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लॉकडाउन डायरी : ग्रेसिम विद्या मंदिर के फुकरे, गेट पर इन्होंने बांध दी थी रिल

Lockdown diary: Fukrey of Grasim Vidya Mandir, he tied Rill at the gate

बेटा 12वीं कक्षा के बाद तुम मास्टर नहीं मिस्टर कहलाओगे. जो हरकत आज की है, यदि 12वीं बाद करोगे तो सीधे जेल जाओगे…यह कथन हमारे स्कूल के गणित शिक्षक सुनील गुप्ता के है. दरअसल किस्सा नागदा शहर के ग्रेसिम विद्या मंदिर स्कूल का है.

बात क्लास 12वीं है. स्कूल के बाद दोपहर 2 बजे से गणित की एक्ट्रा क्लास लगाई जाती थी. 10 वीं बाद सभी के विषय चेंज हो गए थे. कुछ महान योद्घाओं ने कक्षा 9वीं में ही स्कूल से बगावत कर ली थी.

जिसमें रविश उमठ, विकास ठाकुर, सुरेश ठाकुर, संदीप शर्मा शामिल थे. उक्त वरिष्ठ लोग हमें मस्ती करने के लिए प्रेरित करते थे. इन लोगों के स्कूल छोडऩे के बाद यूनियन काफी कमजोरी महसूस करने लगी थी.

जिसके बाद मस्ती की बागडोर सांइस स्ट्रीम से अक्षय काले, रोहित गुप्ता, नरेंद्रसिंह चौहान, नीलेश जैन वहीं कॉमर्स स्ट्रीम से कमलेश वर्मा, चेतनसिंह बघेल, धर्मपालसिंह राठौर के जिम्मे आ गया था.

हुआ यूं कि, हमेशा की तरह दोपहर दो बजे हम सभी स्कूल एक्ट्रा क्लास पहुंचे थे. नरेंद्र चौहान जिनके घर पर पुराने टेम की काफी सारी कैसेट्स मौजूद थी, उसमें से एक कैसेट लेकर स्कूल पहुंचे. लंबी कद काठी होने के बावजूद चौहान जी की जवानी उभर कर नहीं आ सकी थी.

रिल को देखकर मेरे (कमलेश वर्मा) और अक्षय काले के दिमाग में एक युक्ति सुझी. जिसके अनुसार रील को स्कूल के समीप से गुजर रही पेट्रोल पंप रोड के मुख्य द्वार पर दोनों ओर से बांध दिया गया.

रील को देखकर मार्ग से गुजरने वाले राहगीर अचरज में पड़कर अपने वाहनों को रोकने लगे. कई वाहन चालक मार्ग को बंद समझकर देखकर उलट लौट गए. उक्त कृत्य को देखकर हमें बहुत ही मजा आ रहा था.

काफी देर हंसने के बाद गुप्ता जी स्कूटर लेकर पहुंचे. उन्होंने हमारी हरकत देख ली थी, लेकिन कुछ उस समय कुछ नहीं कहा. चलती कक्षा के बाद उन्होंने धीमी आवाज में कहा—अक्षय काले…कमलेश वर्मा यह जो हरकत कर रहे अभी तो चल जाएगा. स्कूल के बाद तुम मास्टर नहीं मिस्टर कहलाओगे. यही हरकत आमजीवन में दोबारा की तो, सीधे जेल जाओगे.

दोस्तो, देश कोरोना वायरस की महामारी से गुजर रहा है. देश में लॉकडाउन प्रभावी है. क्या पता किसी कैसेट की रील कब टूट जाएं. आशा करता हूं, मेरे सभी दोस्त घर पर होंगे.

पीएम नरेंद मोदी की बातों का पालन कर घर में दुबके होंगे. हमेशा की तरह दिमाग में युक्ति सूझी तो स्कूल के किस्सों पर जमी धूल को हटाने का प्रयास किया.

ब्लॉक को मेरे काफी मित्र ध्यान पूर्वक पढ़ेगे. आशा करता हूं, कि चेतन बघेल साहब मेरी हिंदी की अशुद्धियों को दूर करने के लिए अपने दैनिक आवश्यक कार्यों को छोड़ेंगे.

दोस्तों कहानी कैसी लगी. हमें कमेंट कर बताएं. आपके कमेंट सकारात्मक भाषा में हो. आपके पास भी कोई वास्तविक कहानी हो तो हमें भेजे, जरूरी नहीं टाईप करके ही भेंजे, ऑडियो या हाथों से लिखी हुई कहानियों को भी स्वीकार किया जाएगा. कहानियों की कह कर लेते हैं……………

Lockdown diary: Fukrey of Grasim Vidya Mandir, he tied Rill at the gate

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