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लॉकडाउन डायरी : कॉलेज के रास्ते बारिश के दिनों में

Lockdown diary: rainy days on the way to college

आज फिर रिमझिम बारिश ने कॉलेज के दिनों की यादों को ताजा कर दिया. फिलहाल लॉकडाउन में हूं. कोराना वायरस से बचाव के लिए घर में बंद हूं. वर्क फार्म होम.

क्या दिन थे कॉलेज के, आंखे बंद कर सोचो तो दिल की धड़कनें बढ़ जाती है. एक पल के लिए ऐसा लगता है कि, कल ही कॉलेज पास आउट हुआ हूं. साल 2009 में स्कूल खत्म हुआ. कॉलेज में दाखिला लिया. वह भी ऐसा जिसे शहर का गुरुकुल कहा जाता था.

महाविद्यालय में हमें भी प्यार का बुखार चढ़ा. ढाई अक्षर के शब्द को कौन नहीं जानता. मैं कब उस लड़की को लड़की को चाहने लगा पता ही नहीं चला. वेदिका(परिवर्तित नाम) नाम था उनका. बिल्ली जैसी आंखे और लंबे बाल वेदिका की खूबसूरती में चार चांद लगा देती थी.

प्यार की शुरुआत कुछ यूं हुई, सावन के पहले सोमवार को रिमझिम बारिश का दौर जारी था. घर से कॉलेज की ओर निकला, पीछे पलटकर देखा तो एक लड़की छाता लेकर चलती हुई दिखाई दी.

Lockdown diary: rainy days on the way to college
Lockdown diary: rainy days on the way to college

नागिन से चाल देखकर उससे बात करने का मन हुआ. पढ़ाई का दौर शुरू हुआ, सवान भी जाने को था, लेकिन उससे बात करने का मौका नहीं मिल सका. वह रोज वह सुबह 8.30 बजे कॉलेज के लिए निकलती. अब वह मेरे आगे और मैं उसे फॉलो करने लगा.

शायद भगवान भी मुझे उससे बात करने का मौका देना चाहते थे. चढ़ते भादौ के साथ बारिश भी चरम पर थी. तेज आंधियों के साथ बारिश हो रही थी. बिगड़ते मौसम को देख छात्रों की संख्या आम दिनों की तुलना में कम थी. उस दिन वह उसके पापा के साथ कॉलेज पहुंची.

छुट्टी हुई, कुछ देर रुकने के बाद वह बारिश में भींगते हुए घर की ओर निकल पड़ी, मैं उसके पीछे चलने लगा. कुछ दूरी चलने के बाद मैंने उसे अपना छाता थमा दिया.

Lockdown diary: rainy days on the way to college

मुझे देखकर वैदिका ने हल्का संकोच किया और छाता लेकर आगे निकल गई. अगले दिन उसने मुझे विन्रमता पूर्वक छाता लौटाया और आंखे चुराते हुए तेजी से निकल गई.

पहला प्यार पवित्र होता है, बेखौफ और उलझनों से परे……ऐसे में धोखा नहीं सीख मिलती है. उस दिन के बाद हमारे प्यार की शुरुआत हुई. संग आना जाना शुरु हुआ.

बातें शुरु हुई, फोन नंबर भी एक्सचेंज हुए. साथ तो चलते हुए मन में बस एक ही भय होता था, कि कहीं वैदिका के पिता से मुलाकात ना हो जाए…..

मेरी मोहब्बत के पिता का टाईम टेबल भी अजीब था, जिन रास्तों पर उम्मीद नहीं की जा सकती थी. वहां पर उनके साक्षता दर्शन हो जाते थे. बस कृपा तो राजा महाकाल की थी, जो उसके पिता को हम दिखाई नहीं देते.

हर प्रेम प्रसंग को किसी ना किसी की नजर लगती है, मेरे प्यार को भी ग्रहण लग गया. फिर क्या था, हमारी लव स्टोरी में एक नया हीरो आ गया. हीरो थे वैदिका के एक्स बॉयफ्रेंड, उनकी मोहब्बत स्कूल की थी.

Lockdown diary: rainy days on the way to college

हीरो साहब से वेदिका की नजरें मिली और मुझसे दुरियां बढऩे लगी. परेशानी यह है कि, करीब चार माह चली मोहब्बत में उसने कभी एक्स का जिक्र नहीं किया. दोनों की बातचीत शुरु हो चुकी थी.

उसका एक्स कॉलेज में उसका सीनियर था. वैदिका के किसी शुभचिंतक ने बताया कि, दोनों की मोहब्बत चार सालों से परवान पर थी, परिवार वालों को दोनों के प्यार का पता चल गया था, इसलिए कुछ महीनों से बातचीत बंद थी. तू इनके बीच कैसे आ गया, मेरा मन उदास तो था, पर एक बार पूरी कहानी जानने की इच्छा थी.

बड़ी कोशिशों के बाद वैदिका अकेले में मिल ही गई….उस दिन उसकी आंखों में चमक नहीं, शर्म थी. सवाल का दौर शुरु ही हुआ था, कि उसका एक्स वहां आ गया………………..

अगला पार्ट निरंतर………..

दोस्तों कहानी कैसी लगी. हमें कमेंट कर बताएं. अच्छे और सकारात्मक कमेंट की आशा रखते हैं. और हां यदि आपके पास भी कोई वास्तविक कहानी हो तो हमें कमेंट कर बताए, जरूरी नहीं टाईप करके ही भेंजे, ऑडियो या हाथों से लिखी हुई कहानियों को भी स्वीकार किया जाएगा. कहानियों की कह कर लेते हैं……………

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