गया था।

सभी मजूदर अपने गंतव्य तक  पहुंच चुके है। वर्तमान में क्षेत्र में बिहार व झारखंड के भी सैकड़ों मजदूर परिवार सहित फंसे हुए है।

प्रशासन द्वारा इन मजूदरों को घर पहुंचाने के लिए प्रयास जारी है। अभी तक शहर सहित अंचल के 172 से अधिक मजूदरों के नाम सांसद के निजी सहायक प्रकाश जैन एवं नगर पालिका के पास पहुंच चुके है।

सांसद के निजी सहायक जैन ने बताया कि प्रशासन के समक्ष भी 300 नाम की सूची है। इन सभी मजदूरों को उज्जैन में एकत्रित किया जाएगा। उसके बाद सभी

मजदूरों को भोपाल ट्रेनों के माध्यम से भेजा जाएगा। वहां से सभी मजदूरों को बसों के माध्यम से गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

राजस्थान पाली के मजदूरों के लिए भी मशक्कत जारी
खाचरौद में राजस्थान पाली  सैकड़ों मजदूर फंसे हुए है। इन मजदूरों के पहुंचाने की व्यवस्था हो चुकी है लेकिन इस व्यवस्था के चलते उन्हें बार्डर तक ही छोड़ा जा रहा है।

जिसके चलते सांसद प्रयासरत है कि उन्हें गंतव्य तक पहुंचाया जाए। जैन ने बताया कि इस पर अधिकारियों से चर्चा चल रही है  जल्द इन मजदूरों के पहुंचाने के लिए भी व्यवस्था हो जाएगी।

इनका कहना
नपा कार्यालय में लगभग 800 मजदूरों ने अपने घर जाने के लिए फार्म जमा किए थे। इन में से 250 मजदूरों की सूची जिला मुख्यालय से आई थी और इन को पहुंचाने के लिए 12 बस भी जिला प्रशासन ने भेजी थी। लेकिन महज 150 मजदूरों ने जाने के लिए सहमती जताई थी। बुधवार रात को जब इन को रवाना किया जा रहा था उस 72 मजदूरों ने जाने से इंनकार कर दिया। जिसके चलते 4 बस से 78 मजदूरों को अपने घर पहुंचाया गया है।
सतीश मटसेनिया
सीएमओ, नपा नागदा

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सांकेतिक तस्वीर

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